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कोरोना मरीजों को ‘लॉन्ग कोविड सिंड्रोम’ का खतरा

अस्पतालों में विशेष वार्ड की सुविधा

कोरोना ठीक होने के बाद भी मरीजों का पीछा नहीं छोड़ रहा है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीज ‘लॉन्ग कोविड सिंड्रोम’ बीमारी के शिकार हो रहे हैं। हालांकि इस बीमारी के उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में विशेष वार्ड की व्यवस्था की गई है। यह जानकारी कल विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने अपने लिखित जवाब में दी।

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक नाना पटोले, अमीन पटेल व अन्य विधायकों ने यह मुद्दा उठाया था। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया ”17 अगस्त 2021 के आस-पास राज्य में पाया गया है कि कई कोरोना मरीज ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड सिंड्रोम बीमारी के चपेट में आए हैं। उनमें नाक- कान -गला और सांस की शिकायतें पाई जा रही हैं। ऐसे मरीजों में बेहद थकान, सांस लेने में तकलीफ, बोधात्मक अकार्यक्षमता (कंजिनिटाइन डिसफंक्शन) या ब्रेन फॉग के लक्षण पाए जाते हैं। कुछ में पाचनतंत्र और उत्सर्जन के लक्षण भी मिलते हैं। स्वास्थ्य मंत्री टोपे के अनुसार लॉन्ग कोविड के इलाज की जिला स्तर और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में व्यवस्था की गई है। जिन्हें कोरोना ठीक होने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें मेडिकल परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

गौरतलब हो कि विशेषज्ञों के अध्ययनों के अनुसार कुछ लोगों में ठीक होने के लंबे समय बाद भी लक्षण जारी रह सकते हैं। कोरोना वायरस का पता चलने के बाद लक्षण चार सप्ताह से अधिक समय तक बने रह सकते हैं। ओमायक्रोन वेरिएंट भी लॉन्ग कोविड सिंड्रोम का कारण बन सकता है।

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