आ गई ब्रेन एस्ट्रोलॉजी, डॉक्टर बताएंगे आपके बच्चे का प्रोफेशन

अब पूत के पांव पालने में नहीं बल्कि डॉक्टरों की प्रयोगशाला में उन्नति की गति बताएंगे। डॉक्टर ४डी तकनीक के जरिए बच्चे की टेस्टिंग करेंगे और बताएंगे कि आपके बच्चे का प्रोफेशन क्या होना चाहिये? वैसे इस काम के लिए जो पारंपरिक तरीका है वह है समुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान का, जिसके जरिये लोग अब तक अपने बच्चे का भविष्य जानने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन अब ब्रेन एस्ट्रोलॉजी सौ प्रतिशत प्रामाणिकता के साथ बताएगा बच्चे का भविष्य।
४डी तकनीक पर शोध करनेवाले डॉ.आलोक मिश्रा ने बताया कि इस तकनीक के तहत बच्चे के पांच साल की उम्र होने पर उसका टेस्ट किया जाता है, जिसमें जेनेटिक, बायोलॉजिकल, न्यूरोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल टेस्ट किए जाते हैं।
यह जांच बच्चे के स्वभाव और क्षमताओं के अनुसार पालन-पोषण के तरीके, शिक्षा में उसकी रुचि के संकाय निर्धारण, करियर की दिशा समझना और योग्यता के अनुसार सही जगह पर कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने की जानकारी देता है।
डॉ. आलोक मिश्रा ने बताया कि प्रतिस्पर्धा के दौर में हर माता-पिता की अपेक्षाएं होती हैं कि उनकी संतान जीवन में उपलब्धियां हासिल करे लेकिन उपलब्धियों की राह तय कर दशा सुधारने के लिए दिशा सही करनी भी जरूरी है। इसका काम उनका ब्रेन बिहेवियर रिसर्च फाउंडेशन कर रहा है, जिससे परिवार, समाज, देश की उन्नति के लिए योग्य व्यक्ति योग्य जगहों पर पहुंच सकें और हर बच्चे का उसकी मानसिक क्षमता, रुचि के अनुसार विकास हो और वह सफल हो सके।
मशीन पढ़ रही है जीन और दिमाग
४डी मैिंपग में जेनेटिक टेस्ट के तहत डीएनए मैिंपग की जाती है और शख्स की अनुवांशिक क्षमताओं को जाना जाता है जबकि न्यूरोलॉजिकल मैंपिंग के तहत ईईजी (एलेक्ट्रोएंसेफालोग्राम) तकनीक से ब्रेन डाइमेंशन रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे ब्रेन वेव्स, तरंगों, का अध्ययन होता है और आंतरिक क्षमताओं की जानकारी मिलती है।
इसी तरह बायोलॉजिकल मैपिंग के तहत हाथ की लकीरों, उसके शिखरों, शारीरिक लक्षणों का अध्ययन करके सीखने की क्षमताओं, गुणों की पहचान और संवेदनशीलता का अध्ययन किया जाता है जबकि चौथा और अंतिम टेस्ट साइकोलॉजिकल मैपिंग है जिसके अंतर्गत परिवार, शिक्षा, पेशा, अनुभव आदि के बारे में जानकारियां ली जाती हैं। इसके बाद इन सभी के आधार पर एक ब्रेनोस्कोप बनाया जाता है। इस जानकारी का फायदा है कि इससे किसी की क्षमताओं, उसके विकास के क्षेत्र, मानसिक अक्षमताओं के कारण जानकर उसमें सुधार की गुंजाइश सुझाई जाती है। अब तक लगभग २ हजार बच्चों की जांच डॉ. आलोक मिश्रा का ब्रेन बिहेवियर रिसर्च फाउंडेशन कर चुका है, जिसकी रिपोर्ट को उनके परिजनों को बताकर योग्य मार्गदर्शन किया गया है।