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झांकी : नीतीश को लेकर सनसनी

अजय भट्टाचार्य

नीतीश को लेकर सनसनी
राष्ट्रपति चुनाव की तारीख का एलान हो चुका है। केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के अलग-अलग धड़े राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर मंथन कर रहे हैं। बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार ने यह कहकर सियासी सनसनी मचा दी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रपति पद के बेहतर उम्मीदवार होंगे और उनमें इस पद की सारी काबिलियत है। चार महीने पहले फरवरी में भी यह चर्चा जोर से उठी थी कि नीतीश कुमार राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार हो सकते हैं। इसके लिए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और बड़े नेताओं से संपर्क  कर रहे हैं। तब नीतीश ने इन अटकलों को खारिज कर दिया था। प्रशांत किशोर ने भी अलग रास्ता अपना लिया। इसके बाद यह चर्चा थम गई। आयोग द्वारा राष्ट्रपति चुनाव की तारीख का एलान करने के कुछ ही घंटे बाद श्रवण कुमार के इस बयान को अनायास या निराधार कहकर खारिज नहीं किया जा सकता है। श्रवण कुमार ने कोई ठोस बातें तो नहीं कहीं और न ही यह जदयू का कोई आधिकारिक बयान है। अपनी इच्छा के बतौर दिए गए उनके बयान के सियासी निहितार्थ निकाले जाएंगे।
जब खिसक लिए चंद्रा
राजस्थान में भाजपा समर्थित राज्यसभा के निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा मतदान के बाद समझ गए कि इस बार उच्च सदन में जाने का रास्ता बंद हो गया है इसलिए नतीजे आने पहले ही खिसक लिए। बोले, ‘मतगणना का कार्य पूरा होने से पहले मुझे निकलना पड़ रहा है। उसके लिए मैंने सबसे क्षमा मांगी। उम्मीद है कि मुझे अच्छी खबर सुनाएंगे। सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देता हूं और जीतनेवालों को बधाई देता हूं। साथ में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, राज्य नेतृत्व को आभार। जो भी मुझे वोट दिया है, उनका भी आभार प्रकट करता हूं। राजस्थान से एक रिश्ता बन गया जो बरकरार रहेगा। आने-जाने का सिलसिला भी रहेगा। इन दस दिनों में मुझे जो प्यार मिला, उसके लिए आभार।’ लगता है कि अब उन्हें अच्छी खबर का इंतजार ही रहेगा।
हरियाणा का खेला
हरियाणा से राज्यसभा चुनाव में मतदान करने के लिए निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू को मनाने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन की चालबाजी शुरू हुई और भाजपा व निर्दलीय उम्मीदवार ने कांग्रेस विधायकों किरण चौधरी और बीबी बत्रा पर अपने मतपत्र दिखाने का आरोप लगाया। पीठासीन अधिकारी ने हालांकि साफ किया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ मगर चुनाव आयोग पहुंचते ही स्क्रिप्ट बदली और एक वोट रद्द हो गया। कुंडू ने वोट नहीं डाला। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन २९ वोट पाकर भी चुनाव हार गए। मतदान में भाजपा उम्मीदवार को ३१ वोट, निर्दलीय उम्मीदवार को २८ और कांग्रेस उम्मीदवार को २९ वोट मिले। वोटों की गणित कुछ इस तरह बनी कि निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा विजयी घोषित हुए।
अपर्णा फिर खाली हाथ
‘बहुत नाम सुनते थे हाथी की दुम का, मगर छू के देखा तो रस्सी बंधी थी’ को अगर आप अपर्णा यादव से जोड़कर देखें तो ये आपका नजरिया हो सकता है, भाजपा की उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के उम्मीदवारों की सूची इसके लिए दोषी नहीं है। पार्टी द्वारा जारी ९ प्रत्याशियों सूची में अपर्णा का नाम शामिल नहीं है। जबकि सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं  अपर्णा यादव का नाम भी एमएलसी चुनाव के लिए चर्चा में था। अंतिम सूची में केशव प्रसाद मौर्य, जसवंत सैनी, चौधरी भूपेंद्र सिंह, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, जेपीएस राठौर, नरेंद्र कश्यप, दानिश आजाद, बनवारी लाल दोहरे और मुकेश शर्मा का नाम शामिल है। योगी मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या, मंत्री जेपीएस राठौर, भूपेंद्र चौधरी, दानिश आजाद, नरेंद्र कश्यप, जसवंत सैनी और दयालु का एमएलसी टिकट पहले ही पक्का माना जा रहा था क्योंकि ये सभी सदस्य फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। बाकी बची दो सीटों के लिए प्रियंका रावत, संतोष सिंह, अमर पाल मौर्य और अपर्णा यादव का नाम चर्चा में था। इनमें भी अपर्णा यादव की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही थी।

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