" /> किन्नर समाज के लोगों ने अपने पूर्वजों व गुरुओं के लिए काशी में किया त्रिपिंडी श्राद्ध

किन्नर समाज के लोगों ने अपने पूर्वजों व गुरुओं के लिए काशी में किया त्रिपिंडी श्राद्ध

मोक्षदायिनी काशी नगरी में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी देशभर के किन्नरों ने कोरोनाकाल के बीच किन्नर अखाड़ा के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर काशी के पिशाच मोचन स्थित घाट पर ज्ञात-अज्ञात पितरों सहित किन्नर गुरुओं के आत्मा की शांति हेतु त्रिपिंडी श्राद्ध किया। करीब दो घंटे तक चले इस पूजन को मुन्ना लाल पंडा ने विधि-विधान से पूर्ण कराया।यह सभी कार्यक्रम आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस दौरान देवी पवित्रा, कामिनी माई के साथ दर्जनों की संख्या में किन्नर समाज के लोग उपस्थित थे। इस सम्बन्ध में किन्नर आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि इतिहास में पहली बार महाभारत काल के शिखंडी द्वारा पिंडदान किए जाने के करीब तीन सौ वर्षों के बाद किन्नरों ने अपने पूर्वजों का पिंडदान कर के एक नई परम्परा की शुरुआत की थी।

आज हम सभी ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष की प्राप्ति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ तर्पण किया और साथ ही साथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही किन्नर गुरु एकता जोशी की हत्या के लिए भी विशेष पूजन-अर्चन किया गया।
पिशाचमोचन तीर्थ पुरोहित मुन्ना लाल पंडा ने बताया कि हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार, अश्विन माह के कृष्ण पक्ष से अमावस्या तक अपने पितरों के श्राद्ध की परम्परा है। ये श्राद्ध या महालया पक्ष के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म और वैदिक मान्यताओं में पितृ योनि की स्वीकृति और आस्था के कारण श्राद्ध का प्रचलन है। पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का एक सहज और सरल मार्ग है।

पूजन के दौरान मुख्य आचार्य नीरज पांडेय व सहयोगीजन की उपस्थिति रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य पंडा पिशाच मोचन आनंद पांडेय, श्री मणिकर्णिका तीर्थ पुरोहित गौरव द्विवेदी व गंगा महासभा के राष्ट्रीय मंत्री मयंक कुमार आदि लोगों का सहयोग रहा।