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पाठकों की रचनाएं : बारिश की बूंदें

बारिश की बूंदें
बारिश की बूंदें शोर क्यों मचा रही हैं
किसी के दिल का हाल सुना रहीं हैं
अहसास जो कह न पाए कोई
इतना ही पावन और शीतल है
जो मन में तूफान मचा रहा है
इन्हीं बारिश की बूंदों की तरह
बरसाना चाहता है बरस न पता है।
बरसेगा तो ऐसे ही जोर से बरसेगा
शोर मचाएगा और खुशी भी पाएगा।
उमड़-घुमड़ कर कारी बदरिया जल बरसायो रे
मेहंदी वाला रंग रचाकर सखियां झूला झूलें
पांव की पायल कहती है उड़ते बादल छू लें
पीउ-पीउ कर के पपिहा ने शोर मचायो रे।
सर-सर उड़े चुनरिया हवा चले सन-सन
रिमझिम बरसे पानी भीगे गोरिया का तन
सब सखियन ने मिलकर राग सुनायो रे।
बहका मौसम है ऋत पिया मिलन की आई
सखियां मिल तीज मनावें हरियाली है छाई
जिसके पिया परदेस बसे चिठिया भिजवायो रे।
-आस्था कुमारी, नई दिल्ली
बूंदों की पुâहार
हल्की बूंदों की पुâहार है,
ये सावन की बहार है।
सखियां संग झूलन को आर्इं,
आज हरियाली तीज त्योहार है।
झूम उठे दिल झूम बराबर,
गीतों के तराने और सावन के मल्हार हैं।
यह पावन पर्व है हरियाली तीज का,
इस दिन झूलों की लगती खूब कतार है।
तीज का त्योहार सखियां भी तैयार हैं,
मेहंदी हाथों में रचाई
करे सोलह श्रृंगार हैं।
हरी चूड़ी खन-खन है करती,
पायल भी छम-छम है बजती।
बिंदी की चमक अपार है,
आज हरियाली तीज त्योहार है।
मंदिर में दर्शन को जातीं,
शिव-पार्वती से गुहार लगातीं।
होगा अमर सुहाग,
आज हरियाली तीज त्योहार है।
-अतुल पाठक ‘धैर्य’ हाथरस (यूपी)
बरखा रानी
वैâसे करूं मैं स्वागत तेरा बता ओ बरखा रानी
घर की छत गलती है जब-जब बरसे पानी
बारिश में लगता है मौसम बड़ा सुहाना
बूंद-बूंद ताल बजाए पंछी गाएं गाना
मैं सोचूं वैâसे चूल्हे की आग जलानी
ठंडी-ठंडी बौछारें हैं पवन चले घनघोर
बादल गरजे उमड़-घुमड़ नाचे वन में मोर।
मन मेरा सोचे वैâसे गिरती दीवार बचानी
इंद्रधनुष की छटा बिखेरी बरसा पानी जम के
पांवों में बांधे बरखा नाची छम-छम से
मैं खोजूं वो सूखा कोना जहां खाट बिछानी
प्रकृति कर रही स्वागत तेरा कर अपना शृंगार
पपीहे ने किया अभिनंदन गाकर मेघ मल्हार
मैं भी करता स्वागत तेरा भर अंखियों में पानी
आ जा ओ बरखा रानी,आ जा ओ बरखा रानी।
-हेमंत रिछारिया

 

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