" /> हौसले से जीतें जंग

हौसले से जीतें जंग

कोरोना का काल है और हाल बेहाल है। सबके सामने यक्ष प्रश्न है कि जान पहले या जहान है। यत्र-तत्र-सर्वत्र से अच्छी खबरें नहीं आ रहीं हैं ऐसे में एक ही संबल है, जो अपने पास है वह है हमारा हौसला, जिससे हम इस जंग को जीत सकते हैं। हमें अपने सोच को बदलना होगा। हमें बस इस हौसले को टूटने से रोकना होगा। यह समय मजबूत होकर समय से लड़ने का है। इस लड़ाई से हारने का नहीं, हराने का है।
कोरोना से लड़ते-लड़ते अब पूरा एक साल बीत चुका है। पिछले ही मार्च में लॉकडाउन की घोषणा के साथ इसकी गंभीरता और विभीषिका का अंदाजा लगा था। इस मार्च से फिर यह डरा रहा है। लोग पहले से और डर गए हैं। उनके सामने कोरोना के साथ-साथ लॉकडाउन में हुई त्रासदी भी डरा रही है लेकिन पिछले मार्च और इस मार्च में एक अंतर है। आज हमारे पास इससे लड़ने का अनुभव है, लॉकडाउन लगाने की बाद की परिस्थिति का अनुभव है, कोरोना होने के बाद वैâसे लड़ना है, इसका अनुभव है इसलिए कोरोना की इस दूसरी दस्तक से दहशत में नहीं रहना है। हमें इस जंग को भी जीतना है और अपने हौसले से ही जीतना है।
कई बार हौसले की कमी के कारण भी लोग सामने अवसर होने पर उसे पहचान नहीं पाते हैं। ऐसे में हमें उनके लिए जामवंत की भूमिका में खुद आना पड़ेगा, खुद के लिए भी, परिवार के लिए भी और अपने आस-पास भी। किसी के लिए खुद को जामवंत बन इस भूमिका को हमें निभाना पड़ेगा। हमें खुद भी हौसला रख दूसरे को संबल देना पड़ेगा। इस कोरोना काल में बहुत सी सफलताओं की कहानियों ने जन्म लिया है, मानव का विकास संघर्षों के साथ हुआ है और विपत्ति से भी रास्ता निकाल यहां तक पहुंच आना, यही उसकी खासियत रही है। अपने आस-पास नजर दौड़ाइए। आपको बहुत सी कहानियां मिल जाएंगी, जो हौसले और प्रेरणा दोनों का काम करेंगी। ऐसी ही कुछ कहानियां सुनाता हूं मैं आपको, यूपी के छोटे से कस्बे में लॉकडाउन लगने के बाद जब नियमित रोजगार के विकल्प खत्म हो रहे थे तो एक युवा उद्यमी ने सबसे पहले हौसला किया और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक हैंड सेनिटाइजर और मास्क का व्यापार चालू किया। खरीदकर बेचना फिर खरीदना, धीरे-धीरे उसे लगा इसे घर पर भी बनाया जा सकता है। उसने इसे घर पर बनाना चालू किया अब उसका लाभ बढ़ गया। उसे व्यापार का अनुभव मिल गया था। अब वह इसके अलावा घर साफ करने के अन्य उत्पाद भी बनाने लग गया था और आज वह २० से अधिक उत्पाद बनाता है। इससे मिलती-जुलती बहुत सी कहानियां आपको आस-पास मिल जाएंगी, जहां लोगों ने न्यूटन के तीसरे नियम के विपरीत जाकर जड़त्व के नियम को तोड़ा और परिस्थितियों पर विजय पाई।
