" /> विघ्न हरेगा ‘कोविशिल्ड’,  गणेशोत्सव से शुरू हुआ ट्रायल

विघ्न हरेगा ‘कोविशिल्ड’,  गणेशोत्सव से शुरू हुआ ट्रायल

 १,६०० लोगों पर परीक्षण जारी
 हर केंद्र पर करीब १०० वॉलेंटियर्स

देश में भले ही कोरोना रोगियों की संख्या बढ़ रही हो मगर अब जल्द ही इस विघ्न को ‘कोरोनाशिल्ड’ हरेगा। परसों शनिवार को गणेशोत्सव शुरू होने के दिन इस वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल शुरू हो गया और वॉलेंटियर्स को पहला डोज दिया गया। दूसरा डोज शनिवार से २९ दिनों के बाद दिया जाएगा।

बता दें कि इस ‘कोविशिल्ड’ वैक्सीन को पुणे की कंपनी बना रही है। कंपनी के ट्रायल का अंतिम डेटा दूसरा डोज दिए जाने के १५ दिन के बाद सामने आएगा। इसके बाद कंपनी ‘कोविशिल्ड’ को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बाजार में लाने के लिए तैयार हो जाएगी। हालांकि इससे पहले वैक्सीन ‘कोविशिल्ड’ का ट्रायल पूरा होने में ७ से ८ महीने लगने की बात कही जा रही थी। पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट के अनुसार शनिवार से इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। १७ केंद्रों में १६०० लोगों पर ‘कोविशिल्ड’ वैक्सीन का ट्रायल २२ अगस्त से शुरू कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में हर केंद्र पर लगभग १०० वॉलेंटियर्स पर कोरोना वैक्सीन का परीक्षण किया जा रहा है।

बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका नाम की कंपनी से वैक्सीन को बनाने के अधिकार खरीदे हैं। इसके लिए सीरम इंस्टीट्यूट एस्ट्राजेनेका को रॉयल्टी का भुगतान करेगी। बदले में सीरम इंस्टीट्यूट इस वैक्सीन को हिंदुस्थान समेत दुनिया के ९२ अन्य देशों में बेचेगी। दुनिया के कई देशों की तरह हिंदुस्थान में कोरोना वैक्सीन की खोज को लेकर काम काफी तेजी से चल रहा है। हिंदुस्थान की पहली कोरोना वैक्सीन ‘कोविशिल्ड’ पुणे की बायोटेक कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट बना रही है जिसके बारे में पहले दावा किया गया था कि ७३ दिनों में वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगी। हालांकि अब इस पर इंस्टीट्यूट की ओर से कहा गया है कि ‘कोविशिल्ड’ की उपलब्धता को लेकर किया जा रहा दावा गलत और अनुमान पर आधारित है।

सीरम ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वह यह स्पष्ट करना चाहेगा कि ‘कोविशिल्ड’ की उपलब्धता को लेकर मीडिया में किया जा रहा दावा गलत और अनुमान पर आधारित है। सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से कहा गया है कि वर्तमान में सरकार ने हमें केवल वैक्सीन का निर्माण करने और भविष्य में उपयोग के लिए भंडार करने की अनुमति दी है। इंस्टीट्यूट ने बताया कि ट्रायल के एक बार सफल होने के बाद ‘कोविशिल्ड’ का व्यवसायीकरण किया जाएगा और सभी अपेक्षित विनियामक स्वीकृतियां लागू हो जाएंगी। सीरम इंस्टीट्यूट ने बताया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के लिए तीसरे चरण की टेस्टिंग अभी भी चल रही है और केवल एक बार टीका इम्युनोजेनिक और प्रभावोत्पादक सिद्ध होने के बाद, वह आधिकारिक तौर पर इसकी उपलब्धता की पुष्टि करेगा।