मुख्यपृष्ठधर्म विशेषकिस्सों का सबक: शिक्षा में अनुभव का महत्व

किस्सों का सबक: शिक्षा में अनुभव का महत्व

दीनदयाल मुरारका। शिक्षा के बारे में प्राय ऐसा कहा जाता है कि जो स्कूल एवं कॉलेज में पढ़ाया जाता है, यदि उसे हम बराबर पढ़ते हैं तो हमारा जीवन बन सकता है। कुछ लोग इसके विपरीत भी सोच रखते हैं। जॉन लॉक के घरवालों ने उन्हें प्रारंभिक शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड भेजा। घरवालों ने मास्टर डिग्री में ही उनका भविष्य देखा, मगर जॉन का मन उसमें लगनेवाला नहीं था। मजबूरी और पारिवारिक दबाव में उन्होंने पढ़ाई करके वही पढ़ाने का पैâसला किया, मगर उनका दिल उसे स्वीकार नहीं कर पा रहा था।
कुछ वर्षों में ही उन्होंने अपने डॉक्टरी के पुराने शौक को जिंदा करने का विचार किया और नौकरी छोड़ दी। यूनिवर्सिटी के दिनों में वो कोर्स के बाहर अलग-अलग मशहूर डॉक्टरों के बारे में पढ़ते रहते थे। वह पढ़ना बाद में उनके काम आया। डॉक्टरी के अलावा उन्होंने उस समय के जाने-माने विद्वानों के साथ उठना-बैठना शुरू किया। उन्होंने लॉर्ड एस्ले को साथ में लिया। एस्ले के साथ बैठनेवाले बुद्धिजीवियों का भी साथ लिया। लॉक जो मास्टर्स करके टीचर की नौकरी करते, वो अब उन बुद्धिजीवियों के संगत में राजनीति विज्ञान के सिद्धांत पर चर्चा करने लगे। शासन पर दो लेख लिखकर जॉन लॉक ने लंबी लकीर खींच दी। शहर में सब ओर उनके लेख की चर्चा होने लगी।
लॉक ने अपने उदाहरण से हमें बताया कि हमारे जीवन में से कोई भी ख्वाब तब तक नहीं मरता, जब तक हमारे अंदर वह पल रहा हैं। जॉन लॉक कहते थे कि यूनिवर्सिटी या कॉलेज में छात्रों को अपने विषय के अतिरिक्त समाज और राजनीति का भी पूरा अध्ययन करना चाहिए। उनका कहना था कि राजनीति और समाज में पैâलती विसंगतियों पर ध्यान दो और जब उन पर प्रयोग करने की ताकत आ जाए तो उसे सबके सामने रखो। जब सबके सामने लाओ तो पीछे मत हटना, क्योंकि तभी आपका विचार विराट वृक्ष बनने को तैयार होगा। जॉन लॉक ने खुद अपने जीवन में यह साबित करके दिखा दिया।

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