" /> यूपी में योगी का चुनावी बजट!… विकास, किसान और नौजवानों के नाम होगी २०२२ की जंग

यूपी में योगी का चुनावी बजट!… विकास, किसान और नौजवानों के नाम होगी २०२२ की जंग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधानसभा में अपनी वर्तमान सरकार का आखिरी पूर्ण बजट पेश करते हुए अगले चुनावों में अपनी रणनीति का खाका पेश कर दिया। समग्र विकास को समर्पित अपने इस बजट में उन्होंने धर्म का तड़का जरूर लगाया है, पर इसके केंद्र में विकास, किसान और नौजवान ही हैं। बजट को गौर से देखने से साफ होता है कि योगी अगली लड़ाई जीतने के लिए किन हथियारों के भरोसे उतरेंगे। खेती-किसानी, महिला, नौजवान सहित स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे सभी अहम् मसलों को कुछ न कुछ देकर और नई योजनाओं का एलान कर उन्होंने अपने विरोधियों की जुबान पर ताला लगाने की पूरी कोशिश की है। राजकोषीय घाटे को लेकर मिली रियायत का भरपूर लाभ उठाते हुए उन्होंने समाज के सभी वर्गों के लिए जमकर खजाना खोला है।
खेती-किसानी और उद्योगों, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, हवाई अड्डों के लिए खासे आवंटन के साथ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सोमवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष २०२१-२२ का सालाना बजट पेश किया। वर्तमान सरकार का यह चुनाव से पहले पेश होनेवाला आखिरी पूर्ण बजट था और इसमें विकास की योजनाओं से लेकर किसानों, युवाओं व धार्मिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। अकेले एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए इस बार के बजट में ११,१४८ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बार के बजट में भी प्रदेश सरकार ने धार्मिक एजेंडे को धार देते हुए अयोध्या और वाराणसी के लिए १००-१०० करोड़ रुपए तो विंध्याचल व नैमिषारण्य के लिए ३० करोड़ रुपए का आवंटन किया है। चित्रकूट में पर्यटन विकास की विभिन्न परियोजनाओं के लिए ३० करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं के लिए १,१७५ करोड़ रुपए तो जेवर हवाईअड्डे के लिए २,००० करोड़ रुपए और अयोध्या के श्रीराम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए १०१ करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। कोविड टीकाकरण अभियान के लिए बजट में ५० करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार का बजट इस बार ५.५० लाख करोड़ रुपए का है जो कि पिछले बजट के ५.१२ लाख करोड़ रुपए से करीब सात फीसदी से ज्यादा है। बजट में नई योजनाओं के लिए २७,५९८ करोड़ रुपए नई योजनाओं के लिए आवंटित किया गया है। वित्तीय वर्ष २०२१-२२ के लिए राजकोषीय घाटा ९०,७२९ करोड़ रुपए अनुमानित है जो कि राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद का ४.१७ फीसदी है। पिछले बजट में यह २.९७ फीसदी था। राज्य की ऋणग्रस्तता सकल घरेलू उत्पाद का २८.१ फीसदी अनुमानित है।
विधानसभा में सोमवार को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने एलान किया कि प्रदेश में निष्प्रयोज्य पड़ी सरकारी संपत्तियों पर उद्योग लगाए जाएंगे और इसके लिए निजी क्षेत्र का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए हवाई अड्डों के विकास के साथ सड़कों, पुलों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बजट में भारी भरकम आवंटन किया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जल्दी ही शुरू की गई कोचिंग की अभ्युदय योजना के छात्रों को टैबलेट दिए जाने का एलान किया गया है। निष्प्रयोज्य संपत्तियों को लाभकारी बनाने के लिए बजट में बंद पड़ी सरकारी कताई मिलों की खाली पड़ी जमीन पर निजी सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) के आधार पर औद्योगिक पार्क बनाने का एलान करते हुए सालाना बजट में इसके लिए १०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के २३ सरकारी बस स्टेशनों का विकास भी पीपीपी मोड में किया जाएगा। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) के लिए इस बार भी २५० करोड़ रुपए का प्रावधान है जबकि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए १०० करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। गांवों में पाइप से पेयजल पहुंचानेवाले जल जीवन मिशन के लिए १५,००० करोड़ रुपए के भारी भरकम बजट का आवंटन किया गया है, वहीं शहरी क्षेत्र के लिए २००० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बजट में मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना बीमा के लिए ६०० करोड़ रुपए, मुफ्त पानी की सुविधा के लिए ७०० करोड़ रुपए और रियायती दरों पर फसली कर्ज के लिए ४०० करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।
