" /> विक्रांत व्यू….मेरे घर आ जाओ!

विक्रांत व्यू….मेरे घर आ जाओ!

देश में इनकम टैक्स के छापों का हमेशा मौसम रहता है। रोज किसी न किसी नामचीन अधिकारी या व्यापारी के यहां छापा पड़ता ही है। इन छापों की खबरें मुझे प्रेरित करती हैं। हर खबर के खाकसार की इच्छा जागती है कि आखिर कब मेरे यहां इनकम टैक्स का छापा पड़ेगा? और कब मेरी किस्मत जागेगी? मेरा नाम भी मीडिया की सुर्खियों में आएगा? दरअसल, बात सिर्फ इतनी है कि आज से ४ साल पहले मेरे एक पड़ोसी के घर इनकम टैक्स का छापा पड़ा था। तब से आज तक पड़ोसी महोदय गर्व के माउंट एवरेस्ट पर आसीन रहते हैं और उनकी पत्नी मेरी शरीके हयात पर ताना कसती रहती है कि छापा कंगालों के यहां नहीं पड़ता। इनकम टैक्स की टीम गरीबों के यहां नहीं जाती। तुम्हारे यहां क्या मिलेगा सरकार को? १० रुपए किलो रद्दी में बिकनेवाली किताबें। तब से मेरी पत्नी रोज मुझे ताना मारती है कि अगर किसी अफसर से शादी करती तो अब तक कई बार छापे पड़ चुके होते। तुमसे तो शादी करके मेरी किस्मत फूट गई। न छापा, न तलाशी, न बरामदगी, न पूछताछ और न ही कोई गिरफ्तारी। इसलिए हे इनकम टैक्सवालों अब तो मेरे घर आ जाओ।
रु. ७५ की चिप
कोरोना महामारी से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था का युगांडा तो हो ही गया है। पर इस कोढ़ में खाज के हालात सिर्फ ७५ रुपए का एक चिप कर रहा है। ये कोई मामूली चिप नहीं बल्कि सेमी कंडक्टर चिप है। देखन में छोटे लगे, घाव करे गंभीर की तरह। इस छोटी-सी चिप के कारण अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ गई है। दरअसल, विश्व बाजार में सेमीकंडक्टर चिप की बेहद कमी है। इस चिप के लिए ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट उद्योगवाले विरही यक्ष की भांति विलाप कर रहे हैं पर चिप है कि मिलती नहीं। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, सीसीटीवी, ५ जी उपकरण, टेलीविजन व गाड़ियों का काम इस चिप के बिना चलता नहीं। बीते साल कोरोना के बढने के साथ चिप के उत्पादन में कमी की शुरुआत हुई। बिक्री में आई जबरदस्त गिरावट के कारण ऑटोमोबाइल व गैजेट निर्माताओं ने कंप्यूटर चिप बनानेवाले चीन और ताइवान के कारखानों को बहुत कम ऑर्डर दिए। इसके बाद मांग में आई उछाल से चिप की दुनियाभर में कमी हो गई है। हमारी सरकार इसे एक बड़े मौके के रूप में देख रही है। सरकार देश को सेमीकंडक्टर चिप का बड़ा निर्यातक बनाने की योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार सेमीकंडक्टर बनानेवाली प्रत्येक कंपनी को एक अरब डॉलर यानी करीब ७,३०० करोड़ रुपए नकद दे रही है।
योगी की पुलिस
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस में हीरों की कमी नहीं है। इसमें एक ओर तो कुलदीप किशोर तिवारी ‘ सत्यम’ जैसे होनहार, जांबाज, कर्तव्यदक्ष युवा हैं जो कविता, आयोजन, समाजसेवा व रचनात्मक कार्यों के जरिए यूपी पुलिस का नाम रोशन किए रहते हैं तो दूसरी ओर मेरठ के पुलिसकर्मी भी हैं, जो लापता किशोरी की तलाश तभी शुरू करेंगे जब उन्हें किशोरी के परिजन गाड़ी मुहैया कराएंगे। मेरठ में जानी थाना क्षेत्र के खानपुर गांव से १७ वर्षीय किशोरी छह मार्च से लापता है। लड़की के परिजनों से पुलिस कह रही है कि पहले गाड़ी का इंतजाम करो, तब तलाश शुरू करेंगे। परिजन अब तक करीब १० हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। ताजा लोकेशन जिला सुल्तानपुर की मिली है। पुलिस फिर वही अलाप राग रही है कि गाड़ी का इंतजाम करो तो वहां जाएंगे। धन्य हैं मेरठ के पुलिसकर्मी।
निजी कंपनियों की मिसाइलें
देश में अब सरकार के साथ मिलकर निजी कंपनियां भी हथियार बनाएंगी। डीआरडीओ ने निजी कंपनियों को मिसाइल के विकास और उत्पादन में साथ काम करने की अनुमति दे दी है। इसके पीछे मकसद देश में मिसाइल का घरेलू बाजार बनाना है। लेकिन सरकार ने ये नहीं सोचा कि इन निजी कंपनियों की मिसाइलें क्या गुल खिलाने वाली हैं? मान लीजिए एक निजी कंपनी जिसके बिजनेस इंटरेस्ट चीन व पाकिस्तान में हैं। तो वो क्या करेगी? संभव है कि वो मिसाइल में ऐसी कोई तकनीक फिट कर दे, जिसकी वजह से मिसाइल चीन व पाकिस्तान की तरफ मार ही नहीं कर पाएगी। डीआरडीओ ने कहा कि इससे स्वदेशी मिसाइलें बनेंगी और आत्मनिर्भर हिंदुस्थान मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। पर इससे देश की जेब भी तो शूली पर चढ़नेवाली है।
(लेखक तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)