ब्रिज दूर करेगी दूरी! वसई टू भाइंदर @ १० मिनट,

७ साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वसई और भाइंंदर सही मायनों में एक-दूसरे से जुड़नेवाले हैं। जी हां, अब वसईकर जल्द ही मुंबई से जुड़नेवाले हैं। सब कुछ ठीक रहा तो आगामी दो साल में ब्रिज के तैयार होते ही वसई टू भाइंंदर महज १० मिनट में पहुंच जाएंगे।
बता दें कि वसई-विरार में रह रहे लोगों को आज भी भाइंदर जाने के लिए रेलवे और महामार्ग उपलब्ध हैं। आज भी लोगों को वसई-पश्चिम से भाइंदर जाने के लिए
डेढ़ घंटे से अधिक का सफर करना पड़ता है। ऐसे में पिछले कई वर्षों से लोगों की यह मांग रही है कि रेलवे ट्रैक के बगल एक ब्रिज बनाया जाए ताकि लोगों के समय व इंधन तथा पैसों की बचत हो। २०१३ में एमएमआरडीए ने ब्रिज बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी। उसके बाद अनेक कारणों के चलते टेंडर प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई।
आखिरकार भाइंदर-पश्चिम से वसई-पश्चिम तक ब्रिज बनाने के लिए एमएमआरडीए ने टेंडर जारी कर दिया है। एमएमआरडीए के प्रकल्प संचालक दिलीप कवठकर ने बताया कि इस ब्रिज को बनाने के लिए ४८ महीनों का समय दिया जाएगा। टेंडर निकाल दिए गए हैं। ब्रिज बनाने के लिए इच्छुक कंपनियां अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं।
 ५ किमी लंबा होगा पुल
दिलीप कवठकर ने बताया कि इस पुल की शुरुआत भाइंदर-पश्चिम, उत्तन स्थित सुभाषचंद्रा चौक से नायगांव-पश्चिम और पाणजू में जाकर खत्म होगी। पुल की लंबाई ५ किलो मीटर और चौड़ाई ३० मीटर की होगी।
 प्री बिडिंग बैठक में १५ कंपनियां शामिल
एमएमआरडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्री-बिडिंग बैठक में १५ कंपनियों ने हिस्सा लिया था। ब्रिज बनाने की कुल लागत १०८०.६० करोड़ रुपए आंकी गई है। ब्रिज बनाने के लिए ४८ महीने का समय लगने की बात कही है।
 ४० हजार वाहन होंगे डाइवर्ट
एमएमआरडीए द्वारा लगाए अनुमान के मुताबिक रोजाना २८ से ४० हजार वाहनों का ट्रैफिक डाइवर्ट होनेवाला है। इस ब्रिज के लिए महाराष्ट्र मैरिटाइम बोर्ड, इनलैंड वाटरवे ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया, महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी, सीआरजेड और एफआरए प्रमाणपत्र भी भाइंदर और पालघर के कलेक्टर से प्राप्त कर लिया गया है। वन विभाग, नमक विभाग, उच्च न्यायालय से एनओसी, तुंगारेश्वर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से अब भी अनुमति लेना बाकी है।