जड़त्व के नियम तोड़ने के संबंध में एक कहानी सुनाता हूं। एक टैंपोवाला बड़ा निराश था कि उसकी आय नहीं हो रही है। वह घर पर बैठा-बैठा ही सोचता था कि कोई सवारी आ जाए तो लेकर चलता हूं। टैंपो उसने बैंक से लोन पर लिया हुआ था और हर महीने किश्त का और घर का खर्च उस पर भारी पड़ रहा था। एक दिन उसे परेशानी में देख उसके दोस्त ने पूछा भाई तुम क्यों परेशान हो, उसने बोला देखो मेरी कमाई नहीं हो रही है और मैं परेशान हूं कि कोई सवारी मेरे पास नहीं आ रही है। तब उस दोस्त ने उसे जामवंत बन ज्ञान दिया, उसने बोला तुम्हारे पास टेंपो है, एक संपत्ति है, यह चल सकती है। इसके अंदर यह प्रतिभा है और इसे तुम घर पर रख कर सोचोगे कि कोई सवारी तुम्हारे पास आएगा तो तुम बाहर जाओगे तो ऐसा होने वाला नहीं है, अब समय बदल चुका है। तुम टेंपो लेकर सड़क पर उतरो। थोड़ी दूर चलो, जब टेंपो देखेंगे लोग तो हाथ देंगे सवारी मिल जाएगी, बस तुम्हें इस वाहन को लेकर बाजार में उतरना पड़ेगा। तुम्हारे ग्राहक रुपी मौके बाजार में मौजूद हैं इसके लिए तुम्हें घर से बाहर निकलना पड़ेगा। घर में ही बैठे रहोगे तो ग्राहक या मौका दोनों चल कर नहीं आएगा।
ठीक यही हाल जीवन का है। हमें अपने जड़ स्थिति से बाहर निकलना पड़ेगा तभी हम इसी हालत को तोड़ सकते हैं। हमें कुछ करना पड़ेगा, करने का मौका ढूंढ़ना पड़ेगा, हमें अपनी शक्ति अपनी ताकत पहचाननी पड़ेगी और यदि तमाम संभावनाएं आपके अंदर होते हुए आप कुछ कर नहीं पा रहे तो कहीं न कहीं दोष अपने सोच का भी है, जिसे हमने अपनी बंदिशें बना ली हैं। हमने अपने आपको एक छवि में वैâद कर लिया है। इस कोरोना काल में हमें अपनी उन बंदिशों और छवि को तोडना पड़ेगा तभी हम जान और जहां दोनों बचा सकते हैं।
ऊपर की कहानी मैंने बताई कि वैâसे एक व्यक्ति जड़ स्थिति से बाहर निकल उद्यमी बना, परिस्थितियां दूसरी भी हो सकती हैं। ऐसी ही एक घटना बताता हूं, यह भी कोरोना काल की कहानियां हैं। एक मित्र दो तीन सालों से उच्च वेतन प्राप्त नौकरी छोड़ बिजनेस चालू किया था। अभी धंधा जमा नहीं था कि कोरोना ने सब कुछ चौपट कर दिया। सारी सेविंग उन्होंने बिजनेस में लगा दी थी और बिजनेस बंद हो गया था। काफी परेशान थे लेकिन उनके पास एक पूंजी थी उनके पुराने नौकरी का अनुभव संपर्क और काम में उनका नाम। इस कोरोना काल ने योग्य एवं कुशल लोगों के लिए भी अवसर बढ़ाए हैं। एक कंपनी से उनके पास
कॉल आया, काफी सकुचा रहे थे, निर्णय नहीं कर पा रहे थे। खुद के नुकसान वाला भी बिजनेस छोड़ने में उन्हें हिम्मत नहीं हो रही थी। दोस्तों से राय ली और फिर नतीजे पर पहुंचे कि नौकरी कर लेनी चाहिए। इस कोरोना काल में एक ही निर्णय की खूंटी से बंधे रहने से अच्छा है, जो भी अवसर मिले, उसे लपकें। यह सामान्य काल नहीं है, यदि आपने चूका तो दूसरा कोई उसे लपक लेगा।
अत: फिर यही चीज कहता हूं कि इस कोरोना काल में हौसले से जंग लड़ें, अवसरों को पहचानें उन्हें लपकें, जड़ स्थिति और पूर्व में वैâद छवियों से बाहर निकलें। यदि नौकरी करने से आय मिल रही है तो नौकरी करें, चलती नौकरी को बरकरार रखने की कोशिश करें और यदि नौकरी नहीं कर पा रहे हैं तो स्वरोजगार करें, लेकिन कुछ करें। व्यस्त रहें, मस्त रहें और स्वस्थ रहें।