" /> योगी को भाया…ममता का ‘विकास’!

योगी को भाया…ममता का ‘विकास’!

एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार में उत्तर प्रदेश सरकार का छपा एक विज्ञापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के गले की हड्डी बन गया है। ‘ट्रांसफॉर्मिंग उत्तर प्रदेश अंडर योगी आदित्यनाथ’ शीर्षक से विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। विज्ञापन न सिर्फ योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के लिए मुसीबत बन गया है बल्कि ‘उस’ अखबार की छवि को भी इस विज्ञापन से आघात पहुंचा है। मीडिया के अनुसार विज्ञापन में उत्तर प्रदेश की तस्वीर छापने की बजाय पश्चिम बंगाल के कोलकाता की तस्वीर छाप दी गई है। विज्ञापन में दिखाया गया चित्र मां फ्लाईओवर का है, जिसका निर्माण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कराया है। विज्ञापन में कोलकाता शहर की पीली टैक्सी भी दौड़ती दिख रही हैं। वहां का एक मशहूर होटल भी दिखाई दे रहा है। विज्ञापन की सच्चाई जानने के बाद विपक्ष योगी सरकार पर पिल पड़ा है क्योंकि सामने उत्तर प्रदेश का चुनाव है। राजनैतिक लिहाज से बड़ा राज्य होने के कारण सभी दलों की निगाहें इस पर हैं। लिहाजा विज्ञापन को लेकर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, टीएमसी सीधे मुख्यमंत्री योगी पर हमला बोल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए विपक्ष ने कहा है कि विकास के नाम पर उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं है। लिहाजा अपनी नाक बचाने के लिए सरकार ने झूठा विज्ञापन प्रकाशित किया है। राज्य विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए करो और मरो की स्थिति बन गया है। कोविड की दूसरी लहर में राज्य में काफी मौतें हुर्इं थीं। लोगों को ऑक्सीजन और दूसरी सुविधाएं नहीं मिल पार्इं। लोग शवों का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए। इसे लेकर विपक्ष सरकार को पहले ही कटघरे में खड़ा कर चुका है, जबकि केंद्र ने साफ कह दिया था कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई है। विज्ञापन विवाद पर विपक्ष का आरोप है कि दूसरे राज्यों के विकास मॉडल को चुराकर योगी सरकार अपना बताने पर तुली है। राज्य में डेंगू कहर बरपा रहा है। कई जिलों में स्थिति भयावह है। सरकार विज्ञापनों में अपनी छवि को सुधारना चाहती है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने विज्ञापन विवाद पर योगी को जमकर कोसा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार यूपी में फेल हो गई है और दूसरे राज्यों के विकास मॉडल को चुराकर अपना बता रही है। भाजपा से टीएमसी में घर वापसी करनेवाले मुकुल राय ने आरोप लगाते हुए कहा है ‘ट्रांसफॉर्मिंग यूपी का मतलब’ तस्वीरें चुराना है। उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के झूठ की पोल फिर खुल गई है। जमीन पर कुछ नहीं दिख रहा है जनता के पैसे को विज्ञापन में लगाया जा रहा है। दूसरे राज्य की तस्वीर चुराकर अपना बताया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि ऐसा विकास आपने देखा होगा न सुना होगा। कोलकाता के विकास को हमारे मुख्यमंत्री खींचकर यूपी में लाए हैं। एक भूल को विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने लिखा है कि सरकार अपनी नीयत बदले या एड. एजेंसी।

विज्ञापन को लेकर लोग जहां सरकार की चुटकी ले रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर विदेश की तस्वीरें डाल कर लिख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश बदल रहा है। लोग बता रहे हैं कि देखिए हमारा गांव कितना बदल गया है। सरकार की खूब चुटकी ली जा रही है। विज्ञापन को लेकर चौतरफा हमले से घिरी सरकार मुंह छुपा रही है उसके पास कोई जवाब नहीं है। वैसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और योगी में राजनीतिक लिहाज से छत्तीस का आंकड़ा है। बंगाल में संपन्न हुए चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विजय हासिल कर मोदी एंड शाह टीम को धूल चटाई है लेकिन कोलकाता में दीदी का विकास मॉडल योगी बाबा को वैâसे भा गया, यह समझ में नहीं आ रहा। यह कैसा खेला होबै है।
सोशल मीडिया यूजर्स इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर पर विदेशी तस्वीरें लगाकर सरकार के विकास मॉडल को ट्रोल कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की पोस्ट पर काफी कमेंट आ रहे हैं। सरकार के बचाव में भाजपा ने कई तर्क दिए हैं। सवाल उठता है इस विज्ञापन को लेकर कहां गलती हुई। सरकार की सहमति से यह सब खेल हुआ या फिर ‘उस’ अखबार के विज्ञापन विभाग की तरफ से विज्ञापन को सरकार को बताए बिना छाप दिया गया? क्या यह हो सकता है कि विज्ञापन का संदेश समाज में सकारात्मक जाए इस वजह से अखबार ने खुद ही इस तरह का विज्ञापन जारी कर दिया हो? या यह हो सकता है कि विज्ञापन फाइनल करने से पूर्व सरकार से अनुमति ही नहीं ली गई हो?
खैर, ‘उस’ अखबार ने माफी भी मांगी है। अखबार की तरफ से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के विज्ञापन में भूल से गलत तस्वीर प्रकाशित हुई है। सभी डिजिटल संस्थान से यह तस्वीर हटा दी गई है। लेकिन सवाल उठता है कि इतनी बड़ी भूल किससे और वैâसे हो सकती है। विज्ञापन सरकार की नीति और योजनाओं से जुड़ा है। अखबार का विज्ञापन विभाग अपने मन से ऐसी तस्वीर नहीं छाप सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार को बगैर बताए उसने ऐसा छापा है तो निश्चित रूप से संस्थान की यह बड़ी भूल है। सवाल उठता है कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, क्या विज्ञापन के लिए प्रदेश में ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ, जिसका उपयोग विज्ञापन में किया जाता। क्या सरकार ने इतने बड़े विज्ञापन के लिए मीडिया हाउस को तस्वीरें उपलब्ध नहीं कराई होंगी? यदि यह मानवीय भूल है तो विपक्ष को बेवजह इस मसले को तूल नहीं देना चाहिए, पर यदि यह सरकार की भूल है तो सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)
(उपरोक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। अखबार इससे सहमत हो यह जरूरी नहीं है।)