मुख्यपृष्ठखबरें‘अब मेरे हिस्से में नफरत होगी!’-पारुल चौहान

‘अब मेरे हिस्से में नफरत होगी!’-पारुल चौहान

हिंदुस्थान में पौराणिक कहानियों को देखनेवाला एक बहुत बड़ा दर्शक वर्ग है। दर्शकों ने ‘रामायण’ शो को पहली बार जितने चाव से देखा आगे चलकर उन्होंने ‘महाभारत’ को भी उसी प्यार से देखा। आज भी धार्मिक और पौराणिक शोज चाव से देखे जाते हैं, जबकि ओटीटी प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता भी शिखर पर है। इस समय सोनी सब चैनल पर ‘धर्मयोद्धा गरुड़’ के प्रति लोगों में बेहद उत्सुकता है। इस शो में जानी-मानी अभिनेत्री पारुल चौहान ने निगेटिव किरदार निभाया है। पेश है, पारुल चौहान से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
 शो ‘धर्मयोद्धा गरुड़’ के लिए निगेटिव किरदार करने की क्या वजह रही?
अपनी कम बैक के लिए मैं एक अलग शो के साथ ही अलग किरदार की तलाश में थी। मैंने रोना-धोना बहुत कर लिया। मेरे द्वारा निभाए किरदारों के साथ बहू और बेटियां जरूर रिलेट हुर्इं। इसमें कोई दो राय नहीं कि मैं हर परिवार की प्रिय बहू, बेटी और पत्नी बनी। लेकिन हर कलाकार अपने ढर्रे से कुछ अलग करना चाहता है और जब ‘धर्मयोद्धा गरुड़’ में मुझे निगेटिव किरदार ऑफर हुआ, तो मैंने सोच-समझकर इसे करना स्वीकार कर लिया। इस किरदार को मैंने बड़ी शिद्दत से निभाया है। लोग जब मुझे देखेंगे तो मुझसे नफरत किए बिना नहीं रहेंगे। इससे पहले मुझे जितना प्यार मिला उससे कहीं ज्यादा अब मेरे हिस्से में नफरत होगी।
 इस निगेटिव किरदार के लिए आपने किस तरह का होमवर्क किया?
मैं गरुड़ की मौसी हूं और मेरा नाम कद्रू है। कद्रू और गरुड़ की मां विनता बहनें हैं। कद्रू अपनी ही बहन (विनता) को बंदी बनाकर रखती है और विनता के साथ ही गरुड़ पर अत्याचारों का कहर ढाती है। गरुड़ अपनी मां का बचाव करने का प्रयास करते हैं। खैर, इस शो के संवाद बहुत साहित्यिक मूल्यों वाली हिंदी है। मेरी हिंदी और संस्कृत भाषा पर अच्छी पकड़ है और मैं हिंदी की टॉपर रही हूं इसीलिए मुझे कोई मुश्किल नहीं हो रही। हां, मुझे धूर्त और दुष्ट दिखने में बहुत ज्यादा मुश्किल हो रही है। अपनी सकारात्मक इमेज को तोड़ना मेरे लिए इतना आसान नहीं है। इसके लिए मुझे शारीरिक के साथ मानसिक तैयारी करनी पड़ी।
 आदर्श बहू को ऑडियंस अब खलनायिका के रूप में देखेंगे। क्या इससे आपकी इमेज को नुकसान नहीं पहुंचेगा?
शाहरुख खान मेरे आदर्श हैं। अपने स्ट्रगलिंग के दौर में मैं हमेशा शाहरुख के इंटरव्यूज और उनके कोटस सुना करती थी। हमेशा से ही उनका मुझ पर बहुत प्रभाव रहा है। अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही एक्सपेरिमेंट करते हुए उन्होंने ‘बाजीगर’, ‘डर’, ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में विलेन बनना स्वीकार किया। यह उनके करियर के लिए रिस्क भी हो सकता है, ऐसा उन्होंने सोचा नहीं। १६-१७ वर्षों तक पॉजिटिव रोल निभाने और इतना काम करने के बाद मुझे डरने की क्या आवश्यकता है? बल्कि यह तो बड़ी चुनौती है, जो मुझे स्वीकार है।
 आपके जीवन में सशक्त स्त्री कौन है?
मेरी मां और मेरी सासू मां। मेरे श्यामल वर्ण को लेकर पड़ोस के साथ ही रिश्तेदार भी मेरी मां को बहुत भला-बुरा बोलते थे। इस अकेली स्त्री ने समाज के तानों को झेलते हुए मुझे पढ़ाने-लिखाने के साथ ही एक ऐसे क्षेत्र में जाने की आजादी दी जहां अक्सर अच्छे व्यक्तिमत्व को सराहा जाता है। अत: मेरे लिए मेरी मां वंदनीय हैं। हां, मेरी सासू मां ने पूरे परिवार को ऐसे बांधकर रखा है कि मैं क्या कहूं? शादी के बाद सभी जिम्मेदारियों को उन्होंने खुद संभाला और मुझे अपना करियर बनाने की पूरी आजादी दी।
 १७ वर्षों तक अभिनय करने के बाद आपने ब्रेक क्यों लिया?
मैं लगातार काम किए जा रही थी। २०१८ में चिराग ठक्कर से शादी के बाद मैंने दो वर्ष अपनी शादीशुदा जिंदगी को दिए। हर लड़की को नए परिवार के साथ एडजस्ट करने में वक्त लगता है इसीलिए मेरा दो वर्षों का ब्रेक लेना सही निर्णय था। २०२०-२१ में हम सभी ने महामारी का सामना किया। हम सभी के लिए यह मुश्किल दौर था। जैसे चीजें नॉर्मल हुई मैंने इस शो को स्वीकार किया।

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