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गुजरात में ३९०० करोड़ का घोटाला

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ कहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मित्र की कंपनी के लिए सारे नियम ताक पर रखते हुए अडानी कंपनी को फायदा पहुंचाने का काम किया है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस बात की गहन जांच हो कि मोदी के गुजरात में ३,९०० करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार में कौन और किसके इशारे पर किया गया है। गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्प्रâेंस की और मीडिया के सामने भाजपा के भ्रष्टाचार को उजागर किया।
गुजरात सरकार ने अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड के साथ एक ऊर्जा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था, लेकिन समझौते का पालन नहीं किया गया, इससे ३,९०० करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला हुआ। सरकार ने बिजली खरीद के लिए ‘अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड’ के साथ एक समझौता ज्ञापन (पीपीए) किया था। शर्त थी कि ऊर्जा शुल्क का भुगतान इंडोनेशिया से प्राप्त किए जाने वाले कोयले के निर्धारित मूल्यों के आधार पर ‘अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड’ को किया जाएगा। पीपीए में साफ लिखा था कि कोयला खरीदने के लिए अडानी कंपनी की प्रतिस्पर्धी बोली और बिल दस्तावेज सरकार को सौंपे जाएंगे। सरकार इन दस्तावेजों की तुलना अंतरराष्ट्रीय मूल्य निर्धारण सर्किट से करेगी, लेकिन अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड ने पांच साल तक सरकार को कोई दस्तावेज नहीं सौंपे। इसके विपरीत सरकार ऊर्जा शुल्क के नाम पर ‘अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड’ को करोड़ों रुपए का भुगतान करती रही। गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की ओर से अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड को एक पत्र भेजा गया था। पत्र में कहा गया है कि आपने अभी तक दस्तावेज नहीं सौंपे हैं, आप इस पर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन फिर भी गुजरात सरकार ने आपको ९,९०२ करोड़ रुपए देने की बजाय पिछले ५ साल में १३,८०२ करोड़ रुपए दिए हैं। अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड को सरकार की ओर से ३,९०० करोड़ रुपए से ज्यादा दिए गए हैं। अनुरोध है कि अडानी कंपनी इसे समय पर सरकार को लौटा दे।
कुछ लोगों ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी। गुजरात सरकार ने ‘अडानी पावर लिमिटेड’ को एक पत्र लिखा। अगर ये जानकारी सामने नहीं आती तो गुजरात सरकार के ३,९०० करोड़ रुपए मुफ्त में अडानी ग्रुप के पास चले जाते। यह सारा पैसा पीपीए का था, जिसका बोझ गुजरात की जनता पर पड़ा है। ३,९०० करोड़ रुपए का इतना बड़ा घोटाला हुआ है। यह घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग है और इसकी जांच ईडी और सीबीआई से होनी चाहिए। सेबी को इसकी भी तुरंत जांच करनी चाहिए। गोहिल ने मांग की है कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि पांच साल तक १३,८०२ करोड़ रुपए का भुगतान किसके इशारे पर किया जा रहा था।

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