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तेज धूप से जानलेवा स्किन कैंसर का खतरा!… हर साल दुनिया में होती है एक तिहाई लोगों की मौत

– साल २०१९ में हुई थी १९ हजार लोगों की मौतें

सामना संवाददाता / मुंबई

तेज धूप में काम करनेवालों के लिए एक बुरी खबर है। हालिया संशोधन में यह चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है कि कड़ी धूप में काम करनेवाले लोगों को नॉन मेलेनोमा नामक स्किन कैंसर अपना शिकार बना रहा है।
इससे हर साल दुनिया में करीब एक तिहाई लोगों की मौतें होती हैंै। एक तरफ जहां सूरज की किरणें जान ले रही हैं, तो वहीं स्किन कैंसर ने लोगों को बेजान कर दिया है। बताया गया है कि साल २०१९ में १८३ देशों में करीब १९ हजार लोग स्किन कैंसर से मौत की नींद सो चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की संयुक्त रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है, जो जर्नल एनवायरनमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित हुई। शोध के नतीजों में बताया गया है कि साल २०१९ में करीब १६० करोड़ लोग खुले में काम करते समय सूरज के हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के संपर्क में आए थे। इन लोगों की आयु १५ वर्ष या उससे अधिक थी, जो दुनिया में काम करने योग्य आबादी के करीब २८.४ फीसदी के बराबर है। रिपोर्ट के अनुसार साल २०१९ में १८३ देशों के करीब १९ हजार लोग धूप में काम करने की वजह से नॉन मेलेनोमा स्किन कैंसर के कारण मारे गए।
ये हैं स्किन कैंसर
नॉन मेलेनोमा स्किन कैंसर त्वचा की ऊपरी परतों में विकसित होता है। इस वैंâसर के दो मुख्य प्रकार बेसल सेल कार्सिनोमा और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा हैं। यह त्वचा वैंâसर एक ठोस लाल गांठ और एक पपड़ीदार वृद्धि के रूप में शुरू होता है, जिसमें खून बहता है या पपड़ी विकसित हो जाती है। इसके बाद एक ऐसा घाव बन जाता है जो ठीक नहीं होता है। इस प्रकार के त्वचा कैंसर के कुछ प्रकार कुछ महीनों या उससे भी अधिक समय में बढ़ते हैं, जबकि नान मेलानोमा कैंसर की पहचान देरी से होती है।
कैंसर का सबसे आम रूप
४० फीसदी मामले नॉन मेलेनोमा कैंसर की रिपोर्ट के अनुसार, त्वचा कैंसर के मामले में सबसे आम रूप है। वैश्विक स्तर पर कैंसर के कम से कम ४० फीसदी मामले इसके लिए जिम्मेदार हैं। यह प्रति वर्ष कम से कम २० से ३० लाख लोगों में होता है। यह खतरा केवल श्रमिकों तक ही सीमित नहीं है। किसान, ट्रैफिक पुलिस, डिलिवरी बॉय, अन्य फील्ड वर्कर्स भी इसके खतरे के दायरे में आते हैं। साल २००० से २०१९ के बीच त्वचा वैंâसर से होनेवाली मौतें बढ़कर दोगुनी हो गई हैं। साल २००० में १०,०८८ मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं २०१९ में मौतों का आंकड़ा १८,९६० पर पहुंच गया।
…तो बच सकती हैं हजारों जान
स्किन कैंसर से बचने के लिए श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। सन स्क्रीन और आवश्यक मेडिसिन ट्यूब के साथ सुरक्षा प्रदान करनेवाले कपड़े उपलब्ध कराना भी बचाव में कारगर हो सकता है। कम उम्र में ही श्रमिकों को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाना बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारों को खुले श्रमिकों को धूप की वजह से होनेवाले त्वचा संबंधी कैसर से बचाने के लिए उन्हें छाया प्रदान करना, काम करने की छोटी-छोटी शिफ्ट बनाना, धूप की जगह काम के घंटों को छाया के समय शिफ्ट करना जैसे उपाय शामिल हैं।

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