इश्क

सोचते हैं मोहब्बत कर लें
आखिर आग लगती है वैâसे
इश्क में जलकर जरा देख लें
यूं दिल्लगी के किस्से सुन-सुनकर अब दिल मचल गया है
मौत के इस खेल को आजमाएं अब जुनून चढ़ रहा है
कहते हैं जिंदा डूबा दे, ऐसा दरिया है इश्क
दोतरफा हो तो जन्नत है
एकतरफा हो तो खुदाई
डूब गए तो जश्न है
टूट गए तो रिहाई है
जिंदा रहे तो नगमा है
मर गए तो कहानी है
कहीं राधा का इंतजार तो कहीं मीरा की भक्ति है
कहीं पाने का जुनून तो कहीं खोने का नाम है इश्क
कहीं मरने की तलब तो कहीं जीने का बयान है इश्क
ऐसे इस मोहब्बत की मैं क्या बात कहूं?
डर है खोने का
और खुद को खोना ही है इश्क
गर मिल गए दिल तो शिव का मिलन शक्ति से जैसे
गर न मिले तो जीवन मीरा की भक्ति है जैसे
अनेक रंगों का गुलिस्तान है इश्क
फिर भी इसका रंग सफेद है
जिस रंग में चाहो
उसी रंग में ढले उसी रंग में मिले ये इश्क।
-अंकिता, मुंबई

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