मुख्यपृष्ठखबरेंएमबीएमसी की अनोखी पहल...पक्षियों के लिए बनाएगी नकली घोंसले

एमबीएमसी की अनोखी पहल…पक्षियों के लिए बनाएगी नकली घोंसले

विनोद मिश्र / भायंदर
मीरा-भायंदर शहर में पक्षियों की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर नकली घोंसलों के निर्माण की संकल्पना साकार करने की दिशा में मनपा महत्वपूर्ण पहल में जुटी हुई है। इन नकली घोंसलों में पक्षियों के लिए भोजन और पानी (बर्ड फीडर) दोनों उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे पक्षियों और तितलियों की विलुप्त हो रही प्रजातियों के संवर्धन हो सके और शहर में प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
भौगोलिक दृष्टि से मीरा-भायंदर शहर तीन तरफ से समुद्री खाड़ी और एक तरफ संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों से घिरा हुआ है, जिससे शहर में पहले बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के जानवरों और पक्षियों की मौजूदगी दिखाई देती थी। मुंबई से सटे होने के कारण मीरा-भायंदर शहर में भी विगत दो दशकों में तेजी से विकास शुरू हुआ। धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई और शहरीकरण के कारण कई पक्षियों और तितलियों की प्रजातियां विलुप्त होने लगीं, इसलिए मनपा द्वारा इनके संवर्धन और इनकी संख्या बढ़ाकर शहर का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
इसमें मनपा प्रशासन ने शहर में वनों की कटाई को कम कर शहर को गार्डन सिटी बनाने का पैâसला लिया है। हाल ही में प्रस्तुत प्रशासनिक बजट में इसके लिए प्रावधान किया गया है। वर्तमान में शहर में कुल ७२ उद्यान विकसित किए गए हैं और प्रत्येक उद्यान को एक विशेष महत्व और पहचान दिया जा रहा है। साथ ही उद्यान के वृक्षों पर नकली घोंसले लगाए जाएंगे और इन घोंसलों में भोजन और पानी (बर्ड फीडर) भी उपलब्ध कराया जाएगा, इससे पक्षियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस संबंध में मनपा आयुक्त दिलीप ढोले का कहना है कि मीरा-भायंदर शहर की पहचान उद्यानों और तालाबों के शहर के रूप में हो तथा शहर की प्राकृतिक संपदा का संवर्धन, पर्यावरण का विकास हो ऐसा मानस है। उद्यानों में अधिक से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का निवास हो, इसके लिए हम प्रयत्नशील हैं।
उद्यान विभाग के उपायुक्त संजय शिंदे ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया कि ‘मौजूदा स्थिति में प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में पक्षी और तितलियां बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शहर के बगीचों में पेड़ों पर कृत्रिम घोंसले बनाए जाएंगे। इन घोंसलों की देख-रेख व पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी बगीचे के कर्मचारियों को दी जाएगी।’

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