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निर्यात जमीन पर! देश का व्यापार घाटा बढ़ा

  • जुलाई में १७ फीसदी की गिरावट
  • तीन साल में सबसे निचले स्तर पर

देश के आर्थिक मोर्चे से बुरी खबर आई है। देश का व्यापार घाटा बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि आयात और निर्यात के बीच का अंतर ज्यादा बढ़ा है। असल में हिंदुस्थान का वस्तु निर्यात जुलाई में १५.९ प्रतिशत गिरकर ३२.२५ अरब डॉलर पर आ गया। इसका मतलब है कि निर्यात जमीन पर आ गया है। गत जुलाई में वस्तुओं के निर्यात का मूल्य गिरकर नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई अधिक बढ़ने और मांग लगातार सुस्त रहने का असर हिंदुस्थान के वस्तु निर्यात पर पड़ा है। इससे बीते तीन वर्षों में कुल निर्यात में सर्वाधिक गिरावट दर्ज हुई। जुलाई में हुई तेज गिरावट को कुछ हद तक उच्च आधार के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़े के मुताबिक, जुलाई में आयात १७ फीसदी गिरकर ५२.९२ अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले महीने के मुकाबले ०.३ प्रतिशत की गिरावट आई। देश में आयात किए गए सामान के मूल्य में भी गिरावट आई। यह जिंसों के दाम गिरने के साथ- साथ सरकार के आयात के विकल्प ढूंढ़ने की नीतियां उजागर करती है। व्यापार घाटा जुलाई में २०.६७ अरब डॉलर रहा। यह बीते साल की जुलाई में २५.४५ अरब डॉलर था, जबकि जून के १८.७६ अरब डॉलर की तुलना में अधिक रहा। हालांकि, सकारात्मक पक्ष यह रहा कि जुलाई में सेवा क्षेत्र का निर्यात १२ फीसदी बढ़कर २७.१७ अरब डॉलर हो गया। हालांकि, सेवा क्षेत्र का आयात तुलनात्मक रूप से कम ५.६ फीसदी की दर से बढ़कर १४.८५ अरब डॉलर रहा। इसका परिणाम यह हुआ कि सेवा क्षेत्र का अधिशेष १२.३२ अरब डॉलर रहा। हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि सेवा क्षेत्र के जुलाई के आंकड़े में बदलाव संभव है। ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार आने वाले समय में संशोधित किए जाएंगे। आरबीआई ने सेवा क्षेत्र का नवीनतम आंकड़ा जून, २०२३ का जारी किया है।
वाणिज्य सचिव सुनील बड़थ्वाल ने संवाददाताओं से कहा था कि ज्यादातर देशों के निर्यात वृद्धि में बहुत ज्यादा गिरावट दर्ज हुई है और इन देशों की तुलना में हिंदुस्थान के निर्यात में ‘ज्यादा गिरावट’ नहीं आई है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात में बीते साल की तरह वृद्धि होगी। बीते साल के अंत में निर्यात में जबरदस्त वृद्धि हुई थी। उन्होंने कहा कि देश में प्रोत्साहन से जुड़ी योजनाओं के कारण आयात में भी गिरावट आ सकती है।
२० अरब डॉलर से अधिक घाटा
आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार, जुलाई २०२३ के अनुमानों में वस्तु निर्यात में गिरावट की आशंका जताई गई थी और यह आंकड़े अनुमानों के अनुरूप ही हैं। जिंसों के दामों में सालाना आधार पर गिरावट असर निर्यात, आयात और व्यापार घाटे पर भी पड़ा है। सकारात्मक यह रहा कि गैर तेल आयात स्थिर रहा। हालांकि, बीते महीने की तुलना में जुलाई २०२३ में तेल का कम आयात होने से कुल निर्यात भी प्रभावित हुआ। उपलब्ध रुझानों के अनुसार, अनुमान है कि व्यापार घाटा वित्त वर्ष २०२४ के पहली तिमाही के ११-१३ अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष २४ की दूसरी तिमाही में १५-१७ अरब डॉलर हो सकता है। आने वाले कुछ महीनों में मासिक व्यापार घाटा २० अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर रह सकता है। हिंदुस्थान के वस्तु निर्यात के ३० में से १९ क्षेत्रों में जुलाई के दौरान गिरावट आई। जुलाई में प्रमुख गिरावट वाले क्षेत्र पेट्रोलियम उत्पाद (-४३.६६ प्रतिशत), रत्न व आभूषण (-२९.७२ प्रतिशत), इंजीनियरिंग वस्तुएं (-६.६२ प्रतिशत), ऑर्गेनिक व इनऑर्गेनिक रसायन (-३.०१ प्रतिशत) और रेडीमेड वस्त्र (-१७.३७ प्रतिशत) रहे।

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