" /> टूर्स वालों की लॉक डाउन में चांदी : मुंबई फंसे लोगों को पहुंचाने के लिए दोगुनी वसूली

टूर्स वालों की लॉक डाउन में चांदी : मुंबई फंसे लोगों को पहुंचाने के लिए दोगुनी वसूली

मुंबई सहित महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के मामलें लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालात इस कदर बेकाबू हो गए हैं कि लोग सड़क के रास्ते ही अपनी मंजिल नापने में लग गए हैं। जैसे-तैसे अपने गृह राज्यों में लौटने के होड़ के बीच टूर्स एंड ट्रैवेल्सवालों की लॉक डाउन में चांदी हो गई है। मुंबई से निकले लोगों को गांव तक पहुंचाने के लिए टूर्स वाले दोगुने-तीगुने दाम वसूल रहे हैं।

सामाजिक दूरी का फायदा
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार यात्रा में भी सोशल डिस्टेंसिंग रखना जरूरी है। मुंबई से बाहर जानेवाले लोग कम से कम 3-4 के ग्रूप में होते हैं। ऐसी स्थिति में 7 सीटों वाली एसयूवी बड़ी डिमांड में है। गाड़ी बड़ी होते ही ऑपरेटर्स ज्यादा दाम मांगते हैं।  ₹ 15 से ₹ 18 प्रति किमी एसयूवी के और ₹ 12 से ₹ 14 छोटी कारों के मांगे जा रहे हैं।

सटे राज्यों की डिमांड
मुंबई से गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और राजस्थान की डिमांड है। ऑपरेटर्स इन राज्यों से दो दिन में यात्रियों को ड्रॉप करके लौट सकते हैं। यात्रियों को दोनों साइड का किराया चुकाना होता है, जबकि गाड़ीवाले वापसी में खाली लौटते हुए भी हाइवे से सवारियां बैठा लेते हैं। इन गाड़ियों में सेनिटाइजेशन इत्यादि का बिलकुल ध्यान नहीं दिया जाता है।

पर्मिशन भी दिलाएंगे
‘दोपहर का सामना’  संवाददाता ने कई ऑपरेटर से बात की जिसने पांच सवारी के लिए मुंबई से जोधपुर के लिए ₹ 18 प्रति किमी मांगे। इसके अलावा ड्राइवर को ₹ 1,500 प्रतिदिन अलग से देने थे। रास्ते में टोल के पैसे यात्री को देने हैं। सबसे मजे की बात ये है कि यात्री के गृह राज्य की अनुमति भी ऑपरेटर्स लेने के लिए तैयार थे। इसके लिए ₹ 3,000-₹ 4,000 अतिरिक्त खर्च करने होंगे। ऑपरेटर्स ने बताया कि पुलिस की ‘सेटिंग’ से ऐसा संभव है। मुंबई से जोधपुर के लिए पांच लोगों के ग्रुप को लगभग ₹ 45,000 खर्च करने पड़ते हैं। मुंबई से बैंगलुरु के लिए भी लगभग इतनी ही रकम खर्च करनी पड़ती है।

नाकाबंदी में सख्ती नहीं
ऑपरेटर्स द्वारा बताए गए दाम पर गाड़ी बुक करके कालबादेवी से पांच लोगों का ग्रूप कल जोधपुर निकला। ऑपरेटर द्वारा किसी दूसरे जिले से अनुमति ली गई थी। गाड़ी जब अल-सुबह कालबादेवी यात्रियों को लेने आई तब ड्यूटी पर मौजूद कॉन्स्टबल ने रोक लिया। यहां ₹200 का ‘टोकन’ देकर गाड़ी निकली जिसे राजस्थान तक किसी ने नहीं रोका। न ही किसी ने यात्री गिने।

रोज आती है डिमांड
ऑपरेटर्स ने बताया कि रोजाना कई गाड़ियों की डिमांड होती हैं। मुंबई से हैदराबाद, इंदौर, जोधपुर, पाली, फालना, बंगलुरु और अमदाबाद के लिए ज्यादातर डिमांड होती है। रोजाना मुंबई से कम से कम 7000 गाड़ियां और लगभग 500 बसें निकलती हैं। इतनी पर्मिशन मिलने के बावजूद मुंबई से रोजाना 30-35 पर्मिशन लंबित होती हैं। राजस्थान पहुंचे विवेक पारीक में बताया कि इस शहर से निकलना मजबूरी है।रोज़ाना जितनी संख्या में केस आ रहे हैं, उससे डर लगता है।