" /> भूमिका, भगदड़ और गुणा-भाग….यूपी चुनावों की दौड़ शुरू

भूमिका, भगदड़ और गुणा-भाग….यूपी चुनावों की दौड़ शुरू

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के महासमर के लिए जहां राजनैतिक दलों ने भूमिका बनाते हुए गुणा भाग लगाना शुरू कर दिया है तो वहीं उम्मीद के मुताबिक भगदड़ का सिलसिला भी शुरू हो गया है। विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे टिकटार्थियों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। चुनावी मैदान में ताल ठोकने वाले इन माननीयों की सियासत में पार्टी से ज्यादा खुद की स्थानीय राजनीति हावी होती दिख रही है। वैसे २०२२ के चुनावी संघर्ष में अब तक का सबसे बड़ा सियासी दलबदल दिखने के आसार बढ़ गए हैं क्योंकि अद्यतन परिस्थितियों में सत्तारूढ़ दल से बड़ी संख्या में सिटिंग विधायकों की छुट्टी होना तय माना जा रहा है।
शायद यही वजह है कि सूबे की सत्ताधारी दल के एक चर्चित सांसद जहां किसानों के समर्थन में मोर्चा खोले हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ सीतापुर सदर से भाजपा विधायक ने प्रमुख विपक्षी दल के मुखिया से मिलकर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
पीएम मोदी और सीएम योगी पर कोरोना काल में टिप्पणी करनेवाले सीतापुर सदर से भाजपा विधायक राकेश राठौर के समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करने के साथ ही नेताओं के नए ठिकानों और दलों के बीच आपसी शह और मात के खेल की शुरुआत हो चुकी है।
विधानसभा चुनाव के शुरू होने के पहले ही भगदड़ शुरू हो गई है, जिसमें सपा ने सत्ताधारी दल भाजपा में सेंध लगा दिया है। इसके पहले बसपा के कई विधायक भी अखिलेश से मिल चुके हैं। अखिलेश यादव कह भी चुके हैं कि भाजपा के कई विधायक लगातार उनके संपर्क में हैं।
बताते चलें कि भाजपा विधायक राकेश राठौर का कुछ समय पहले एक आडियो भी वायरल हो चुका है, जिसमें उन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए थे। विधायक ने कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि ताली-थाली से कोरोना नहीं भागेगा। वह लंबे समय से पार्टी से असंतुष्ट भी बताए जा रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि आनेवाले समय में इस तरह के सियासी घटनाक्रम में तेजी आ सकती है। सबसे बड़ी पार्टी भाजपा से टिकट न पानेवाले विधायक प्रमुख विपक्षी दल सपा या अन्य दलों का दामन थाम सकते हैं। फिलहाल मिली जानकारी के मुताबिक करीब एक दर्जन भाजपा विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं। उधर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई किसान महापंचायत से बढ़ी सियासी टेंशन के बीच सपा, आरएलडी के बीच हुए सीटों के समझौते की खबर ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है।
सियासी गलियारों की पुख्ता खबर है कि २०२२ की लड़ाई में सत्तारूढ़ भाजपा से सीधे मुकाबिल प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और पश्चिमी यूपी के प्रमुख दल आरएलडी के बीच सीटों को लेकर समझौता फाइनल हो गया है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव एवं रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर हुई वार्ता में रालोद की गठबंधन में २२ सीटें पक्की हो गई हैं। इन सीटों में बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बिजनौर, मथुरा, हाथरस, बुलंदशहर, अमरोहा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और आगरा जनपदों की विधानसभा सीटों पर विशेष चर्चा की बात कही जा रही है।
इस समझौते के बाद विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं का रालोद अध्यक्ष के आवास पर पहुंचने की खबर भी आई लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। हालांकि आरएलडी नेताओं का कहना है कि इस खबर में कोई दम नहीं है और हम ६०-६५ सीटों की मांग कर रहे हैं, इतनी कम सीटों पर समझौता संभव नहीं है। लेकिन जानकारों का कहना है कि समझौते की बात अभी से सार्वजनिक करना सियासी रूप से उचित नहीं है। लेकिन सपा समझौते में आरएलडी को इससे ज्यादा सीट नहीं देगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपने मिशन की शुरुआत कर दी है। मिशन यूपी की शुरुआत में प्रियंका गांधी ने आनेवाले दिनों में पूरे प्रदेश में १२,००० किलोमीटर की दूरी नापने का पैâसला करते हुए प्रतिज्ञा यात्रा निकालने का एलान किया है। अन्य दलों से कहीं पहले कांग्रेस ने अपने चार दर्जन के लगभग प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दिखा दी है।
