ट्रंप का ‘टेरर’ कार्ड! पल भर में भस्म हो जाएगा ईरान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश देकर भले ही तुरंत यू-टर्न ले लिया पर हालात ऐसे हैं कि युद्ध कभी भी भड़क सकता है। ईरान बार-बार गरमा-गरम बयानबाजी कर रहा है। ऐसे में अगर ट्रंप को गुस्सा आ गया तो क्या होगा? रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार अमेरिका के पास ऐसी तकनीक है कि ईरान को खबर भी नहीं होगी और वह पल भर में भस्म हो जाएगा। असल में ट्रंप का यह ‘टेरर’ कार्ड है उसका नया लेजर हथियार ‘एएन / एसईक्यू ३ लॉज्’। यह अमेरिका का सबसे घातक हथियार है जो विद्युत की गति से दुश्मन को तबाह कर डालता है।
अमेरिका ने कुछ साल पहले अपने इस खास हथियार का परीक्षण ईरान की खाड़ी में ही किया था और अब यह हथियार उसकी नौसेना में शामिल हो चुका है। इसके अलावा पिछले कुछ दिनों से अमेरिका, ईरान के रक्षा प्रतिष्ठानों पर साइबर अटैक भी कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिका ने पहले ही अपना एक एयरक्राफ्ट कैरियर ‘अब्राहम लिंकन’ को खाड़ी में तैनात कर दिया है। खबर है कि इराक में इस समय ५०,००० अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा खाड़ी में १,००० और सैनिक अमेरिका ने तैनात कर दिया है। उधर ईरान ने भी अपने एक लाख रिवोल्युशनरी गार्ड को खाड़ी में तैनात कर दिया है जो काफी खतरनाक माने जाते हैं। जानकार बताते हैं कि अमेरिका को पता है कि पारंपरिक युद्ध में उसका भी काफी नुकसान हो सकता है इसलिए वह ईरान पर लेजर जैसे नई तकनीक वाले हथियार से हमला कर सकता है।
मिनटों में धूल में मिल जाएगी ईरान की शान!
ईरान-अमेरिका तनाव खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। कभी नरम तो कभी गरम बयान दोनों तरफ से आ रहे हैं। मगर देखा जाए तो ईरान के मुकाबले अमेरिका की सैन्य ताकत काफी मजबूत है। अगर ईरान पर अमेरिका हमला करता है तो मिनटों में ईरान की शान धूल में मिल जाएगी।
‘न्यूयार्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के कार्यवाहक रक्षामंत्री पैट्रिक शानहन ने मध्य-पूर्व में १ लाख २० हजार सैनिकों की तैनाती की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी बलों पर हमला करता है या परमाणु कार्यक्रम शुरू करता है तो अमेरिका तैयार है। हालांकि यह संख्याबल भी ईरान पर हमला करने के लिए नहीं बल्कि अपना बचाव करने के लिए है क्योंकि उसके लिए अमेरिका को और भी ज्यादा सेनाबल की जरूरत पड़ेगी।
हथियारों के मामले में अमेरिका दुनिया के दूसरे देशों से काफी आगे है। हालांकि जहां तक खाड़ी की बात है तो ईरान की नौसेना अमेरिका से ज्यादा फायदे की स्थिति में है। ईरान की नौसेना को होर्मूज खाड़ी को बंद करने के लिए बड़े जहाज या फायरपावर की जरूरत नहीं है बल्कि व्यापार को नुकसान पहुंचाने के लिए वह पनडुब्बी के इस्तेमाल से ही काम चला सकती है। ईरान स्पीडबोट सुसाइड अटैक और मिसाइल के जरिए अमेरिकी सेना को बुरी तरह पस्त कर सकता है। २०१७ की ‘ऑफिस ऑफ नेवल इंटेलिजेंस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रिवॉल्यूशनरी गार्ड की नौसेना हथियारों से लैस छोटे और तेज रफ्तारवाले समुद्री जहाजों पर जोर देती है और फारस की खाड़ी में उसे ज्यादा जिम्मेदारियां मिली हुई हैं। इसके बाद ईरान का बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम आता है जिसे मध्य-पूर्व में मिसाइलों के जखीरे की संज्ञा दी जाती है।
इराक में जब अमेरिका ने हमला किया था तो अमेरिकी सैनिकों की संख्या १५०,००० थी जिसमें सहयोगी देशों के सैनिक भी शामिल थे। इराक पर हमले की आर्थिक कीमत २ ट्रिलियन डॉलर आंकी गई थी जिसमें २००३ से २०११ के बीच करीब ४ लाख लोग मारे गए थे।
खतरनाक अमेरिकी हथियार
अमेरिका का सबसे खतरनाक हथियार है ‘एएन/एसईक्यू ३ लॉज्’। यह एक लेजर हथियार है। प्रकाश की गति से लेजर किरणों को छोड़नेवाला यह हथियार पलभर में ड्रोन विमान को खत्‍म करने की ताकत रखता है। इसकी खासियत यह है कि इसके आगे बैलिस्टिक मिसाइलें भी कुछ नहीं हैं। एक अमेरिकी वेबसाइट के मुताबिक ‘लॉज’ हवा के साथ-साथ जमीन और समुद्री सतह पर मौजूद लक्ष्यों को भी निशाना बनाने में सक्षम है। यह अंतरमहाद्विपीय बैलेस्टिक मिसाइलों से ५० हजार गुना तेज रफ्तार से लेजर किरणें छोड़ता है। अमेरिकी नौसेना ने अपने यूएसएस पोंस जहाज पर इसकी तैनाती की है। ‘लॉज’ से निकलने वाली लेजर किरणें बुलेट