मुख्यपृष्ठधर्म विशेषअंगारकी संकष्ट चतुर्थी आज, मंत्र से प्रसन्न होते हैं श्रीगणेश!

अंगारकी संकष्ट चतुर्थी आज, मंत्र से प्रसन्न होते हैं श्रीगणेश!

सनातन हिंदू धर्म में व्रत और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। भगवान श्रीगणेश तो प्रथम पूज्य हैं, विघ्नहर्ता हैं। वे पूजा के दौरान पढ़े जानेवाले मंत्र से अति प्रसन्न होते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। बता दें कि हर माह दो चतुर्थी पड़ती हैं पहली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जिसे संकष्टी गणेश चतुर्थी कहते हैं वहीं दूसरी शुक्ल पक्ष की संकष्टी जिसे विनायकी गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है और जब यही चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है तो इसे अंगारक या अंगारकी गणेश संकष्ट चतुर्थी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार वैशाख के कृष्ण पक्ष में पड़नेवाली चतुर्थी का काफी अधिक महत्व होता है। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है। इस बार संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत १९ अप्रैल यानी आज मंगलवार को रखा जाएगा।
शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ- १९ अप्रैल मंगलवार को शाम ०४ बजकर ३८ मिनट
चतुर्थी तिथि समाप्त- २० अप्रैल बुधवार को दोपहर ०१ बजकर ५४ मिनट तक
चंद्रोदय का समय- ०९ बजकर ५० मिनट पर
अभिजीत मुहूर्त- सुबह ११ बजकर ५४ मिनट से दोपहर १२ बजकर ४६ मिनट तक।
१९ अप्रैल को उदया तिथि होने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा।
पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। आप चाहें तो लाल रंग के कपड़े पहन सकते हैं। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा आरंभ करें। इसके लिए एक चौकी में लाल रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर लें। इसके बाद सबसे पहले फूल की मदद से जल अर्पित कर शुद्धिकरण कर लें। इसके बाद भगवान को फूल और माला चढ़ाएं। तत्पश्चात दूर्वा चढ़ा दें और फिर रोली लगा दें। इसके बाद भगवान को भोग में लड्डू या फिर मोदक खिलाएं और थोड़ा-सा जल अर्पित कर दें। बाद में घी का दीपक, धूप जलाकर गणेश चालीसा का पाठ करें और इसके बाद इस मंत्र का जाप करें-
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारु भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।
अंत में विधिवत तरीके से आरती कर लें। आरती करने के बाद दिनभर बिना अनाज ग्रहण किए व्रत रखें। शाम के समय चांद निकलने से पहले आप विधिवत तरीके से पुन: श्री गणेश जी की पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें। पूजा पूर्ण होने के साथ प्रसाद सभी के बीच बांट दें। गणपति की कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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