यूपी का वोट मुलुक को!, छुट्टियों में मुंबई का मतदान

आखिर जिसका इंतजार था वह घड़ी कल आ ही गई। चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनावों की तिथियां कल घोषित कर दी। तारीखों की घोषणा होने के साथ ही राजनीति के चाणक्य मतों की गिनती में लग गए। सात चरणों में होनेवाले चुनाव देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ऐसे समय में होंगे, जब आधे मुंबईकर अपने गांव अर्थात मुलुक में होंगे। इसका कारण है कि स्कूल में छुट्टियां शुरू हो जाती हैं। ५ अप्रैल के बाद से ही मुंबईकर अपने गांवों की तरफ रुख करने लगते हैं। १५ अप्रैल आते-आते तो जैसे मुंबई ही खाली हो जाती है। उत्तर हिंदुस्थान के खासकर यूपी-बिहार के लोग ४ महीने पहले ही अपना रिजर्वेशन करा लेते हैं।
उत्तर हिंदुस्थान की तरफ जानेवाली किसी भी ट्रेन का वेटिंग लिस्ट ७००-८०० से कम नहीं है। अधिकांश ट्रेनों में स्थिति तो ‘नो रूम’ की है। बच्चों के स्कूल बंद होते ही उत्तर प्रदेश के लोग सपरिवार गांव चले जाते हैं। इस बार तो संयोग ऐसा है कि १५ अप्रैल के बाद विवाह समारोहों की भरमार है। यूपी के जिस भी व्यक्ति को देखो वही कहता है कि एक शादी १७ अप्रैल को तो एक २३ अप्रैल को है। इसके साथ ही २७, २९ अप्रैल और १ मई को बहुत जोरदार विवाह का मुहूर्त है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या ये लोग गांव नहीं जाएंगे? तो लाजिमी है कि जिनके घरों में शादियां हैं, वे निश्चित रूप से मुलुक जाएंगे, भले ही वोट डालने से वे वंचित रह जाएं। मतलब साफ है कि आगामी लोकसभा चुनाव के वक्त मुंबई में जितने भी यूपी के वोट हैं, उनकी एक बड़ी संख्या मुलुक में रहनेवाली है।
उत्तर हिंदुस्थान में ७० प्रतिशत विवाह समारोह अप्रैल-मई में होते हैं जबकि १५ प्रतिशत नवंबर-दिसंबर और १५ प्रतिशत फरवरी-मार्च में। मुंबई में रहनेवाले उत्तर हिंदुस्थानी इन समारोहों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उसका कारण है कि ये समारोह उनके घर, पड़ोसी, मित्र या रिश्तेदारों के होते हैं। इस मौसम का जो सबसे सकारात्मक पहलू है, वह यह है कि बच्चों के स्कूल बंद होते हैं। संयोगवश चुनाव आयोग ने अप्रैल में ही मुंबई में मतदान की घोषणा कर दी है। चार महीने पहले बड़ी जद्दोजहद के बाद रेल टिकट पानेवाले उत्तर हिंदुस्थान मुलुक जरूर जाएंगे और वहां शादियों में मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाएंगे। वडाला में रहनेवाले महेंद्र कुमार दुबे ने बताया कि हमने ४ महीने पहले ही टिकट निकाल ली है। मेरी बहन की शादी २३ अप्रैल को है। हमारा पूरा परिवार १५ अप्रैल को गांव चला जाएगा। हमरे लिए वोट से महत्वपूर्ण विवाह में पहुंचना है। वहीं टिटवाला निवासी लुल्लुर तिवारी ने कहा कि बच्चों की छुट्टियां होने की वजह से हम हर साल गांव जाते हैं और इस वर्ष भी १३ अप्रैल को गांव चले जाएंगे। मजेदार बात यह है कि इन लोगों का मतदाता सूची में नाम यहां है, न कि उत्तर प्रदेश में। ऐसे लाखों यूपीवाले हैं, जिनका मुलुक जाना पक्का है। ऐसे में मुंबई में मतदान का प्रतिशत निश्चित रूप से घटेगा। उत्तर हिंदुस्थानी ही नहीं दक्षिण हिंदुस्थान तथा महाराष्ट्र के दूर-दराज के जिलों के मुंबई में रहनेवाले लोग भी अपने गांव जाते हैं। निश्चित रूप से इसका परिणाम मतदान प्रतिशत पर दिखाई देगा।
राकांपा के उत्तर भारतीय नेता पारस तिवारी ने कहा कि चुनाव आयोग को शहरी भागों और बड़े शहरों पर ध्यान देना चाहिए। मुंबई में अगर पहले चरण में मतदान होता तो अच्छा होता क्योंकि अधकांश यूपी-बिहारवाले १५ अप्रैल के बाद ही गांव जाते हैं। मतदान की तिथि आगे बढ़ने से अधिकांश उत्तर हिंदुस्थानी वोट नहीं दे पाएंगे। वहीं बसपा नेता अशोक सिंह का कहना कुछ अलग ही है। सिंह कहते हैं कि यूपी में तो सातों चरणों में चुनाव है, यहां के लोग यूपी पहुंचकर अपने-अपने प्रत्याशी का प्रचार-प्रसार करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर पहले चरण में मुंबई में मतदान होता तो अच्छा होता। लोग यहां पर मतदान करते फिर मुलुक जाते।

७ चरण में होंगे लोकसभा चुनाव
मुंबई में है २९ अप्रैल को
उस दौरान होंगी गर्मी की छुट्टियां
शादियों का है जोरदार मुहूर्त
ऐसे में काफी वोटर जाएंगे अपने मुलुक
हो चुका है ट्रेनों में रिजर्वेशन
चल रहा है ७००-८०० वेटिंग
कई गाड़ियों में ‘नो रूम’
ऐसे में मुंबई में नहीं डाल पाएंगे वोट

शादियों में बजेगा ‘सियासी बैंड’
मुंबई में भले ही मतदान का प्रतिशत घटेगा पर यूपी की शादियों में ‘सियासी बैंड’ बजेंगे मतलब हर विवाह समारोह में सिर्फ और सिर्फ सियासी चर्चाएं ही छाई रहेंगी। इन समारोहों में प्रत्याशी गुणा-गणित साधने के लिए अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज कराएंगे। चुनाव का माहौल और विवाह समारोह या तिलकोत्सव हो तो बात ही कुछ अलग हो जाती है। प्रत्याशी इस जुगाड़ में रहते हैं कि एक साथ सैकड़ों लोगों से मुलाकात हो जाती है और जिसके यहां समारोह होता है, वह यह दिखाने में सफल हो जाता है कि फलां नेता हमारे यहां आया था। राजनीतिक दांव-पेंच के ‘माहिर’ उत्तर हिंदुस्थानी चुनाव के दौरान बड़े ही चटकारे लेकर हार-जीत की गणित ऐसे मौकों पर प्रस्तुत करेंगे।