से ज्यादा सटीक और गंभीर वार करती हैं। इनका तापमान कई हजार डिग्री सेल्सियस होता है। परीक्षण के दौरान ‘लॉज’ को जिस ड्रोन पर दागा गया, वह पल भर में धू-धू कर जल उठा। दुश्मन देशों के विमानों और जहाजों के लिए ‘लॉज’ के हमले से बच पाना आसान नहीं होगा। इससे निकलने वाली लेजर किरणें विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के अदृश्य क्षेत्र में आती हैं, लिहाज इन्हें देखना मुश्किल होता है। इतना ही नहीं, इसमें किसी तरह का शोर नहीं होता है। इसकी वजह से दुश्‍मन को इसकी भनक भी नहीं लग पाती है। ‘लॉज’ के संचालन के लिए तीन विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। यह हथियार लेजर किरणें छोड़ने के लिए बिजली पर निर्भर है। बिजली उत्पादन के लिए इसमें एक छोटा जनरेटर लगाया गया है।
हाइपरसोनिक मिसाइल
अमेरिका की हाइपरसोनिक मिसाइल काफी खतरनाक है। यह मिसाइल ध्‍वनि से भी तेज गति से चलती है। इसकी पहुंच में आने से न तो कोई दुश्‍मन बच सकता है और न ही इसकी मार से अछूता रह सकता है। यह मिसाइल अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया ने संयुक्‍त रूप से बनाई है। इस मिसाइल का सफल परीक्षण ऑस्‍ट्रेलिया के वूमेरा से किया गया। यह मिसाइल छह हजार मील / प्र.घं की रफ्तार से उड़ सकती है। इसकी खासियत यह है कि यह मिसाइल बेहद कम समय में दुश्‍मन पर इतना सटीक हमला करती है कि उसको संभलने का मौका ही नहीं मिलता।
इलैक्‍ट्रोमैगनेटिक पल्‍स वैपन सिस्‍टम
इलैक्‍ट्रोमैगनेटिक पल्‍स वैपन सिस्‍टम को अमेरिका अपनी वायु सेना समेत नौसेना में शामिल कर चुका है। यह हथियार भविष्‍य में युद्ध की तस्‍वीर को पूरी तरह से बदल कर रख देगा। यह हथियार सेना और सरकार की मदद के लिए साबित होने वाली उन तमान चीजों को बेकार कर देता है, जिनसे जानकारी लेकर वह आगे का पैâसला करते हैं या अपनी रणनीति बनाते हैं। एक तरह से यह साइबर अटैक करता है। ईएमपी वैपन सिस्‍टम वास्‍तव में सेना और सरकार की मदद कर रहे कंप्‍यूटर के लिए घातक साबित होता है। यह हवा में रहते हुए ही उन तमाम सिस्‍टम को पूरी तरह से नाकाम बना देता है जो सेना और सरकार की रणनीति बनाने में सहायक साबित हो सकते हैं। इसको यदि दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो कंप्‍यूटर के नाकाम हो जाने के बाद सैटेलाइट से इनका कनेक्‍शन खत्‍म हो जाता है। इस हथियार से कुछ खास इमारतों को टारगेट किया जाता है और फिर यह हथियार उसके ऊपर से गुजरता हुआ एक मैगनेटिक फील्‍ड बनाता है। इसके सहारे एक करंट छोड़ा जाता है जिससे इमारत में रखे सभी इलैक्‍ट्रॉनिक सिस्‍टम जिसमें कंप्‍यूटर भी शामिल होता है, काम करना बंद कर देता है। अमेरिका की बोइंग कंपनी इस सिस्‍टम पर काम कर रही है। इसकी वजह से खबरों और जानकारियों का आदान-प्रदान पूरी तरह से बाधित हो जाता है। इसका सबसे घातक परिणाम यह होता है कि सैटेलाइट से कनेक्‍शन टूट जाने की वजह से सीमा पर चौकसी कर रही सेना का संपर्क भी एक-दूसरे से टूट जाएगा। ऐसे में न तो किसी फैसले की जानकारी सुरक्षाबलों तक पहुंचाई जा सकेगी और न ही उनका कोई आपात संदेश ही आ सकेगा। यह किसी भी देश के लिए सबसे घातक होगा। ऐसे वक्‍त में कोई भी देश अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह से विफल हो जाएगा और उस वक्‍त यदि उस पर हमला होता है तो वह कुछ नहीं कर पाएगा। अमेरिका की युद्ध रणनीति का यह सबसे घातक हथियार है।
विनाशकारी ‘माइन्यूटमैन’
अमेरिका की सबसे विनाशकारी मिसाइलों में से एक है ‘माइन्यूटमैन’। इसकी मारक क्षमता १३ हजार किलोमीटर है और ये एक साथ ३ परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है, जो ३ अलग-अलग लक्ष्यों को भेद सकते हैं। अमेरिकी सेना ने इसे ट्राइडेंट मिसाइल सिस्टम से लैस करके दुनिया की सबसे मारक मिसाइल बना दिया है। फिलहाल ये अमेरिकी सेना में शामिल एकलौती अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल है।
टॉमहॉक : बीजीएम-१०९ टॉमहॉक अमेरिका के सबसे खास हथियारों में से एक है। ये मध्यम से लंबी दूरी तक मार करनेवाली की सबसे खतरनाक मिसाइल है। टॉमहॉक १,५०० किलोमीटर की दूरी से अपना लक्ष्य साध कर हमला करती है। इस मिसाइलों को पकड़ पाना बेहद मुश्किल है, जो छोड़े जाने के महज कुछ ही देर में अपने लक्ष्य को तहस-नहस कर देती हैं। ये सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की श्रेणी में सबसे खतरनाक मिसाइल है।