" /> बेहाल यूपी!, दो महीने में तीन पत्रकारों की हत्या

बेहाल यूपी!, दो महीने में तीन पत्रकारों की हत्या

उत्तर प्रदेश में दो महीने के भीतर तीसरे पत्रकार की हत्या हो गई है। कानून-व्यवस्था और अपराध को लेकर लगातार विपक्ष के हमले झेल रही योगी सरकार ने दो दिन पहले ही देश के अन्य राज्यों के मुकाबले यूपी में बेहतर हालात का दावा किया था। सोमवार को बलिया जिले में एक पत्रकार की जघन्य हत्या हो गई। कानून-व्यवस्था सुधारने और भयमुक्त समाज के नारे के साथ योगी सरकार सत्ता में आई लेकिन बढ़ती आपराधिक घटनाएं योगी के गले की फांस बन चुकी हैं। अपराध के मोर्चे पर पस्त योगी सरकार के विकास और कल्याणकारी कामों की चर्चा पीछे छूट गई है। कानपुर में बिकरु कांड के बाद से विपक्ष लगातार हमले कर रहा है और हर रोज वारदातें बढ़ती जा रही हैं। यूपी में बड़े पैमाने पर सत्तारूढ़ दल भाजपा के सांसद, विधायक, नेता व कार्यकर्ता अपनी ही सरकार की नाकामी को लेकर हमलावर हैं। उपेक्षा व दमन को लेकर ब्राह्मण सामाज में अलग नाराजगी है। नाराजगी को काउंटर करने के लिए योगी सरकार के अधिकारी आंकड़े दुरुस्त दिखाने और वाहवाही बटोरने का मसाला जुटाने में लगे हैं। जहां जघन्य हत्याओं और लगातार बढ़ती अपराध की घटनाओं पर मामूली पुलिस वालों पर कार्रवाई कर कर्तव्य पूरा किया गया है वहीं बेसिर-पैर के मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को नापकर सुर्खियां बटोरी गई हैं। बिकरु कांड में आला अधिकारियों के कुख्यात विकास दुबे के कैशियर जय बाजपेयी से सांठगांठ पर सरकार चुप लगा गई तो मुठभेड़ में मारे गए अमर दुबे की नौ दिन की ब्याहता पत्नी खुशी दुबे को एलान करने के बाद अब तक जेल में सड़ाया जा रहा है। प्रदेश भर में धान के पीक सीजन में यूरिया की मांग करने वाले किसानों पर लाठियां चलाई जा रही हैं। इन सबसे से बेपरवाह प्रदेश सरकार के आला अधिकारी मुख्यमंत्री को ‘आल इज वेल’ का संदेश दे रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने उनसे संवाद का रास्ता तलाशने के बजाय उन पर अंकुश लगाने की राह चुनी है। प्रदेश के ब्राह्मण समुदाय में उपजी नाराजगी को दूर करने के लिए एक-एक विधायक पर मंत्रियों की ड्यूटी लगा दी गई है तो संगठन के पदाधिकारियों को अलग से जिम्मा सौंपा गया है। हालांकि इस सबके बीच समाज के आम ब्राह्मण की समस्या को समझने व उसे दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। खुद मुख्यमंत्री के गृह नगर गोरखपुर के विधायक राधामोहन अग्रवाल ने सरकार की नाकामी पर ट्वीट के जरिए सवाल उठाया है। विधायक देवमणि, सुरेंद्र सिंह, श्याम प्रकाश, राजेश मिश्रा उर्फ भरतौल, सांसद जय प्रकाश, विधायक नंदकिशोर सहित दर्जनों जनप्रतिनिधि सरकार के कामकाज पर उंगली उठा चुके हैं।

ताजा मामला बलिया जिले का है जहां के फेफना कस्बे में सोमवार को सहारा समय चैनल के संवाददाता रतन सिंह को बदमाशों ने दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडों से पीटा। फिर सिर में तीन गोली मार कर हत्या कर दी। इससे पहले बीते महीने जुलाई में गाजियाबाद में बदमाशों ने पत्रकार विक्रम जोशी की छेड़खानी का विरोध करने पर और उन्नाव में शुभम तिवारी की भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चलाने पर हत्या कर दी थी। कोरोना संकट के इस दौर में ही प्रदेश में दर्जनों पत्रकारों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यूपी में पत्रकारों पर बढ़ रहे हमलों व हत्याओं को लेकर जबरदस्त रोष है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर प्रदेश में दो दिन में ही हुए सभी अपराधों का ब्यौरा जारी कर योगी सरकार पर हमला बोला है।

