" /> तृतीयपंथियों की करुण पुकार : हमें भी समझें मानव

तृतीयपंथियों की करुण पुकार : हमें भी समझें मानव

तृतीयपंथी समाज को एक उपेक्षित वर्ग माना जाता रहा है। यह हमेशा से ही मांगकर अपना पालन-पोषण करते आ रहे है। लॉक डाउन की निरंतर बढ़ती कालावधि के कारण इनके सामने पेट भरना काफी कठिन साबित हो रहा है।
बता दें कि कल्याण-पश्चिम के कचोरे परिसर में लगभग 70 तृतीयपंथी समाज के लोग रहते हैं, इनको भूखे मरने की नौबत आ गई है। इनके समाज में कुछ लोग शिक्षित भी हैं, बावजूद इनके पास कोई नौकरी नहीं है और न ही कोई व्यवसाय है, ऐसे में इनके सामने भीख मांगने के अलावा कोई दूसरा उपाय भी नहीं बचता है। उदर निर्वाह के लिए कुछ लोग ट्रेन, दुकान, घर से भीख मांगकर तो कुछ लोग बच्चा पैदा होने पर जच्चा-बच्चा को दुआ देकर पैसे कमाकर अपना जीवनयापन करते है लेकिन इस महामारी के समय में सब कुछ बंद हो गया है। इस महामारी के समय में इनको घर का किराया, बिजली का बिल, खाने के अलावा दवा की भी जरूरत पड़ती रहती है लेकिन यह सब पैसे के अभाव में बंद हैं। चंचल नामक एक तृतीयपंथी ने कहा कि गरीब मजदूरों को सरकार, प्रशासन से लगातार मदद मिल रही है लेकिन हम लोगों को इस समय भी नजरअंदाज किया जा रहा है। इस विषम परिस्थिति में भी हमारी तरफ कोई ध्यान देनेवाला नहीं है। सामाजिक संगठनों ने कुछ दिनों तक हमारी मदद की लेकिन अब वह भी खत्म हो गया है। घर में खाने के लिए कुछ भी सामान नहीं है, वहीं पर मौजूद गीता ने कहा कि हम भी इंसान हैं, हमारा भी पेट है, समय-समय पर हमको भी भूख लगती है। हमारी तरफ भी सरकारें, सामाजिक संस्थाएं ध्यान दें और हमारी मदद करें।