रेल रफ्तार से होगी हवाई लैंडिंग

भारतीय रेलवे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की योजना पर काफी तेजी से काम कर रही है। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए रेलवे यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का सहारा लेने के अलावा रेल पटरियों सहित सिग्नलिंग सिस्टम को भी अपग्रेड कर रही है। रेल अधिकारियों की मानें तो रेलवे जिस रफ्तार से ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, इससे हवाई लैंडिंग होना शत-प्रतिशत लाजमी है। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने से मजबूरी में हवाई जहाज का सफर करनेवाले यात्री रेल यातायात की तरफ अपना रुख करेंगे।
जानकारी के मुताबिक ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने, सिग्नल पार करने की घटनाओं को रोकने व रेल पटरियों की वैâपेसिटी बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक सिग्नल सिस्टम को रेलवे लागू करने जा रही है। इस सिस्टम का नाम यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम है। रेलवे दिल्ली-मुंबई रूट सहित देश के अन्य रेलवे रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने में लगी है। मुंबई-नासिक, मुंबई-पुणे सहित अन्य राज्यों में रेलवे ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर ट्रायल रन कर रही है, जिसका असर हवाई यातायात पर प़ड़ने के पूरे आसार हैं।
मध्य रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक सुबोध जैन का कहना है कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ने से हवाई यातायात पर दबाव बढ़ेगा। फिलहाल रेलवे दिल्ली से मुंबई के बीच राजधानी, अगस्त क्रांति जैसी ट्रेनों को चलाती है। इन ट्रेनों का किराया साल के ३०० दिन हवाई जहाज के किराए जितना रहता है। कभी-कभी ये किराया हवाई किराया से अधिक भी हो जाता है। जब सामान्य ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी तो हवाई सफर करनेवाले यात्री ट्रेन ़का सफर करने लगेंगे क्योंकि मेल-एक्सप्रेस ट्रेन का किराया राजधानी और हवाई जहाज के किराए से कई गुना कम है। इतना ही नहीं हवाई जहाज यातायात पर असर पड़ने की दूसरी वजह ये भी बताई जा रही है कि हवाई जहाज से सफर करने पर सीमित मात्रा में ही लगेज ले जाने की छूट है। साथ ही एयरपोर्ट पर दो घंटे पहले जाओ, सामान चेक कराओ, बोर्डिंग पास बनवाने जैसी कई भारी झंझट रहती है। ऐसे में सामान्य ट्रेनों की स्पीड बढ़ने पर हवाई सफर करनेवाले यात्री रेल सफर को अधिक प्राथमिकता देंगे।