भरपेट भोजन करके तुरंत यात्रा शुरू न करें

मुझे एचआईवी व हेपेटाइटिस बी दोनों है। २००९ से मेरी दवाई शुरू है। ये सभी दवाएं एआरटी की हैं। २०१७ में 
डॉक्टरों ने दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण कुछ दवाएं बदली हैं। मेरा सीडी-४-८९डी है, जो कि बहुत अच्छा है। मैं दवाई नियमित लेता हूं। कृपया मुझे देसी दवा बताएं ताकि मैं स्वस्थ रहूं और ये दोनों ही संक्रमण में मेरे लिए उपयोगी हों।
-संजय, नालासोपारा
ये दोनों बीमारी/संक्रमण वायरल किस्म की हैं। आप दवाई नियमित रूप से लेते रहें। एआरटी की दवा शुरू करने के बाद उसे सारी जिंदगी लेना जरूरी होता है जैसे कि डायबिटीज व ब्लड प्रेशर के रोगी लेते हैं। शरीर का स्वास्थ्य कितना भी अच्छा हो। सीडी-४ काउंट कितना भी अच्छा हो या वायरल लोड कम भी हो तब भी दवा खानी ही है। उसे बीच में छोड़ा नहीं जा सकता है। हेपेटाइटिस बी के लिए सर्वोत्तम दवा है ‘आरोग्यवर्धिनी वटी आप उसकी दो गोली नियमित खाएं। हेपेटाइटिस बी के कारण भविष्य में लीवर की बीमारी, सीरोसिस लीवर व वैंâसर होने की संभावना रहती है। आरोग्यवर्धिनी के हिपेटो प्रोटेक्टिव गुण के कारण आगे बीमारी होने की संभावना रुक जाती है। इसके अलावा गिलोय घन की भी गोली रोज खाएं। गिलोय शरीर की प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है। गुडुची रसायन व विघटन है। साथ ही साथ हेपेटाइटिस बी में भी उपयोगी है। आप संतुलित व पौष्टिक आहार लें। संतुलित व पौष्टिक आहार अपने आप में एक औषधि है। भाग-दौड़, तनाव व पर्यावरण दूषित होने से मिलनेवाले खाद्यपदार्थ आदि कई बार रोगों का कारक बन जाते हैं। खाने में नियमित दूध, घी, दाल, अंकुरित धान्य व केला अवश्य ले।
मैं डेटा इंट्री का काम करता हूं। मेरे पेट में दर्द था इसलिए डॉक्टर ने एंडोस्कोपी टेस्ट करवाया। उसमें पेप्टीक अल्सर की बीमारी बताई है। मैं अविवाहित हूं। मेरी उम्र २९ वर्ष की है। मैं स्मोकिंग व कभी-कभी ड्रिंक भी लेता हूं। मुझे आयुर्वेद की दवा का पथ्य बताकर मुझे इस रोग से मुक्त कराएं।
-मोहम्मद असलम, कल्याण
पेप्टीक अल्सर प्राय: २० से ४० वर्ष की आयुवाले व्यक्तियों में ज्यादा पाया जाता है। यह वही उम्र है जब व्यक्ति अपने जीवन में काम-काज व्यापार, नौकरी आदि के कारण सबसे ज्यादा तनाव में रहता है। ५० वर्ष के बाद अल्सर की शिकायत हो तो जोड़ो में दर्दवाले रोगियों द्वारा दर्द निवारक की दवाओं का अति मात्रा में सेवक करने के कारण होता है। अल्सर के कारणों में मद्यसेवन, तंबाकू, गुटखा, स्मोकिंग, तेज मसाला, फास्ट फूड, जंक फूड, वड़ा-पाव, समोसा पाव, चायनीज फूड, ज्यादा चाय या कॉफी, ज्यादा कोल्डड्रिंक आदि का सेवन करना है। अत: इन सबका त्याग करना या इसे कम करना आवश्यक हो जाता है। आयुर्वेद में अम्लपित्त व्याधि की उपेक्षा करने पर व पित्त में विगुणता आ जाने के कारण होता है। सूतशेखर रस व कामदुधा रस, शंखवटी की दो-दो गोलियां दिन में ३ बार लें। अविपत्तीकर चूर्ण एक-एक चम्मच दो बार भोजन के पूर्व पानी के साथ लें। भूनिम्बादि क्वाथ ३-३ चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद लें। खाली पेट यानी भूखे न रहें। ३० से ४० काली किशमिश दिन भर में खाएं। लौकी व पत्तागोभी का रस निकालकर आधा-आधा कप दो बार पीएं। उपवास न करें। तनाव, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या आदि मानसिक भावों के वेगों को नियंत्रण में रखें। विषाद, मानसिक अवसाद आदि से रोग बढ़ जाता है। मांसाहार का भी त्याग करें। एसीडिक फूड न खाएं। भोजन में फल, साग-सब्जी का प्रयोग बढ़ाएं। गायक का घी दो-दो चम्मच रोज खाएं।
मैं हरी सब्जियों के खाने का काफी शौकीन हूं। १५ दिन पहले मुझे जुलाब हुआ तो डॉक्टर ने मुझे हरी सब्जियां खाने से रोक दिया। परंतु अपने आपको मैं साग-सब्जी खाने से नहीं रोक सकता। उन्होंने मुझे क्यों रोका होगा? क्या कोई उपाय है कि मैं वापस साग-सब्जी खाने लगूं?
