हमने इसीलिए दिवाली नहीं मनाई! यामी गौतम

फिल्म ‘मिशन मंगल’ और ‘सांड की आंख’ की सफलता के बाद यामी गौतम अपनी आनेवाली फिल्म ‘बाला’ को लेकर चर्चा में हैं। अमर कौशिक निर्देशित फिल्म ‘बाला’ में उनके साथ आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर भी हैं। पिछले वर्ष यामी की फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ रिलीज हुई थी। पेश है गिनी-चुनी फिल्मों में काम करनेवाली यामी गौतम की पूजा सामंत से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

कैसी रही आपकी दिवाली?
दिवाली में मैं अपने घर गई थी। हम सब साथ थे लेकिन अचानक एक करीबी रिश्तेदार का देहांत हो जाने से घर का माहौल बेहद गमगीन हो गया था। लिहाजा, इस बार हमने दिवाली नहीं मनाई।
फिल्म ‘बाला’ में आयुष्मान गंजे बने हैं। अगर कभी आपको जीवन में गंजे व्यक्ति से प्यार हो जाएं तो?
वैसे अमूमन लड़के जन्म से गंजे नहीं होते। गंजेपन की शिकायत पॉल्युशन, पानी, डायट, अनुवांशिकता जैसे कई कारणों से होती है। टायफाइड होने के बाद भी बाल तेजी से झड़ते हैं। लेकिन बालों का झड़ना यानी बॉल्ड-सेमि बॉल्ड की समस्या आजकल बढ़ गई है ये सच्चाई है। अभी तक तो मुझे ऐसे किसी व्यक्ति से प्यार नहीं हुआ जिसके बाल नहीं हैं या कम हों।
फिल्म ‘बाला’ हीरो प्रधान फिल्म है, जिसकी कहानी बाला यानी आयुष्मान के इर्द-गिर्द घूमती है। इस हीरो प्रधान फिल्म को करने की कोई खास वजह?
इस कहानी का प्रोटोगनिस्ट आयुष्मान अर्थात ‘बाला’ है। उसके बाल झड़ने लगे हैं। गंजेपन की तरफ बढ़ चुका ये युवक फिर भी किसी कॉम्प्लेक्स का शिकार नहीं, उसके जीवन में सेल्फ लव कितना मायने रखता है यह कहानी उसकी है। मेरे किरदार का नाम परी है। बाला के जीवन में परी और परी की जिंदगी में बाला क्या अहमियत रखते हैं ये एक एंगल है। वकील बनी भूमि भी हैं। यह एक रोमांचक-कॉमेडी पर रियालिटी को दर्शाती फिल्म है। मुझे कहानी और किरदार अच्छा लगा। आप जैसे भी हो उसे स्वीकार करना चाहिए। खुद को प्यार करो, दूसरों के नजरिए से खुद को न देखें यही मैसेज देती है यह फिल्म। महिलाओं के लिए सुंदरता का मापदंड है गोरा रंग, रेशमी बाल, तीखे नैन-नक्श। खैर, उससे बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा पर फोकस करने का समय आ गया है।
आपको फिल्म इंडस्ट्री में आए १० वर्ष बीत चुके हैं। क्या अब आपका स्ट्रगल खत्म हो चुका है? आपको लगता है कि अब आपके लिए रोल लिखे जाने लगे हैं?
फिल्मों में आकर मुझे १० वर्ष हो गए हैं, पर मेरा स्ट्रगल अभी खत्म नहीं हुआ है और न ही कभी खत्म होगा। मुझे लगता है नामी स्टारों का भी स्ट्रगल कभी खत्म नहीं होता। यह एक अनवरत चलनेवाला चक्र है। पहले तो कोई फिल्म हिट दो, हिट होने पर अगले हिट की प्रतीक्षा करो, बेहतर रोल, अच्छे डायरेक्टर्स आपके हिस्से में आने चाहिए। इसके कई पहलू हैं। आपका फिल्मी परिवार से होना उतना मायने नहीं रखता क्योंकि फिल्मी कनेक्शंस आरंभिक दौर में काम आते हैं, अगले पड़ाव पर नहीं। मैं नॉन फिल्मी परिवार से हूं, फिल्म-दर-फिल्म आगे बढ़ने का प्रयास किया बिना किसी गॉडफादर के। अपने करियर से मैं संतुष्ट हूं क्योंकि मैंने अपने वैल्यूज के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। अपने विचारों पर मैं कायम रही हूं। एक बात और मेरे अंदर से हिमाचल प्रदेश कभी नहीं निकलेगा। मुंबई मेरी कर्मभूमि है। मैं थक जाती हूं और जब भी निराश होती हूं मेरा परिवार साथ होता है। जीवन के ये निराशा भरे बादल परिवार के कारण दूर हो जाते हैं।
फिल्म ‘उरी-द-सर्जिकल स्ट्राइक’ की सफलता का आपको क्या फायदा हुआ?
यही फायदा हुआ कि मुझे फिल्म ‘बाला’ मिल गई। आयुष्मान के साथ मैंने ‘विकी डोनर’ की थी। ‘बाला’ हमारी रीयूनियन फिल्म है। वैसे बहुत ज्यादा फायदा नहीं हुआ ‘उरी’ से। वो फिल्म पूरी तरह से विकी (कौशल) की फिल्म थी। फिल्म में मेरे किरदार की बहुत सराहना हुई इसकी मुझे बहुत खुशी है।

जन्म तारीख – २८ नवंबर, १९८८
जन्मस्थान – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
कद – ५ फुट ३ इंच वजन – ५० किग्रा
प्रिय परिधान – कफ्तान, जीन्स-टी शर्ट
पसंदीदा भोजन – पहाड़ी थाली, ग्रीन वेजिटेबल्स
प्रिय पेय – ग्रीन टी, वैâफेचिनो
ऑल टाइम फेवरेट फिल्म –
स्टीवन स्पीलबर्ग की सभी फिल्में
मनपसंद हॉलिडे डेस्टिनेशन –
मसूरी, रानीखेत, लंदन