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एहसान नहीं लूंगा

एहसान मैं नहीं लूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए
इसी सोच से तू पिछड़ता जा रहा है
कोई पिछड़ा होकर भी उच्च कोटि का होता जा रहा है
कोई उच्च कोटि का होकर भी पिछड़ता जा रहा है
तेरी भी सोच पिछड़ी है
इसलिए तू पिछड़ता जा रहा है
दुनिया में न चाहते हुए भी हमारे ऊपर कई एहसान हैं
एहसान ईश्वर का जिन्होंने ये दुनिया बनाई
और इस दुनिया में हमें मनुष्य बनाया
एहसान उस माता-पिता का जिन्होंने हमें जन्म दिया
एहसान उस भाई-बहन का जिनके साथ हमने अपना बचपन जिया
एहसान उन दोस्तों का जिनसे हमने अपना सुख-दु:ख बांटा
एहसान उन शिक्षकों का जिन्होंने हमें ज्ञान दिया
एहसान समाज के उस हर व्यक्ति का
जिन्होंने हमें सराहा, बुरी नजरों से बचाया, हमारे भले के लिए हमें रोका
एहसान उस हर व्यक्ति का
जिनकी वजह से हमें खाने के लिए भोजन
पहनने के लिए कपड़े और रहने के लिए मकान उपलब्ध है
पर वो कहते हैं-
एहसान मैं नहीं लूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए
एहसान पर ही पूरी दुनिया टिकी है
एहसान लेना बुरी बात नहीं है
एहसान करना भी बुरी बात नहीं है
पर एहसान फरामोश बनना बहुत बुरी बात है
पिछड़ी सोच से तू बाहर निकल
उच्च कोटि का तू बन जा
एहसान कर, एहसान तू ले
बस इतना खयाल रख
न एहसान जता
न कभी एहसान फरामोश बन…!
– रंजय कुमार, मुंबई

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