" /> कोस्टल रोड की ‘तिरंगी’ मशीन चीन से मुंबई पहुंची : अगस्त में शुरू होगी सुरंग की खुदाई

कोस्टल रोड की ‘तिरंगी’ मशीन चीन से मुंबई पहुंची : अगस्त में शुरू होगी सुरंग की खुदाई

कोस्टल रोड के काम को अब और रफ्तार मिलेगी। कोस्टल रोड के सुरंग की खुदाई के लिए चीन से सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन मुंबई पहुंच चुकी है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ तो इस मॉनसून में ही यानी जुलाई के अंतिम या अगस्त के पहले सप्ताह से ही सुरंग की खुदाई का काम शुरु हो जाएगा। इस मशीन की विशेषता यह है कि इसे भले ही चीन से आयात किया गया हो लेकिन इसे हिंदुस्थानी तिरंगे का रंग दिया गया है। जिसके चलते मशीन को तिरंगी कहा जा रहा है।
बता दें कि मुंबई की ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने और मुंबई की रफ्तार को गति देने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कोस्टल रोड की संकल्पना की थी। प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाई ओवर से कांदिवली तक 29 किमी के कोस्टल रोड का काम चरणबद्ध तरीके से होगा। पहले चरण में प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाई ओवर से वरली सी – लिंक तक 9.98 किमी के बननेवाले कोस्टल रोड के काम का शुभारंभ अक्टूबर 2018 में किया गया था। इस 9.98 किमी के कोस्टल रोड पर 3.4 किमी की दो समान सुरंग बनाई जानेवाली है। गिरगांव से मलाबार हिल तक समंदर के अंदर बननेवाली सुरंग की खुदाई के लिए सबसे बडी टनल बोरिंग मशीन चीन से कल मुंबई बंदरगाह पहुंच चुकी है। हालांकि यह मशीन फरवरी में मुंबई आनेवाली थी लेकिन चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते दो महीने देरी से मुंबई लाई गई है। विभिन्न पार्ट्स में आए इस मशीन का वजन 2200 टन है। वर्तमान में मुंबई में अंडर ग्राउंड मेट्रो ट्रेन की खुदाई के लिए इस्तेमाल हो रही टीबीएम मशीन से कोस्टल रोड की टीबीएम मशीन दो गुना बढ़ी है। मेट्रो के लिए 7 मीटर चौड़ी टीबीएम मशीन इस्तेमाल हो रही है लेकिन कोस्टल रोड की टीबीएम मशीन 12.19 मीटर चौड़ी है और साढ़े चार मंजिला इमारत इतनी लंबी है। सुरंग की खुदाई का काम करनेवाली एल एंड टी कंपनी की मानें तो इस माह के अंतिम सप्ताह तक टीबीएम मशीन को बंदरगाह से कार्यस्थल गिरगांव लाया जाएगा जहां उसके पुर्जे को एक साथ करने का काम किया जाएगा। इस कार्य में करीब तीन माह लगेंगे। अगर सब कुछ समय पर हुआ तो जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त के पहले सप्ताह में सुरंग की खुदाई का काम शुरू हो जाएगा। टीबीएम मशीन के जरिए 276 दिनों में सुरंग की खुदाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। गिरगांव चौपाटी में जमीनी सतह से 25 मीटर नीचे और मलाबार हिल में जमीनी सतह से 75 मीटर नीचे टीबीएम मशीन खुदाई का काम करेगी।