मुख्यपृष्ठसमाचारपाकिस्तान को हिंदुस्थान की खरी-खरी!

पाकिस्तान को हिंदुस्थान की खरी-खरी!

• ओआईसी में हुर्रियत को किया था आमंत्रित
• विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में की निंदा
• आतंकी गतिविधियों में शामिल संगठनों को प्रोत्साहित न करें

सामना संवाददाता / नई दिल्ली । हिंदुस्थान और पाकिस्तान के विवाद जग जाहिर हैं। दोनों देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए अक्सर बैठक होती रहती है। इसी तरह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अगले सप्ताह इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की बैठक होने वाली है। उससे पहले पाकिस्तान की एक हरकत ने उसकी नीति पर सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल पाकिस्तान ने इस बैठक में अपने एजेंडे के तहत अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्प्रâेंस को भी आमंत्रित किया है। पाकिस्तान की हरकत का कड़ा विरोध करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने खरी-खरी सुनाई है। मंत्रालय ने कड़े शब्दों में कहा कि हम ओआईसी से उम्मीद करते हैं कि वो एंटी इंडिया मूवमेंट और आतंकी गतिविधियों में शामिल संगठनों को प्रोत्साहित नहीं करेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम इस तरह की गतिविधियों को बहुत ही गंभीरता से लेते हैं। ये देश की संप्रभुता पर हमला करने की कोशिश है। बागची ने ओआईसी के चरित्र पर शक जाहिर करते हुए कहा कि ये बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि ओआईसी विकास के अहम मुद्दों पर ध्यान देने की बजाय अपने एक सहयोगी के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। मंत्रालय ने कड़े शब्दों में कहा कि हमने बार-बार कहा है कि वो भारत के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए निहित स्वार्थी तत्वों को अपना प्लेटफॉर्म न दे। ओआईसी ने २२ और २३ मार्च २०२२ में इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारुक को निमंत्रण दिया है।
गौरतलब है कि सर्वदलीय हुर्रियत सम्मेलन का गठन १९९२ में मीरवाइज उमर फारूक के पहले अध्यक्ष के रूप में किया गया था। इसका संविधान हुर्रियत को कश्मीर विवाद के समाधान के लिए संघर्ष छेड़ने के लिए कहता है। पिछले साल नवंबर २०२१ में खबर सामने आई थी कि केंद्र सरकार हुर्रियत की सभी शाखाओं को बैन कर सकती है। इस पर घाटी में आतंकियों को फंडिंग करने का आरोप लगा था।

 

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