मुख्यपृष्ठस्तंभअंदर की बात : राहुल के पक्ष में गहलोत

अंदर की बात : राहुल के पक्ष में गहलोत

रमेश सर्राफ धमोरा / झुंझुनू। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर दिल्ली में अपनी धमक दिखा दी है। हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री गहलोत ने कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे की काट करते हुए राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग कर डाली। अशोक गहलोत के राहुल गांधी के समर्थन में खड़े होने से कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े जी-२३ के नेताओं ने कार्यसमिति में ज्यादा कुछ नहीं बोला। अशोक गहलोत ने दिल्ली में खुलकर बयान दिया कि हार पर पार्टी मनन करेगी और भविष्य में उन्हें दूर कर मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी। कपिल सिब्बल ने गांधी परिवार के नेतृत्व पर सवाल उठाए तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें करारा जवाब दिया है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस में आने के बाद भी कांग्रेस की संस्कार-संस्कृति नहीं समझते हैं। पार्टी ने उन्हें केंद्रीय मंत्री, पार्टी का प्रवक्ता बनाया। अब जबकि पार्टी का बुरा दौर चल रहा है तो उनके मुंह से ऐसे अल्फाज निकलना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उनको कांग्रेस की एबीसीडी भी पता नहीं है। वो पता नहीं क्यों कांग्रेस का इतिहास भूल जाते हैं?
राजस्थान पर ‘आप’ की नजर
पंजाब विधानसभा चुनावों में अपनी शानदार जीत से उत्साहित आम आदमी पार्टी (आप) अब राजस्थान पर राज करने का प्लान बना रही है। इसके लिए अरविंद केजरीवाल की टीम जुट गई है। अगले साल होनेवाले चुनाव से पहले ‘आप’ ने राज्य में संगठन को मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। और अब जयपुर में २६-२७ मार्च को दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। इसमें पार्टी के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे। ‘आप’ के राज्य सह प्रभारी खेमचंद जागीरदार ने बताया कि पार्टी ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी है। राजस्थान पंजाब का पड़ोसी राज्य है और दिल्ली के भी करीब है। इसलिए राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी २६ और २७ मार्च को दो दिवसीय राज्य सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। जागीरदार ने कहा कि राजस्थान में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा जल्द की जाएगी। ‘आप’ ने २०१८ के राजस्थान विधानसभा चुनावों में राज्य की २०० सीटों में से १४२ पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। उसके एक भी उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली और उसे कुल मिलाकर ०.४ प्रतिशत वोट मिले।
नहीं चलेंगे पुराने वाहन
राजस्थान के प्रमुख शहरों से प्रदूषण कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के ५ शहरों में ३१ मार्च के बाद १५ साल से पुराने कमर्शियल वाहनों का संचालन नहीं किया जा सकेगा। डीजल चलित १५ साल पुराने कमर्शियल वाहन के संचालन की मियाद ३१ मार्च को खत्म हो जाएगी। इसके बाद न फिटनेस प्रमाण पत्र और न ही परमिट जारी किए जाएंगे। राज्य सरकार ने इससे पहले पुराने कमर्शियल वाहनों की संचालन तिथि को बढ़ाया था। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अब पुराने कमर्शियल वाहनों के संचालन की मियाद नहीं बढ़ाई जाएगी। शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण को कम करने के लिए सालभर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने डीजल से संचालित होनेवाले १५ साल पुराने कमर्शियल वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी थी। अब प्रदेश में भी जयपुर, अलवर, उदयपुर, कोटा और जोधपुर शहरी क्षेत्रों में भी १५ साल पुराने कॉमर्शियल वाहनों के संचालन पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। लोगों की सुविधाओं को देखते हुए अवधि ३१ मार्च, २०२२ तक बढ़ाई गई थी।
गांववालों का रेलवे स्टेशन
राजस्थान के नागौर जिले का जालसू नानक हॉल्ट रेलवे स्टेशन देश का एक खास रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन रेलवे द्वारा नहीं बल्कि ग्रामीणों द्वारा चलाया जाता है। ग्रामीण टिकट बेचते हैं, स्टेशन चलाते हैं और इसके रखरखाव में भी लगे रहते हैं। इतना ही नहीं, जालसू नानक हाल्ट स्टेशन से रेलवे को हर महीने करीब ३० हजार रुपए तक की आमदनी हो जाती है। दरअसल, २००५ में रेवेन्यू कम होने की वजह से इसे बंद करने का पैâसला किया था, जिसका ग्रामीणों ने विरोध कर ११ दिनों तक धरना दिया। तब रेलवे ने स्टेशन को दोबारा शुरू करने के लिए शर्त रखी कि इसे ग्रामीणों को चलाना होगा। हर महीने १,५०० टिकट बेचने होंगे। ग्रामीणों ने रेलवे की शर्त मान ली। अब रेलवे को इस स्टेशन से हर माह ३० हजार रुपए की आमदनी भी हो रही है। नागौर जिले का जालसू नानक हाल्ट एक फौजियों का गांव है। इस गांव में हर दूसरे घर में एक सैनिक है। इस गांव के २०० से ज्यादा लोग सेना व अर्द्धसैनिक बलों में हैं, जबकि २०० से ज्यादा रिटायर हैं। करीब ४५ साल पहले इस हॉल्ट स्टेशन को फौजियों और उनके परिवारों के लिए शुरू किया गया था।

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