" /> सह्याद्रि के शिखर!, हिमालय की ओर कूच करो

सह्याद्रि के शिखर!, हिमालय की ओर कूच करो

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आज अपने ६० वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। कहा जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ समझदारी आती है। यह संपूर्ण सत्य नहीं है। वे समझदार थे ही। उम्र महज एक माध्यम रही। मुख्यमंत्री ठाकरे का एक लंबा साक्षात्कार दो भागों में ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ। उद्धव ठाकरे का विशेष स्वभाव इससे ही स्पष्ट हो जाता है कि पूरे धैर्य के साथ अपने विचार व्यक्त करने के बावजूद साक्षात्कार तूफानी साबित हुआ। उद्धव ठाकरे को हम कई सालों से जानते हैं। हम उनके स्वभाव और उनके काम करने के तरीके से भलीभांति परिचित हैं। महाराष्ट्र को अब यह विश्वास हो गया है कि यह इंसान उन लोगों में से नहीं है, जो बड़ा पद पाते ही बदल जाते हैं। उन्होंने संकट के समय में महाराष्ट्र के नेतृत्व को स्वीकार किया। हालांकि उनका स्वभाव संयमी भले ही हो लेकिन वे ‘युद्ध के दौरान’ मजबूत, राजनीतिक हार में धैर्यवान, जीत में उदार और शांति में स्नेही हैं। उद्धव ठाकरे ने एक युवा नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया और आज ‘साठ’ के होने दौरान मुख्यमंत्री के रूप में अपना काम शुरू किया। इसका मतलब है कि जब ठाकरे ने राजनीति में प्रवेश किया, तो उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा, उतार-चढ़ाव देखने पड़े, अपमान और आलोचना सहन करनी पड़ी। उद्धव ठाकरे ‘सामना’ के साक्षात्कार में जो कहते हैं, वो सही ही है। वे कहते हैं, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मैं दुनिया का एकमात्र ऐसा उदाहरण हूं, जिसकी ताकत सबसे कम आंकी गई, वही पार्टी का सर्वोच्च नेता बन गया और कई लोग कहते थे कि उसमें सामर्थ्य नहीं है लेकिन वह राज्य का मुख्यमंत्री बन गया!’ उद्धव ठाकरे पिछले छह महीने से राज्य में उत्तम शासन कर रहे हैं। जनता का ख्याल रखते हुए वे राज-काज संभाल रहे हैं। ‘कोविड -१९’ का संकट मामूली नहीं है। यह संकट दुनिया को निगलने निकला है। उसी कोविड के जबड़े में हाथ डालकर वे लड़ रहे हैं, कठोर निणर्‍य ले रहे हैं। उनकी नीति है कि एक बार निणर्‍य लेने के बाद पीछे नहीं हटना है। मुख्यमंत्री ठाकरे ने पैâसला लिया है कि लोगों का जीवन महत्वपूर्ण है। पहले हताहत होने से बचना है, फिर लॉकडाउन आदि को हटाना है। फालतू का लाड नहीं करेंगे। तमाम राजनीतिक दबावों के बावजूद ठाकरे ने कोरोना को नियंत्रण में लाया, धारावी में संकट की तीव्रता कम की। अब उन्होंने अपना ध्यान महाराष्ट्र के शेष हिस्सों की लड़ाई की ओर लगाया है। महाराष्ट्र में तीन दलीय सरकार है। छह महीने पहले तीनों दल एक-दूसरे के कट्टर विरोधी थे। कांग्रेस और राकांपा पूर्णत: धर्मनिरपेक्ष और शिवसेना कट्टर हिंदुत्ववादी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की ‘फेंकू’ और ‘खंजर’ छाप राजनीति को सबक सिखाने के इरादे से अलग-अलग विचारों के तीन दल एक हुए और राज्य में महाविकास आघाड़ी बनी। जो लोग दावा करते थे कि ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार एक पखवाड़े भी नहीं चलेगी और उद्धव ठाकरे सरकार नहीं चला पाएंगे, वे अब ठंडे पड़ गए हैं। क्योंकि सरकार ने संकट से लड़ते हुए छह महीने का चरण पूरा किया और बाधाओं को पार करते हुए वे आगे बढ़े। इसका श्रेय ठाकरे के नाम की आभा और सर्वसमावेशक स्वभाव को देना पड़ेगा। वे एक कलाकार हैं। वे जंगल में हिंसक पशुओं की तस्वीरें खींचते हैं लेकिन जब वे मुख्यमंत्री नहीं थे, उस दौरान भी जंगली जानवरों की देखभाल के लिए जंगल में दवा, एंबुलेंस और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे थे। उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों की देखभाल की। उन्होंने महाराष्ट्र में आत्महत्या पीड़ित परिवारों को अपनी फोटोग्राफी से इकट्ठा किए गए करोड़ों रुपए वितरित कर दिए। बालासाहेब ठाकरे दाता थे। वे हजारों हाथों से महाराष्ट्र को देते ही रहे। उद्धव ठाकरे अपने महान पिता की विरासत को ही चला रहे हैं। जो लोग उद्धव के सान्निध्य में आते हैं और उनसे परिचित होते हैं, उन्हें ही उद्धव के मार्मिक व शरारती स्वभाव का रहस्य पता चल पाएगा। पहले उन्हें भाषण करना नहीं आता था, लेकिन बाद में उनका ‘भाषण’ मंच का संवाद बन गया और लोगों ने इसे स्वीकार किया। परिणामस्वरूप, उनके व्यक्तित्व का एक अलग ही हृदयस्पर्शी आकर्षण पैदा हो गया है और इसीलिए उनसे बातचीत करने, विवाद करने और उनके सान्निध्य में कुछ समय बिताए बिना कोई नहीं रह सकता। ‘कोविड -१९’ का संकट आसान नहीं है। उन्होंने इस संकट और वायरस का गहराई से अध्ययन किया। वो भी इतना कि कई प्रसिद्ध डॉक्टरों का ज्ञान उनके समक्ष कम पड़ गया। ‘कोविड -१९’ वायरस इंसान का दुश्मन है। दुश्मन का बारीकी से अध्ययन करके युद्ध पर जाना उनका स्वभाव है, यही वजह है कि मुख्यमंत्री ठाकरे ने जो ‘ेंar Aुaग्हेू न्न्ग्rल्े’ की लड़ाई का आह्वान किया है, वो रोमांचक है। दुनिया ने इस युद्ध और ठाकरे के नेतृत्व कौशल की सराहना की। केवल छह महीनों में, उद्धव ठाकरे न केवल मुख्यमंत्री के रूप में लोकप्रिय हो गए, बल्कि देश में शीर्ष पर भी आ गए। गंभीर विषय का, दुश्मन का अध्ययन करके ही हमला करना चाहिए, इस प्रकार की पूरी तैयारी के साथ ही वे मैदान में उतरते हैं। इसलिए उनके खिलाफ खड़े सभी राजनीतिक वायरस उड़ गए और मिट्टी में मिल गए। उद्धव ठाकरे की एक महान पारिवारिक परंपरा है। उस परंपरा की विरासत राजनीतिक व सामाजिक प्रबोधन की भी है। उनका नेतृत्व आज सह्याद्री के तेज व अभेद्य शिखर की तरह देश का शक्तिस्थान बन गया है। सह्याद्रि के शिखर को अब हिमालय का नेतृत्व करने के लिए अगला कदम उठाना चाहिए। ‘साठ’ तो शुरुआत है, बड़ी राजनीति का आरंभ है। महाराष्ट्र आपके साथ है। आप स्वस्थ, शक्तिशाली व दीर्घायु हों!