" /> नया सबेरा फिर होगा

नया सबेरा फिर होगा

नए रंग से नई उमंग से
जीवन मुकुलित फिर होगा
काले बादल छंट जाएंगे
नया सबेरा फिर होगा
सांसों का भय मिट जाएगा
नवजीवन फिर मुस्काएगा
आज नहीं तो कल होगा
पुलकित हर घर-आंगन होगा
नया सबेरा फिर होगा
नए सुमन फिर मुस्कराएंगे
नई सुगंध फिर बिखराएंगे
नई उमंग से झूम-झूम कर
मुकुलित जीवन फिर होगा
नया सबेरा फिर होगा
भोर रश्मियां बिखराएंगी
मन की कलियां खिल जाएंगी
तब पात-पात इतराएंगे
फिर हर्षित वन-उपवन होगा
नया सबेरा फिर होगा
जब यौवन फिर मुस्काएगा
और गीत खुशी के गाएगा
प्राणों में स्पंदन तब होगा
हर जीवन तब मधुवन होगा
नया सबेरा फिर होगा
आशाएं पट खोलेंगी जब
दैन्य दुख मिट जाएंगे
सब स्वप्न पटल खुल जाएंगे
विस्मित हर नवजीवन होगा
नया सबेरा फिर होगा
एक स्वर्ण किरण जब आएगी
सब अंधकार ले जाएगी
हर खग पंख फैलाएगा
तब उन्मुक्त गगन होगा
नया सबेरा फिर होगा
-भारती संजीव श्रीवास्तव, मुंबई