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तड़का : दुती की गति पर ब्रेक

कविता श्रीवास्तव

अंतर्राष्ट्रीय एथलीट दुती चंद हिंदुस्थान की बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उन्होंने दौड़ की कई अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में देश का नाम रोशन किया है और पदक जीते हैं। लेकिन हाल ही में डोप टेस्ट की दोषी पाए जाने पर उन्हें चार साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है। अपने करियर की चोटी पर पहुंची दुती के लिए यह बहुत बड़ा झटका है। हालांकि, उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि वे जो दवाइयां ले रही थीं, उसके कंटेंट्स की उन्हें जानकारी नहीं थी। उन दवाओं के प्रतिबंधित होने का भी उन्हें पता नहीं था। उनका दावा कितना सही है, कितना गलत है, हम नहीं जानते। लेकिन यह समझ में आता है कि अधिकांश खिलाड़ी अपना पूरा ध्यान अपने खेल और अपने अभ्यास पर लगाए रहते हैं। वे बाकी बातों पर विशेष ध्यान नहीं देते। उनका लक्ष्य बेहतरीन खेल प्रदर्शन की ओर ही लगा रहता है। उनके प्रशिक्षक, फिजियोथेरापिस्ट, न्यूट्रीशियन विशेषज्ञ आदि भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी संभालते हैं। खिलाड़ियों को तैयार करने का जिम्मा उठाते हैं। उनकी खुराक तय करते हैं। उन्हें कौन-सी दवाई लेनी और कौन-सी नहीं, यह भी उन्हें देखना चाहिए। क्योंकि विशेषज्ञ और प्रशिक्षक आदि मिलकर काफी कुछ तय करते हैं। खानपान में लापरवाही के कारण ही अक्सर खिलाड़ी प्रतिबंधित वस्तुओं का सेवन कर लेते हैं। इसका पता उन्हें डोप टेस्ट के बाद ही लगता है। वैसे ढेर सारे खिलाड़ी प्रोटीन और विटामिन्स के लिए भोजन के अतिरिक्त कुछ सप्लीमेंट लेते हैं। शरीर को इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसी ही किसी वस्तु में कोई प्रतिबंधित प्रदार्थ उनके शरीर में चला जाए और बाद में डोप टेस्ट में यह पता लगे तो खिलाड़ी प्रतिबंधित हो जाता है। कोई जानबूझ कर अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ऐसा करे तो वह दोषी है। लेकिन कोई गलती से प्रतिबंध का कारण बने तो यह बहुत ही अफसोस का विषय है। क्योंकि खिलाड़ी को प्रतिबंध करना अनुशासन की सामान्य बात हो सकती है। लेकिन कोई खिलाड़ी बने, इसकी बहुत लंबी प्रक्रिया है। खिलाड़ी को छोटी उम्र से ही अनेक प्रकार के मैदानों पर वर्षों तक लंबा अभ्यास करना होता है। अनेक स्तर की स्पर्धा में भाग लेने के लिए संघर्ष करना होता है। फिर मैदान पर खुद को प्रामाणिक सिद्ध करना होता है। तब जाकर वह देश का तिरंगा लहराता है और देश के लिए मेडल जीत कर लाता है। एकदम शीर्ष पर पहुंचकर किसी खिलाड़ी का वापस जमीन पर गिरना बेहद अफसोसपूर्ण है। फिलहाल दुती चंद की गति पर ब्रेक लग गया है। लेकिन आगे से खिलाड़ियों के खानपान आदि पर सतत निगरानी रखनी चाहिए। उन्हें जांच-परख कर ही हर चीज खाने को दी जाए, इसके प्रबंध भी होने चाहिए। खिलाड़ियों को भी इसका ख्याल रखना चाहिए।

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