" /> यूपी में बढ़ा महिलाओं का लिंगानुपात!….२०२०-२१ में बढ़कर १०१७ हो गया

यूपी में बढ़ा महिलाओं का लिंगानुपात!….२०२०-२१ में बढ़कर १०१७ हो गया

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण अभियान से बढ़ी जागरूकता के कारण लिंगानुपात में सुधार हुआ है। वर्ष २०१५-१६ में जहां लिंगानुपात ९९५ था, वहीं २०२०-२१ में बढ़कर १०१७ हो गया है। बढ़ी जागरूकता का असर प्रजनन दर पर भी पड़ा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-५ की रिपोर्ट के मुताबिक प्रजनन दर गिरकर २.७ के मुकाबले २.४ पर आ गई है। राज्य सरकार प्रवक्ता ने बताया कि विगत साढ़े चार वर्ष से अधिक की अवधि में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन तथा कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रयास सफल हुए हैं। २०१५-१६ में लिंगानुपात (प्रति १००० पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) ९९५ से बढ़कर २०२०-२१ में १०१७ हो गई है। दावा किया गया है कि प्रदेश में खाना पकाने के लिए स्वच्छ र्इंधन का इस्तेमाल करनेवाले परिवारों तथा बेहतर स्वच्छता सुविधाओं का उपयोग करनेवाले परिवारों में भी बढ़ोतरी हुई है। २०१५-१६ में स्वच्छ र्इंधन का इस्तेमाल करनेवाले परिवार का प्रतिशत ३२.७ था, जो अब ४९.५ हो गया है। इसी तरह स्वच्छता सुविधाओं में यह प्रतिशत ३६.४ से बढ़कर ६८.८ हो गया है।

राष्ट्रीय स्तर से ज्यादा प्रदेश में सुधार
एनीमिया प्रभावित महिलाओं की संख्या में ५.१ प्रतिशत की कमी आई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह कमी १.८ प्रतिशत है। प्रदेश में बच्चों के वृद्धि अवरोध के मामलों में ६.६ प्रतिशत की कमी हुई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर २.९ प्रतिशत। राज्य में सामान्य से कम वजन के बच्चों के मामलों में ७.४ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ३.७ प्रतिशत।

कुछ इस तरह आया सुधार
काम                                                   पहले                                   अब
संस्थागत प्रसव                                ६७.८ प्रतिशत                     ८३.४ प्रतिशत
परिवार नियोजन के उपाय              ४५.५ प्रतिशत                      ६२.४ प्रतिशत
प्रसव पूर्व जांच                                २६.४ प्रतिशत                       ४२.४ प्रतिशत
बच्चों में संक्रमण दर                        १५ प्रतिशत                             ५.६ प्रतिशत