मुख्यपृष्ठखबरेंईडी बन गई है भाजपा की एटीएम मशीन!

ईडी बन गई है भाजपा की एटीएम मशीन!

शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने खोला ईडी के अधिकारियों और एजेंट्स का एक्सटॉर्शन रैकेट

एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट यानी ईडी को लेकर कल शिवसेना नेता, सांसद एवं दैनिक सामना के कार्यकारी संपादक संजय राऊत ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। शिवसेना भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने सबूतों के साथ ईडी के कुछ अधिकारियों और एजेंट्स के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा ही खोल दिया और कहा कि ईडी भाजपा की एटीएम मशीन बन गई है। संजय राऊत ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति को ईडी के इस मेगा घोटाले की लिखित जानकारी दी थी। कल पत्रकारों के साथ वही जानकारी साझा करते हुए संजय राऊत ने कहा कि ये तो अभी मात्र १० प्रतिशत जानकारी है। जल्द ही मैं ईडी के भ्रष्ट अधिकारियों के नामों के साथ कई और सनसनीखेज खुलासे करनेवाला हूं और बतानेवाला हूं कि इस पूरे नेक्सस के पीछे भाजपा के केंद्र और महाराष्ट्र के कौन-कौन नेता हैं और किसके इशारे पर ये सारा खेल चल रहा है।
महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के चुनिंदा लोगों पर चल रहे छापों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई मनपा चुनाव को ध्यान में रखते हुए शिवसेना पदाधिकारियों पर आईटी के छापे पड़ रहे हैं। यह पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश है, पर ऐसा करके भी वे हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकेंगे। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट यानी ईडी की ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉर्शन रैकेट पर कल शिवसेना नेता संजय राऊत ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि जांच के नाम पर वैâसे ब्लैकमेलिंग करनेवाले ईडी के अधिकारियों और किरीट सोमैया जैसे कुछ दलालों के काले कारनामे चल रहे हैं। संजय राऊत ने खुलासा करते हुए बताया कि ईडी के दलालों के एक नेटवर्क ने मुंबई के १०० से अधिक बड़े बिल्डर्स, डेवलपर्स और कॉरपोरेट्स से एक्सटॉर्शन कर करोड़ों रुपए की वसूली की है।
उन्होंने बताया कि ईडी के अधिकारियों ने जिन-जिन कंपनियों की जांच शुरू की, उन कंपनियों के खाते से ईडी अधिकारियों के एक्सटॉर्शन रैकेट के की-पैâक्टर जितेंद्र चंद्रलाल नवलानी और उसकी ७ अलग-अलग कंपनियों में करोड़ों रुपया आया। उसका सारा ब्यौरा, पैन नंबर और कंपनियों के नामों सहित संबंधित सभी दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड के पूरे डिटेल्स उन्होंने पत्रकारों को दिए। उन्होंने बताया कि मुझे ईडी के काले कारनामों के इतने सबूत मिले हैं कि आप लोग सुनकर हैरान हो जाओगे। आपको पता चलेगा कि वैâसे ईडी के अधिकारियों ने किरीट सोमैया जैसे कुछ दलालों का उपयोग करके सैकड़ों करोड़ रुपए की जबरन वसूली की है और एडमिनिस्ट्रेशन आंखें बंद करके बैठा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि बिल्डर्स, डेवलपर्स और कॉर्पोरेट से वसूली सैकड़ों करोड़ रुपयों की एक्सटॉर्शन मनी में वैâश भी है और करोड़ों का पेमेंट चेक और डिजिटली ट्रांसफर भी हुआ है। ये पैसा क्यों आया है?… ये पैसा इसलिए आया है, ताकि जांच को धीमा किया जा सके, गिरफ्तारी से बचा जा सके, केस को कमजोर किया जा सके, सेटलमेंट किया जा सके या प्रॉपर्टी अटैचमेंट रोकी जा सके। कई मामलों में जानकारी होने के बाद भी ईडी ने लोगों की प्रॉपर्टी अटैच नहीं की है या इंपोर्टेंट प्रॉपर्टी अटैचमेंट से छोड़ दी है क्योंकि किसी-न-किसी दलाल के जरिए वो लोग ईडी के ऑफिसर्स के संपर्क में आए हैं। ईडी के अधिकारियों की वसूली के कुछ उदाहरण देते हुए उन्होंने खुलासा किया कि २०१७ में जैसे ही ईडी ने दीवान हाउसिंग फाइनांस कॉर्पोरेशन लिमिटेड की जांच शुरू की। अचानक से जितेंद्र चंद्रलाल नवलानी और उसकी ७ कंपनियों के खातों में दीवान हाउसिंग फाइनांस और उससे जुड़ी कंपनियों की ओर से २५ करोड़ रुपए ट्रांसफर हो गए। उसके बाद ३१ मार्च, २०२० तक एस.