" /> वर्क फ्रॉम होम में ‘छेड़छाड़’ वायरस!

वर्क फ्रॉम होम में ‘छेड़छाड़’ वायरस!

लॉकडाउन के कारण इन दिनों वर्क फ्रॉम होम प्रचलन में है। इसके साथ ही वेबिनार ट्रेंड पकड़ चुका है। जिन दफ्तरों में महिलाएं काम करती हैं, वहां पहले कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न की घटनाएं सुनाई पड़ती थीं। वेबिनार के दौर में वे घटनाएं बंद हो चुकी होंगी! अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो जरा ठहरिए। ये ‘छेड़छाड़’ और यौन उत्पीड़न का वायरस वर्क फ्रॉम होम में भी शिफ्ट हो गया है। इसके साथ ही अब कानूनी उलझनें भी खड़ी हो गई हैं कि इन्हें क्या माना जाए और इससे कैसे निपटा जाए?
गौरतलब है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले पहले भी आते रहे हैं लेकिन वर्क फ्रॉम होम में भी अब ये समस्या आने लगी है। लोग वीडियो कॉन्फ्रेंस में मीटिंग कर रहे हैं। ऐसे में महिलाएं यौन उत्पीड़न के मामलों में एक नई तरह की स्थिति का सामना कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एचआर ‘कंसल्टेंसी’, ‘केल्पएचआर’ के पास महिलाओं ने इस तरह की शिकायतें की हैं। केल्पएचआर यौन उत्पीड़न के क्षेत्र में काम करती है। इसकी सह-संस्थापक स्मिता कपूर कहती हैं, ‘लॉकडाउन के दौरान हमारे पास कई महिलाओं की शिकायतें आई हैं जिन्होंने वर्क फ्रॉम होम में यौन उत्पीड़न के मसले पर सलाह मांगी है। कुछ महिलाओं को ये उलझन है कि वर्क फ्रॉम होम होने के कारण क्या यह मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के तहत आएगा? कुछ महिलाएं इस संबंध में अपने ऑफिस में शिकायत भी कर चुकी हैं।’ जानकारों के अनुसार वर्क फ्रॉम होम में होनेवाले यौन उत्पीड़न में भी वही नियम-कानून लागू होंगे जो कार्यस्थल पर होने वाले मामलों में लागू होते हैं। अगर किसी महिला के साथ ऐसा मामला सामने आता है तो वो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून के तहत अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। यौन उत्पीड़न के खिलाफ सहायता करनेवाली संस्था ‘साशा’ की संस्थापक और वकील कांति जोशी कहती हैं कि पहले हमें ये समझना होगा कि कार्यस्थल की परिभाषा क्या है। कार्यस्थल का दायरा सिर्फ ऑफिस तक ही सीमित नहीं है। काम के सिलसिले में आप कहीं पर भी हैं या घटना से जुड़ी हैं तो वो कार्यस्थल के दायरे में आती है। कांति कहती हैं, ‘हमारे पास एक मामला आया था कि मैनेजर ने महिला सहकर्मी से कहा कि ‘लॉकडाउन में मिले हुए काफी दिन हो गए। मैं तुम्हारे घर के सामने से जा रहा हूं, चलो मिलते हैं।’ इस तरह के मामले भी यौन उत्पीड़न का ही हिस्सा हैं।’ सेक्सुअल प्रकृति का कोई भी व्यवहार जो आपकी इच्छा के विरुद्ध है, आप उसकी शिकायत कर सकती हैं। ऐसे मामलों की जांच के लिए 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाली किसी भी कंपनी में आंतरिक शिकायत समिति बनी होती है।’ इस कानून के तहत संगठित और गैर संगठित दोनों ही क्षेत्र शामिल हैं। महिला की इच्छा के विरुद्ध यौन भावना से संचालित किए गए व्यवहार को यौन उत्पीड़न माना जाएगा। इसमें यौन संबंधी कोई भी शारीरिक, मौखिक या अमौखिक आचरण शामिल है। ऐसी ही एक घटना तब हुई जब एक महिला बॉस ने अपने पुरुष कर्मचारी को मीटिंग के लिए वीडियो कॉल किया तो वह कर्मचारी बिना शर्ट-पैंट के ही मीटिंग में बैठ गया। जानकारों का मानना है कि यह मामला भी छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के दायरे में आएगा।