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थ्री प्रीमियर्स!

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया का सीन बदलकर रख दिया है। बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। सिनेमा हॉल कब खुलेंगे और दर्शक पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक के साथ अपनी सीट पर बैठकर सिनेमा के मजे कब लेंगे, इस पर निश्चित तौर पर कोई कुछ भी नहीं कह सकता। बस अंदाज और कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन इन सबके बीच उन फिल्म निर्माताओं की जान हलक में है, जिनकी फिल्में पूरी हो चुकी हैं पर लॉकडाउन के कारण रिलीज नहीं हो पा रही हैं। पैसे फंसे हुए हैं। ऐसे में एकमात्र सहारा ओटीटी प्लेटफॉर्म ही हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भी अपनी वेबसाइट्स को चलाने के लिए नए प्रोडक्ट्स की जरूरत है क्योंकि वहां भी सब चीजें पुरानी हो चुकी हैं। ऐसे में डिब्बे में बंद फिल्मों के भी भाग्य खुल गए हैं। इस महीने के आखिर में ३ फिल्में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही हैं।
आगामी ३१ जुलाई को शुक्रवार है। शुक्रवार आर्ट और कल्चर के लिए शुभ दिन माना जाता है। यही वजह है की निर्माता और वितरक इस दिन को नई फिल्म की रिलीज के लिए शुभ मानते हैं। अब थिएटर और मल्टीप्लेक्स नहीं हैं तो क्या हुआ? ओटीटी प्लेटफॉर्म एक नया फॉर्मेट है और यहां भी वही सब हो रहा है जो थिएटर में होता था। अब यहां भी शुक्रवार को ही नई फिल्में रिलीज होने का दिन निश्चित हो गया है। इसलिए आगामी ३१ जुलाई को एक साथ तीन नई फिल्में रिलीज होनेवाली हैं। सिनेमा की भाषा में कहें तो तीन मल्टीप्लेक्स चेन में तीन फिल्में रिलीज होंगी। इनके थ्री प्रीमियर्स होंगे। ये तीनों फिल्में अमेजॉन प्राइम, नेटफ्लिक्स और डिज्नी हॉटस्टार पर रिलीज हो रही हैं। ये फिल्में है `शकुंतला देवी’, `रात अकेली है’ और `लूटकेस’। अब तीनों फिल्मों के रिलीज होने के साथ ही सोशल मीडिया पर इनके रिव्यूज आ जाएंगे क्योंकि पहले भी जो चीजें इन प्लेटफार्म पर रिलीज होती आई हैं, उनके रिव्यू मीडिया और सोशल मीडिया पर उसी अंदाज में आ जाते हैं, जैसे थियेटर में रिलीज होनेवाली फिल्मों के आते थे। अब चूंकि बॉलीवुड पिछले कुछ समय से ठंडा पड़ा है, लोग घरों में बंद हैं, एक्टिविटी शून्य हैं तो इन फिल्मों के बारे में भी ज्यादा चीजें बाहर नहीं आ पाई हैं। मतलब मामला गर्म है या ठंडा। ट्रेड पेपर्स बॉलीवुड का हाल-चाल बताया करते थे। फिल्मों की डील कैसे हो रही है, कब हो रही है, कहां हो रही है, कैसे रिलीज होगी, कितने में रिलीज होगी, वगैरह-वगैरह। ये सारी जानकारियां ट्रेड पेपर्स में आ जाती थीं लेकिन लॉकडाउन के कारण फिल्म ट्रेड जर्नल्स का प्रकाशन भी ४ महीने से बंद है। अब कुछ हो ही नहीं रहा है तो वे भी क्या छापें?

पिछले महीने कुछ फिल्मों की शूटिंग के शुरू होने के संकेत मिले थे लेकिन यह सिर्फ संकेत भर ही थे, क्योंकि अभी तक किसी फिल्म की शूटिंग शुरू होने की खबर नहीं आई है। फिल्मों की शूटिंग शुरू करना आसान नहीं होता। काफी झमेला रहता है। इसकी तुलना में सीरियल की शूटिंग आसान होती है। सीरियल्स के सेट लगे होते हैं। इंडोर सेट। बस झाड़ पोंछा, कलाकार और तकनीशियन आ गए और शूटिंग शुरू। वहां लाइटिंग से लेकर हर चीज फिक्स रहती है। सिनेमा में ऐसा नहीं होता। आउटडोर है तो उसकी मुश्किलें अलग हैं। अगर इनडोर है तो वहां भी सेट को इधर-उधर घुमाना पड़ता है। सिनेमा में ऐसा है कि अगर शूटिंग आज कर दी तो फिल्म कब पूरी होगी, पोस्ट प्रोडक्शन कब होगा, रिलीज डेट कब फाइनल होगी, काफी लंबा रास्ता है। सीरियल्स में अभी शूटिंग की, रात को एडिट की और कल एपिसोड तैयार है। रात को या परसों टेलीकास्ट कर दो। तो काम बड़ा जल्दी होता है। इसलिए ब्रॉडकास्टर्स के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं है, लेकिन फिल्म निर्माताओं के लिए मुश्किल ज्यादा है। वैसे भी सुनने में आया था कि दिवाली में थियेटर्स खुलेंगे लेकिन फिर अब सुनने में आ रहा है कि मामला शायद जनवरी तक चल जाएगा। यानी कुल मिलाकर लब्बो-लुआब यही है कि अभी इंतजार जारी रहेगा।