" /> अपराधी कौन?, फोन टैपिंग और भी बहुत कुछ!

अपराधी कौन?, फोन टैपिंग और भी बहुत कुछ!

राजस्थान में राजनीतिक लड़ाई थमती नहीं दिख रही। सचिन पायलट की भारतीय जनता पार्टी से जो जोड़-तोड़ शुरू थी, वो पैसों के लेन-देन की अति तक पहुंच गई थी। मतलब राजस्थान की गहलोत सरकार को पैसे फेंक कर जोड़-तोड़ करके बहुमत खरीदने की योजना बनाई गई थी। मुख्यमंत्री गहलोत ने उस झूठ का पर्दाफाश कर दिया, जिसे सचिन पायलट ने अन्याय के विरुद्ध बगावत की उपमा दी थी। वे इसके लिए पायलट और भाजपा नेताओं की फोन वार्ता को सामने लाए। यह धक्कादायक तो है ही, सनसनीखेज भी है। गहलोत सरकार गिराने के लिए केंद्रीय सत्ता का दबाव और पैसों का प्रयोग हुआ। कांग्रेस ने उसे नेस्तनाबूद कर दिया। अब भाजपा का कहना यह है कि राजस्थान सरकार ने अनैतिक तरीके से फोन टैपिंग की। इस फोन टैपिंग की जांच अब केंद्रीय गृह विभाग करेगा और ऐसा आदेश भी मिलने की खबर हमने पढ़ी है। ये सही भी है। केवल ऐसे नेताओं का ही नहीं, बल्कि किसी की भी निजी वार्ता को चोरी से सुनना एक अपराध है। यह व्यक्तिगत आजादी पर हमला है। ऐसे में केंद्रीय गृह विभाग इस संदर्भ में जांच करनेवाला होगा तो इसमें क्या गलत है? सवाल सिर्फ इतना है कि गहलोत सरकार ने इस वार्ता को सुना होगा तो ऐसी कोई आपातकाल की स्थिति इस देश में या राज्य में बन गई थी क्या? राजस्थान में बहुमत की सरकार को गिराने की हलचल शुरू थी और इसके लिए विधायकों की ऊंचे दामों पर खरीद-फरोख्त शुरू थी। सचिन पायलट की बगावत के पीछे नैतिकता कम और पैसों की कामना ज्यादा थी। यह जनता और लोकतंत्र से विद्रोह है। यह भ्रष्टाचार है। गहलोत सरकार ने सबूतों के आधार पर भाजपा के एक नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शेखावत पर गंभीर अपराधों के मामले और आरोप हैं लेकिन भाजपा इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। फोन पर हुई वार्ता को सुनना व नजर रखना जितना अनैतिक है, सरकार गिराने के लिए विधायकों को खरीदने का आपराधिक स्वरूप का कृत्य भी उतना ही अनैतिक है। राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग करनेवालों से उनके केंद्रीय मंत्रियों का इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया? पहले गजेंद्र शेखावत का इस्तीफा लो। विधायकों की खरीद-फरोख्त के अपराध का प्रायश्चित करवाओ, उसके बाद ही गहलोत सरकार की ओर उंगली दिखाओ। पायलट की बगावत का मामला फंस जाने से भाजपा की करतूत सामने आ गई है। यह मामला अगर सफल हो जाता तो उस आनंदोत्सव में सब-कुछ हजम कर लिया जाता। महाराष्ट्र की ‘ठाकरे सरकार’ को जनता ने नहीं चुना है, ऐसा श्री देवेंद्र फडणवीस कहते हैं। वे ऐसा भी कहते हैं कि इसीलिए इस सरकार को शासन करने का कोई अधिकार नहीं है। ठीक है। लेकिन बहुमत का आंकड़ा होना लोकतंत्र का संवैधानिक प्रावधान है, इसे मानते हो कि नहीं? दूसरी बात ये कि राजस्थान की गहलोत सरकार जनता द्वारा चुनी गई सरकार है। फिर भी उसे गिराने का प्रयास किया गया। मध्यप्रदेश में लोगों द्वारा चुनी गई सरकार थी। उसे भी गिराया। राजस्थान में पायलट बनाम गहलोत विवाद तो था ही लेकिन इसके बावजूद सरकार अंतर्विरोध से गिरी नहीं, उल्टे गहलोत ने भाजपा के दांव को ही उलट दिया। राजस्थान में पैसों के व्यवहार का जो ऑडियो सामने आया है, उस पर भाजपा वाले कहते हैं कि वो सब नकली है। हो भी सकता है। लेकिन जांच तो होनी चाहिए। फोन टैपिंग का मामला कोई छोटी बात नहीं है और यह सिर्फ राजस्थान में ही हो रहा है, ऐसा भी नहीं है। हमारे देश में आज अदृश्य आपातकाल की छाया दिखने का आरोप लग रहा है। इंदिरा गांधी ने विरोधियों को जेल भेज दिया था। उसकी टीस आज भी व्यक्त होती रहती है। लेकिन आज विरोधियों को टिकने ही नहीं देना है। उन्हें राजनीतिक, सामाजिक और मानसिक रूप से कमजोर कर देना है। इसके लिए लोकतांत्रिक तरीके से स्थापित सत्ता को खींच लेने का खेल शुरू है। महाराष्ट्र में छह महीने पहले सत्ता स्थापना का जो रोमांचक नाट्य देखने को मिला, उसमें विरोधियों के फोन टैपिंग की भी भूमिका थी ही। उस पर बोलो तो कई लोगों को मिर्ची लग जाती है लेकिन इन मिचिर्‍यों का बाजार में अब कोई मोल नहीं है। ऐसी मिचिर्‍यों में तीखापन कम और तड़तड़ाना ज्यादा होता है। फिलहाल भाजपा का वैसा ही तड़तड़ाना शुरू है। राजस्थान मामले में भाजपा की हालत कुछ यूं हो गई है कि ‘करना कुछ चाहते थे, हो गया कुछ और’ कांग्रेस और उनकी कार्यशैली पर फूल बरसाने की आवश्यकता नहीं है। उनका अंतर्गत कलह या नए-पुराने विवाद हैं और वो समाप्त नहीं होनेवाले। राहुल गांधी को किसी भी प्रकार से सफलता नहीं मिलने देना है, इसके लिए मानो इस तरह के विवादों को कुछ निश्चित लोगों द्वारा समय-समय पर उछाला जाता है। मध्यप्रदेश में ऐसे ही हाथ से सत्ता निकल गई। राजस्थान फिलहाल बच गया। राजस्थान के फोन टैपिंग से कई पर्दाफाश हुए लेकिन कांग्रेस के नेताओं की आपसी बातचीत अगर किसी ने चोरी-छिपे सुनी और वह राहुल गांधी तक पहुंचा दी तो कई सनसनीखेज खुलासे होंगे। राहुल गांधी को काम करने ही नहीं देना है, ऐसा बीड़ा कुछ लोगों ने उठाया हुआ है। इसका असर पूरे विपक्ष पर पड़ता है। फोन टैपिंग अपराध और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आघात है ही। लोकतांत्रिक तरीके से सत्तासीन हुई सरकार को धन-बल का सहारा लेकर गिरा देना, असंवैधानिक है। इसलिए बड़ा अपराध कौन-सा है, यह तय करना चाहिए।