उत्तर प्रदेश में लंबे वक्त से बुरे दौर में चलने के बावजूद विधानसभा चुनावों की तैयारियों में सबसे आगे निकलते हुए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची को अंतिम रूप दे दिया है। चार दर्जन से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों के नामों को पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने हरी झंडी दिखा दी है। इन प्रत्याशियों को खुद प्रियंका गांधी ने बात कर अभी से तैयारियों में जुट जाने को कह दिया है। समाजवादी पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी करीब-करीब तय कर लिया है कि किसी बड़े दल से चुनावी तालमेल नहीं होगा। हां, छोटे दलों के लिए जरूर कांग्रेस ने बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं। चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के लिए वार रूम बनाने और वहां केंद्रीय स्तर पर टीम भेज कर प्रबंधन देखने का पैâसला भी किया गया है। प्रियंका गांधी ने जून के महीने में ही सभी जिला व शहर स्तर के पदाधिकारियों से जिताउ संभावित प्रत्याशियों की सूची मांगी थी।
गौरतलब है कि इन दिनों उत्तर प्रदेश में ५८ हजार ग्रामसभाओं में ग्रामसभा अध्यक्ष और कमेटियों के गठन का अभियान चल रहा है। दौरे में ही प्रशिक्षण से पराक्रम महाअभियान के पहले चरण पर चर्चा होगी। इस चरण में २५ हजार पदाधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हुआ है, जबकि प्रदेश भर से कुल २ लाख पदाधिकारियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है। अपने लखनऊ प्रवास के दौरान प्रियंका गांधी आगामी एक महीने में चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा और रणनीति तय करेंगी।
उधर विपक्ष की तमाम तैयारियों पर पैनी निगाह रखते हुए सत्तारूढ़ भाजपा ने भी अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। अब तक भाजपा की तैयारियों से साफ है कि इस बार का चुनाव भी वह परंपरागत तरीके से बूथ मजबूत करते हुए ही लड़ेगी और इसकी कवायद भी शुरू हो गई है। भाजपा ने सोशल मीडिया की अहमियत को समझते हुए बूथवार व्हॉट्सअप ग्रुप बनाने का काम पूरा कर लिया है। हर बूथ पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को मोटरसाइकिलों से लैस किया जा रहा है, जो मतदाताओं को पोलिंग सेंटर तक लाने का कम करेंगे। दशक भर पहले गुजरात में शुरू हुआ पन्ना प्रमुख का प्रयोग एक बार फिर से नए कलेवर के साथ दोहराया जा रहा है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने चुनावों के मद्देनजर यूपी के लिए नए प्रभारियों का एलान कर दिया है। भाजपा के लिए ज्यादातर समय लकी साबित होनेवाले धर्मेंद्र प्रधान को इस बार यूपी का प्रभारी बनाया गया है तो उनके साथ जाट, ठाकुर, दलित बिरादरी के कद्दावर नेताओं को सहप्रभारी के तौर पर लगाया गया है, जहां तक यूपी के नेताओं की बात है तो पिछली जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले पिछड़ी जाति के सशक्त नेता केशव प्रसाद मौर्य को आगे करते हुए फिर से सामाजिक समीकरण साधने की कवायद शुरू हो गयी है। ब्राह्म्णों की नाराजगी के असर को कम करने के लिए जिलों-जिलों में प्रबुद्ध सम्मेलनों की शुरुआत हो चुकी है।
सपा या अन्य किसी दल में अपने इक्का-दुक्का विधायकों के संपर्क करने या जाने से बेखबर भाजपा ने पहले ही कह दिया है कि प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर वह काफी तादाद में अपने सिटिंग विधायकों के टिकट काटेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता के बीच खारिज हो चले कुछ एक नेता अगर अन्य दलों का दामन थामते हैं तो वो भाजपा के लिए ही फायदा करेगा न कि उस नेता या दल विशेष को। उनका कहना है कि हमारा रिजेक्टेड माल स्वतंत्र है कहीं और जाने के लिए और अन्य दल उसे बखूबी शामिल कर सकते हैं।
(लेखक उत्तर प्रदेश अधिस्वीकृत पत्रकार संघ के अध्यक्ष हैं। उत्तरप्रदेश की राजनीति के जानकार और स्तंभकार हैं।)