" /> …तो बच जाती १० जानें!, भानुशाली इमारत का दुर्भाग्यशाली हादसा

…तो बच जाती १० जानें!, भानुशाली इमारत का दुर्भाग्यशाली हादसा

एक तो मुंबई कोरोना वायरस और लॉकडाउन जैसी मुश्किलों से पहले ही जूझ रही है, ऊपर से अब मॉनसून ने भी गजब ढाना शुरू कर दिया है। पिछले कई दिनों से जारी भारी बारिश ने मुंबई की पुरानी इमारतों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। परसों रात दक्षिण मुंबई में जीपीओ के पास एक ऐसी ही दुर्भाग्यशाली इमारत ‘भानुशाली’ ढह गई। इस इमारत को म्हाडा ने पहले से ही खतरनाक घोषित कर रखा था और काफी लोगों ने इसे खाली भी कर दिया था। इसके बावजूद कुछ लोग वहीं रह रहे थे। अगर उन्होंने भी इमारत को खतरनाक घोषित होने के बाद खाली कर दिया होता तो वे १० जानें बच जातीं।

मुंबई में गुरुवार को फोर्ट स्थित भानुशाली इमारत के गिरने से होनेवाले हादसे में मनपा की टीम ने कल शुक्रवार को २७ लोगों को मलबे से बाहर निकाला। इनमें से १० लोगों की जान चली गई जबकि दो अन्य की हालत खबर लिखे जाने तक नाजुक बनी हुई है। एनडीआरएफ की तरफ से राहत और बचाव कार्य के दौरान शुक्रवार सुबह मलबे में से एक और महिला का शव बरामद हुआ, जबकि दोपहर बाद तक मलबे से लाशों के निकलने का सिलसिला जारी रहा। बता दें कि गुरुवार शाम भारी बारिश के बीच दक्षिण मुंबई की भानुशाली इमारत गिर गई थी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही मुंबई मनपा और एनडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गई। दमकल विभाग के चीफ फायर ऑफिसर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मलबे में दबे और इमारत में भटके लोगों को निकालने का कार्य काफी कठिनाईपूर्ण रहा और टीम इस कार्य में शुक्रवार की दोपहर तक मशक्कत करती रही।

ऐसे में टीम ने मलबे से कुल २७ लोगों को बाहर निकाला, जिसमें से १० ने अपने प्राण त्याग दिए जबकि २ गंभीर रूप से घायल थे। इस इमारत को म्हाडा द्वारा पहले से ही खतरनाक घोषित कर खाली करवा दिया गया था लेकिन इसके बावजूद भी कुछ लोग इमारत में रह रहे थे। गुरुवार को इस हादसे में कुसुम पद्मलाल गुप्ता, ज्योत्सना पद्मलाल गुप्ता, पद्मलाल मेवालाल गुप्ता, किरण धीरज मिश्र, मणिबेन नानजी फरिया, प्रदीप चौरसिया, रिंकू चौरसिया व कल्पेश नाजी तारिया की मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला की पहचान नहीं हो पाई है। इसी के साथ घायलों में नेहा गुप्ता और भालचंद्र कंडु शामिल हैं।