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कील ना ठोंको… पेड़ों को भी होता है दर्द!

अगले सप्ताह सभी पेड़ों से होर्डिंग हटाए जाएंगे
सामना संवाददाता / मुंबई। पेड़ों में भी जीवन होता है। यह अलग बात है कि उनके चीखने-चिल्लाने की आवाजें नहीं आतीं लेकिन उसके तने पर कील ठोंकने, होर्डिंग लटकाने के लिए तार से बांधना आदि से पेड़ों को भी दर्द होता है। बेइंतहा कील ठोंकने से पेड़ भी कराह उठते हैं। उनके दर्द को समझते हुए मनपा ने अब उनके तन से कील निकालने और तारों के बंधन से उन्हें मुक्त कर उनका इलाज करने का निर्णय लिया है। इस कार्य को मनपा अभियान चलाकर पूरा करेगी। अगले सप्ताह आगामी १८ से २३ मई तक मनपा उद्यान विभाग के तमाम कर्मचारी, वार्ड स्तर के कर्मचारी और सामाजिक संगठन, स्कूल, कालेज के छात्र मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उद्यान विभाग के अधीक्षक जितेंद्र परदेसी ने कहा कि पेड़ों की सुरक्षा, संरक्षण और पोषण के लिए उद्यान विभाग के माध्यम से विभिन्न काम किए जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से जगह-जगह कई पेड़ों पर राजनीतिक पोस्टर बाजी के लिए जमकर कीलें ठोंकी जा रही हैं, जिससे पेड़ों को बाद में काफी नुकसान होता है। उनमें सड़न होने के बाद खोखलापन होने लगता है। इसी तरह कंक्रीट के घेरे बनाने से भी उनका विकास रुक जाता है। ऐसे में उन कीलों को निकालकर और कंक्रीट के घेरे से मुक्त कर अब उन वृक्षों का इलाज कर उन्हें जीवनदान दिया जाएगा। जितेंद्र परदेसी ने कहा कि नेशनल ग्रीन आर्बिट्रेशन की गाइडलाइंस के मुताबिक पेड़ों के आसपास जगह छोड़ना अनिवार्य है। साथ ही पेड़ों पर होर्डिंग, नेमप्लेट, बिजली के तार मिले तो उन्हें हटाना जरूरी है। ‘वृक्ष संजीवनी अभियान’ के तहत पर्यावरण के क्षेत्र में काम करनेवाली संस्थाएं, सामाजिक संगठन, स्कूल और कॉलेज भी शामिल होंगे।

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