" /> यही है ड्रैगन का डेंजरस हथियार!, परमाणु संपन्न देश के जवानों ने इस्तेमाल किया हाथ का बना क्रूर हथियार

यही है ड्रैगन का डेंजरस हथियार!, परमाणु संपन्न देश के जवानों ने इस्तेमाल किया हाथ का बना क्रूर हथियार

यहां खबर के साथ लगी हुई तस्वीर को देखिए। ये है एक परमाणु संपन्न देश ड्रैगन का डेंजरस हथियार, जिससे उन्होंने २० भारतीय सैनिकों की रात के अंधेरे में बर्बर हत्या की। इससे सवाल उठता है कि क्या कोई इंसान इतना क्रूर हो सकता है? यदि धोखेबाज चीन के सैनिकों की बात करें तो इसका जवाब हां में ही होगा। दरअसल, भारत और चीन के सैनिकों के बीच झूमाझटकी और सामान्य मारपीट की खबरें तो पहले भी आती रही हैं, लेकिन इस बार चीन के सैनिकों ने जो बर्बरता का प्रदर्शन किया वह अमानवीयता की पराकाष्ठा थी।

हालांकि इस बात को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कुछ फोटो सामने आए हैं, जो चीनी सैनिकों की क्रूरता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। हास्यास्पद बात ये है कि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कल अपनी वेबसाइट पर हायड्रोजन बम का वीडियो जारी किया। शायद यह बताने के लिए उनके पास खतरनाक बम भी है।

ऐसा नहीं है कि सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कभी तकरार नहीं हुई थी। पहले भी ऐसा कई बार हुआ है, लेकिन तब झड़प में झूमाझटकी या पत्थरबाजी की घटनाएं ही देखने में आती थीं।

पर इस बार लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में भारत के कई जवान शहीद हो गये। चीनी सेना को भी इस झगड़े का खमियाजा भुगतना पड़ा है। मगर परिस्थितियों का आकलन किया जाए तो ऐसा स्पष्ट है कि चीनी सेना की नीयत पहले से ही ठीक नहीं थी। चीनी सेना हमले की तैयारी के साथ वहां पहुंची थी। जवानों की आपबीती से यह स्पष्ट तो है ही, जवानों द्वारा खींची गयी चीनी हथियारों की तस्वीरें सच बयां कर रही हैं। ऐसी ही एक तस्वीर में चीनी हथियार दिखाए गये हैं जो घटनास्थल से बरामद हुए हैं। इनमें लोहे के रॉड पर बड़ी नुकीली कीलों को वेल्डिंग करके हमले के लिये तैयार किया गया है। इन्हीं हथियारों से लाल सेना द्वारा भारतीय जवानों पर हमला किया गया था।
लेकिन, इस बार चीन ने  फिर १९६२ के युद्ध की याद दिला दी जब वह सामने से हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा लगा रहा था, वहीं पर्दे के पीछे से भारत की पीठ में खंजर घोंपने की साजिश रच रहा था। १९६२ में धोखे से किए गए चीनी हमले में भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। पूरी दुनिया जानती है कि चीन की नीतियां हमेशा से विस्तारवादी रही हैं। यही कारण है कि उसके हर पड़ोसी देश से सीमा को लेकर संबंध अच्छे नहीं है। क्योंकि चीन अनावश्यक रूप से दूसरे देश की सीमा में घुसपैठ की कोशिशें करता रहता है। भारतीय लोगों के मन में अब यही सवाल उठ रहा है कि क्या भारत चीनी सैनिकों की इस क्रूरता का बदला लेगा? यदि हम चीन को उसी की भाषा में जवाब देने में सफल होते हैं तो निश्चित ही यह शहीद सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और चीन के लिए सबक भी।

फिर १९६२ के युद्ध की याद दिला दी जब वह सामने से हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा लगा रहा था, वहीं पर्दे के पीछे से भारत की पीठ में खंजर घोंपने की साजिश रच रहा था। १९६२ में धोखे से किए गए चीनी हमले में भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। पूरी दुनिया जानती है कि चीन की नीतियां हमेशा से विस्तारवादी रही हैं। यही कारण है कि उसके हर पड़ोसी देश से सीमा को लेकर संबंध अच्छे नहीं है। क्योंकि चीन अनावश्यक रूप से दूसरे देश की सीमा में घुसपैठ की कोशिशें करता रहता है। भारतीय लोगों के मन में अब यही सवाल उठ रहा है कि क्या भारत चीनी सैनिकों की इस क्रूरता का बदला लेगा? यदि हम चीन को उसी की भाषा में जवाब देने में सफल होते हैं तो निश्चित ही यह शहीद सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और चीन के लिए सबक भी।