-रामनवल, मानखुर्द
आपके डॉक्टर ने साग-सब्जी खाने से क्यों रोक दिया, इसका उत्तर तो वे ही दे सकते हैं। परंतु आपके प्रश्न का संज्ञान लेते हुए मैं यह बताना चाहता हूं कि जुलाब की बीमारी के समय हरी सब्जियां खासा निषिद्ध है। हरी सब्जी खाने से जुलाब बढ़ सकता है। परंतु जुलाब ठीक हो जाने के बाद खाने में कोई समस्या नहीं है। बरसात के दिनों में पत्तेवाली हरी सब्जियां खाना निषिद्ध है। उसके पीछे का यह कारण है कि बरसात के कारण, कीचड़ के कारण हरी सब्जियों में कीड़े, जंतु, मिट्टी आदि लगी रहती हैं। साथ ही साथ पानी भी अस्वच्छ रहता है तो उसके कारण जुलाब, बुखार व अन्य बरसाती रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए डॉक्टर बरसाती दिनों में इसे खाने से मना करते हैं। स्वच्छता आवश्यक है। हरी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर व अच्छी तरह पकाकर खाएं। कच्ची न खाएं। आप परेशान न हों, आप बिना किसी चिंता व फिक्र के हरी सब्जी खाएं। हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए हितकर व उपयोगी हैं। खनिज तत्व व शरीरोपयोगी कई तत्वों को प्राप्त करने का उपाय हरी सब्जी है। संवादहीनता के कारण आप डॉक्टर की सलाह गलत समझ बैठे।
मुझे बस या सड़क पर चलनेवाले किसी भी वाहन में यात्रा करते समय चक्कर आता है एवं उल्टी हो जाती है। बंद वाहनों और एसी में मुझे डर लगता है। चक्कर बढ़ जाता है। सफर करना मेरे लिए त्रासदी बन जाता है। परंतु खुले वाहन जैसे ऑटो, स्कूटर आदि में कोई तकलीफ नहीं होती। कृपया उपचार बताएं।
-जीवन, विरार
यात्रा शुरू करने से आधे घंटे पहले आपको उल्टी बंद करनेवाली दवाएं लेनी चाहिए जैसे कि स्टेमटिल, डोमस्टाल, एनोमीन इत्यादि। परंतु इन दवाओं का सेवन करने से आलस्य, नींद आना, मुख का सूखना आदि लक्ष्ण हो जाता है। परंतु कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां एलदिवटी वगैरह मुंह में रखकर चूसने से काफी फायदा होता है। आंवला सुपारी, नींबू चाटना भी इसमें काफी उपयोगी रहता है। बंद वाहन में आपको डर लगता है या घुटन-सी होती है, वो विशुद्ध रूप से मानसिक है और आपके अंदर का भय है इसलिए आप खुले वाहन में सफर करें। घुमावदार पहाड़ियों, सड़कों पर यात्रा करते समय खिड़की से बाहर न झांकें। भरपेट भोजन कर तुरंत यात्रा शुरू न करें। पेट हल्का रखें। यात्रा के दौरान आंखें बंद रखें। सड़क यात्रा करने की बजाय यात्रा के अन्य विकल्प जैसे रेलयात्रा आदि अपनाएं। रेलयात्रा हमेशा सुखदायी व अच्छी होती है।