आर. वाधवान और उसके पिता की ओर से जितेंद्र नवलानी की कंपनियों के खातों में लगभग १५ करोड़ रुपए और रिफ्लेक्ट हुए। इसी तरह अविनाश भोसले और उसके ग्रुप के मामलों में भी जैसे ही ईडी की जांच शुरू हुई, वैसे ही अविनाश भोसले एंड ग्रुप से १० करोड़ रुपए जितेंद्र नवलानी और उसकी ७ कंपनियों में ट्रांसफर करवाए गए। यूनाइटेड फॉस्फोरस के मामले में भी यही हुआ। जैसे ही ईडी की जांच शुरू हुई जितेंद्र नवलानी की ७ कंपनियों में १६ करोड़ रुपए ट्रांसफर हो गए। उन्होंने इस मामले में सनसनीखेज खुलासे करते हुए आगे बताया कि यही गेलॉर्ड कंपनी लिमिटेड के साथ भी हुआ। उनके खिलाफ ईडी की जांच शुरू होते ही १० करोड़ रुपया नवलानी की कंपनी सिक्यूरियो सिस्टम्स में ‘अनसिक्योर्ड लोन’ के रूप में रिफ्लेक्ट हो गया। ईडी की जांच शुरू होने के बाद मोंशेर फायर प्रोटेक्शन सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड ने १५ करोड़ रुपया नवलानी की इसी कंपनी में ट्रांसफर किया। इसी तरह नेरका केमिकल्स की जांच शुरू करके नवलानी की कंपनी के खाते में १० करोड़ और एचडीआईएल से १५ करोड़ रुपए अनसिक्योर्ड लोन के रूप में ट्रांसफर किए गए हैं।
संजय राऊत ने बताया कि ये लिस्ट एंडलेस है और सिर्फ नवलानी की कंपनियों में ही जो अमाउंट ट्रांसफर हुआ है वो इमेजिनेशन के बाहर है। अभी मैंने सिर्फ चेक और बैंक ट्रांसफर के ५९ करोड़ रुपए के डिटेल्स दिए हैं। इसमें वैâश का फीगर नहीं है। नवलानी की कंपनियों में सैकड़ों करोड़ रुपए का पेमेंट कॉर्पोरेट्स और बिल्डर्स से लिया गया है और इन्कम टैक्स रिटर्न्स में ‘कंसल्टेंसी फीस’ और ‘अनसिक्योर्ड लोन्स’ के रूप में दिखाया गया है।
उन्होंने मीडिया के सामने सवाल रखते हुए कहा कि यहां सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह उठता है कि दीवान हाउसिंग, राणा कपूर, ओमकार बिल्डर्स और एचडीआईएल लिमिटेड जैसी कंपनियां जो पब्लिक सेक्टर बैंकों का लोन तक नहीं चुका पा रही हैं वो जितेंद्र नवलानी और उसकी कंपनियों को अनसिक्योर्ड लोन्स दे रही हैं। इनमें से एक भी कंपनी ने इस अनसिक्योर्ड लोन्स का एक भी पैसा नवलानी से वापस नहीं लिया है। नवलानी की कंपनियों में ‘कंसल्टेंसी फीस’ आई है? क्या कंसल्टेंसी करता है नवलानी? मि. नवलानी के पास कोई एज्युकेशनल क्वालीफिकेशन नहीं है। कॉर्पोरेट्स को देने के लिए कोई स्किल नहीं है। इसका कोई ऑफिस नहीं है, कोई स्टाफ नहीं है। फिर भी ये सैकड़ों करोड़ रुपया कंसल्टेंसी फीस और अनसिक्योर्ड लोन्स के रूप में जमा कर रहा है। किस काम के लिए ये पैसा जमा कर रहा है? इसका जवाब एकदम आसान है। ये पैसा ईडी के ऑफिसर्स के लिए जमा हो रहा है, जिन्होंने बड़े बिल्डर्स और कॉर्पोरेट्स को अपने एक्सटॉर्शन रैकेट में फंसा रखा है। इससे इंडिया और बाहर के देशों में प्रॉपर्टी खरीदी जा रही है। इसके कुछ डिटेल्स भी मैंने प्रधानमंत्री जी को दिए हैं और उनसे इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की है। आनेवाले समय में मैं और भी जानकारी सामने रखूंगा।
इस रैकेट से किरीट सोमैया वैâसे जुड़ा है, संजय राऊत ने इसकी जानकारी भी दी और बताया कि अभी मेरी जांच जारी है। मेरे पास और बड़े-बड़े सबूत भी आनेवाले हैं। नवलानी इस तालाब की सिर्फ एक मछली है। ये तो सिर्फ झांकी है, अभी तो ईडी ऑफिसर्स की पूरी फिल्म बाकी है।

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