" /> ट्रैवेल्सवालों को ग्राहकों का टोटा!, गांव जानेवाली भीड़ नदारद

ट्रैवेल्सवालों को ग्राहकों का टोटा!, गांव जानेवाली भीड़ नदारद

गणेशोत्सव पर मुंबई से गांव जानेवाली भीड़ इस वर्ष नदारद है। कोरोना महामारी के कारण जो लोग जहां हैं, वहीं पर सादगी के साथ गणेशोत्सव मनाना चाहते हैं। इसका अच्छा-खासा असर ट्रैवेल्स व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ा है। उनके सामने ग्राहकों का टोटा है यानी यात्री ही नहीं हैं। इस बार कोरोना के चलते कोकण, रत्नागिरी व महाराष्ट्र के अन्य जिलों में गणेशोत्सव पर्व के लिए मुंबई से अपने-अपने गांव जानेवाली भीड़ नहीं दिखाई दे रही है।
गौरतलब है कि गणेशोत्सव महाराष्ट्रवासियों के लिए बहुत बड़ा पर्व है। हर साल यह त्योहार मनाने वाले एक-दो महीने पहले से इसकी जोर-शोर से तैयारी करते देखे जाते थे। कोकण व रत्नागिरी, पुणे जैसे ठिकानों के लोग तो इस त्योहार को कुछ खास तौर पर हर साल मनाते थे, जिसके लिए वे अपने-अपने गांव जाने हेतु एसटी, ट्रेन व ट्रैवेल्स की बुकिंग महीनों भर पहले से करते थे। कुछ गणेशभक्त सूमो, टवेरा, क्वालिस, स्कापिर्‍यो जैसे निजी साधनों अथवा ट्रैवेल्सवालों से किराए पर वाहन लेकर अपने गांव गणेशोत्सव मनाने जाते थे। मुंबई के परेल, मुंबई सेंट्रल, कुर्ला नेहरू नगर एसटी डिपो, घाटकोपर के बस डिपो के पास, अमर महल जंक्शन, चेंबूर के मैत्री पार्क, मानखुर्द के टी जंक्शन व मुलुंड चेक नाके के पास शाम ढलते ही ट्रैवेल्स वालों के कार्यालय के सामने अच्छी-खासी भीड़ जमा होती थी। यह गणेशोत्सव के १० दिन पहले से ही देखने को सहज ही मिलता था लेकिन कोरोना के चलते मार्च माह से शुरू लॉकडाउन व कोरोना की महामारी ने सबका बुरा हाल कर दिया है। सभी बेहाल हैं।
धंधा हो गया है मंदा
घाटकोपर-पश्चिम के अंकित ट्रैवेल्स के मालिक कमलेश भाई जोशी ने बताया कि मार्च माह से हमारा ट्रैवेल्स का व्यवसाय पूरी तरह बंद था। सरकार के निर्देश पर अब सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए हम यात्रियों को सुविधा देना शुरू किए हैं लेकिन कोरोना महामारी से लोग परेशान हैं। पहले हमें गणेशोत्सव के दौरान दो से तीन लाख रुपयों की कमाई हो जाती थी।मतलब जिस तरह से गर्मी की छुट्टी के समय हमारा धंधा दोगुना-तिगुना रहता था वैसा ही गणेशोत्सव के दौरान हमेशा होता था लेकिन इस बार हमें कोरोना का फटका लग गया है। मतलब इस बार १० -२० हजार की कमाई होना भी मुश्किल है। लोगो में कोरोना का भय व्‍याप्त है, जिससे हमारा धंधा इस बार न के बराबर है। इसी तरह दादर स्थित नेशनल ट्रैवेल्स के मालिक अब्दुल शेख बताते हैं कि कोरोना की महामारी के चलते इस व्यवसाय से जुड़े सभी ट्रैवेल्सवालों को फटका लग गया है। गणेशोत्सव के दौरान हम लोगों का धंधा दोगुना-तिगुना होता था लेकिन इस बार का गणेशोत्सव कोरोना की भेंट चढ़ गया है। चेंबूर अमर महल, मैत्री पार्क व परेल एसटी डिपो के पास के ट्रैवेल्सवालों का भी कहना है कि हम सबके व्यवसाय को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। ग्राहकों का टोटा हो गया है।