सोमवार को बलिया में हुए पत्रकार की हत्या के तुरंत बाद प्रदेश सरकार ने इसे आपसी रंजिश करार दिया। हालांकि मारे गए पत्रकार के पिता ने वीडियो बयान जारी कर पुलिस की ओर से गढ़ा गया झूठ बताया है। बलिया पत्रकार हत्या के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बलिया के फेफना थाने से सिर्फ सौ मीटर दूर एक निजी चैनल के पत्रकार रतन सिंह को गोली मार दी गयी, रतन सिंह खुद को बचाने के लिए भाग रहे थे पर हमलावरों ने दौड़ा-दौड़ा कर मारा। घटना दिनदहाड़े हुई और हमलावरों को पहचानते हुए पत्रकार ने एक कार में घुसकर खुद को बचाने का भी प्रयास किया। उनका पीछा कर रहे बदमाशों ने तीन गोलियां सिर में मार दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे पूर्व में दो वर्ष पहले इनके भाई की भी हत्या की जा चुकी है। सभी आरोपी छह माह पूर्व ही जमानत पर छूट कर आए थे।

यूपी के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी का कहना है कि बलिया में पत्रकार रतन सिंह की गोली मारकर हत्या में उनके पट्टीदार दिनेश सिंह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ४ महीने पूर्व इन दोनों लोगों के बीच आपसी झगड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि दोनों का आपसी विवाद एक दीवार को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है। हालांकि सरकारी बयान के ठीक उलट मृतक पत्रकार के पिता ने कहा कि उनके बेटे का किसी से कोई विवाद नहीं था और पुलिस इसे आपसी रंजिश का नाम देकर लीपापोती कर रही है। घटना के बाद पता चला है कि पत्रकार रतन सिंह ने हत्या से पहले अपनी जान का खतरा बताते हुए सरकार से असलहे के लाइसेंस देने की मांग की थी जिसे अनसुना कर दिया गया था।

बलिया के पत्रकार हत्याकांड में सोमवार देर रात तीन अभियुक्त गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम अरविंद सिंह , दिनेश सिंह और सुनील कुमार सिंह हैं जबकि चौथा अभियुक्त मोती सिंह फरार बताया जा रहा है। उसकी तलाश चल रही है। उधर घटना पर दुख प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिवंगत पत्रकार के परिवार को १० लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है। उन्होंने पुलिस से हत्यारों के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई करने को कहा है।

इससे पहले भी बहन से छेड़खानी के विरोध में जुलाई में गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी को मार दिया गया था तो उन्नाव में भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाला पत्रकार शुभम को गोली मार दी गई थी। उन्नाव कांड में तो हत्या की साजिश रचने में एक भाजपा नेत्री का नाम सामने आया था।

पत्रकार रतन सिंह की हत्या पर सोमवार रात ही विरोध जताने के बाद मंगलवार सुबह कांग्रेस महासिचव प्रियंका गांधी ने बीते दो दिनों के अपराधों का सिलसिलेवार ब्यौरा ट्वीट किया। प्रियंका ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले बहुत ही बुलंद हैं। सरकार, सीएम और मंत्री जब खुद ही अपराधिक घटनाओं को झुठलाते हैं तो अपराधियों के मंसूबों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि अफसोस है कि आमजन, पुलिसकर्मी एवं पत्रकार इस जंगलराज का शिकार हो रहे हैं। बलिया में दिवंगत पत्रकार रतन सिंह के घरवालों से मिलने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू रवाना हो गए हैं। प्रियंका गांधी ने बीते दो महीने में मारे गए तीन पत्रकारों के नाम जारी कर कहा है कि योगी सरकार में मीडिया भी सुरक्षित नहीं रह गया है। मायावती ने भी पत्रकार की हत्या पर सरकार पर जमकर हमला बोला है।

पत्रकारों की सुरक्षा में नाकाम प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने लगातार तीन वारदातों के बाद भी इस संदर्भ में कोई कड़ा कानून बनाने को लेकर पहल नहीं की है। मारे गए पत्रकारों के मुआवजे को लेकर सरकार की स्पष्ट नीति नहीं है। उन्नाव के पत्रकार के परिजनों को कोई मुआवजा नहीं मिला है। यही नहीं तमाम घटनाओं के बाद भी खुद सरकार के अधिकारी विभिन्न मामलों में पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज करा रहे हैं।