इस बार प्रदेश के सालाना बजट का आकार ५,५०,२७०.७८ करोड़ रुपए का है, जिसमें २७,५९८ करोड़ रुपए की नई योजनाएं शामिल हैं। बजट में कुल प्राप्तियां ५,०६,१८१.८४ लाख करोड़ रुपए अनुमानित हैं, जिसमें ४.१८ लाख करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्तियां शामिल हैं। कर राजस्व की प्राप्ति का अनुमान ३.०५ लाख करोड़ रुपए का है, जिसमें केंद्रीय करों की हिस्सेदारी १.१९ लाख करोड़ रुपए की अनुमानित है। जीएसटी एवं वैट से मिलनेवाले राजस्व का लक्ष्य १.०४ लाख करोड़ रुपए रखा गया है जबकि आबकारी शुल्क से राजस्व संग्रह का लक्ष्य ४१,५०० करोड़ रुपए रखा गया है। स्टैंप व पंजीकरण शुल्क से राजस्व संग्रह का लक्ष्य २५,५०० करोड़ रुपए रखा गया है।
अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर एक बार फिर से जोर देते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के १,१०७ करोड़ रुपए, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए १,४९२ करोड़ रुपए और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए ८६० करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस-वे में जमीन अधिग्रहण के लिए सालाना बजट में ७,२०० करोड़ रुपए की धनराशि का आवंटन किया गया है जबकि निर्माण कार्यों के लिए ४८९ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। एक्सप्रेस-वे से इतर लोकनिर्माण विभाग के अधीन सड़कों पर पुलों के निर्माण के लिए सालाना बजट में १२,४४१ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। सड़कों व पुलों की मरमत के लिए बजट में ४,१३५ करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं जबकि रेलवे ओवरब्रिजों के निर्माण के लिए १,१९२ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।
सालाना बजट में यमुना एक्सप्रेस-वे में जेवर एयरपोर्ट के पास इलेक्ट्रॉनिक सिटी व बुंदेलखंड के रक्षा गलियारे में डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक मैन्युपैâक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना का एलान किया गया है। राजधानी लखनऊ में नादरगंज में एयरपोर्ट के सामने ४० एकड़ जमीन पर पीपीपी माडल पर सूचना प्रौद्योगिकी सेंटर बनाया जाएगा। पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए १,३७५ करोड़ रुपए छात्रवृत्ति के लिए, लड़कियों की शादी के लिए १५० करोड़ रुपए, अल्पसंख्यक छात्रों के लिए ८२९ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मदरसा आधुनिकीकरण परियोजना के लिए बजट में ४७९ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है तो दिव्यांगजन पेंशन के लिए ७२० करोड़ रुपए का प्रावधान है। प्रदेश में बन रहे नौ मेडिकल कॉलेजों का काम पूरा करने के लिए १,९५० करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। वृद्धावस्था व किसान पेंशन के लिए ३,१०० करोड़ रुपए का खर्च प्रस्तावित है। दो लाख मछुआरों को बिना प्रीमियम दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाएगा। कन्या सुमंगला योजना के लिए १,२०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के क्रियान्वयन में देश में पहले स्थान पर काबिज प्रदेश ने सालाना बजट में इसके लिए १०,०२९ करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जबकि शहरों के विकास के लिए अमृत योजना को २,२०० करोड़ रुपए दिए गए हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए भी २,००० करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। कानपुर मेट्रो के लिए ५९७ करोड़ रुपए, आगरा मेट्रो को ४७८ करोड़ रुपए जबकि वाराणसी व गोरखपुर के लिए १०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सिंचाई की विभिन्न परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बजट में ३,०९८ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर विपरीत हालात और बीते साल राजस्व में कमी के बाद भी जोखिम उठाते हुए योगी ने किसी को निराश नहीं किया है और आनेवाले विधानसभा चुनाव का एजेंडा सेट कर दिया है।
(लेखक उत्तर प्रदेश अधिस्वीकृत पत्रकार संघ के अध्यक्ष हैं। उत्तरप्रदेश की राजनीति के जानकार और स्तंभकार हैं।)