" /> पीएम मोदी के प्रस्तावक रहे काशी के डोम राजा का निधन, पीएम मोदी और सीएम योगी ने जताया दुख

पीएम मोदी के प्रस्तावक रहे काशी के डोम राजा का निधन, पीएम मोदी और सीएम योगी ने जताया दुख

काशी के डोम राजा जगदीश चौधरी का 55 वर्ष की आयु में मंगलवार की सुबह निधन हो गया। पिछले कई दिनों से वह बीमार चल रहे थे और एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।डोमराजा की मौत के बाद पूरे काशी में शोक की लहर दौड़ गयी और उनके त्रिपुरा भैरवी स्थित आवास पर उनके शुभेच्छुओं की भीङ इकट्ठा हो गयी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ट्वीट कर डोमराजा के निधन पर दुःख जताया और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी भी निधन की सूचना मिलते ही उनके घर पहुंचे हैं।

2019 के संसदीय चुनाव में प्रधानमंन्त्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने जगदीश चौधरी के निधन से पूरी काशी में शोक है। पीएम ने लिखा कि वाराणसी के डोम राजा जगदीश चौधरी जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है। वे काशी की संस्कृति में रचे-बसे थे और वहां की सनातन परंपरा के संवाहक रहे। उन्होंने जीवनपर्यंत सामाजिक समरसता के लिए काम किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को इस पीड़ा को सहने की शक्ति दे।

डोमराजा की मौत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर उन्हें सामाजिक समरसता की भावना का प्रतीक बताया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘सामाजिक समरसता की भावना के प्रतीक पुरुष, काशीवासी डोमराजा श्री जगदीश चौधरी जी का निधन अत्यंत दुःखद है। श्री जगदीश चौधरी जी का कैलाशगमन सम्पूर्ण भारतीय समाज की एक बड़ी क्षति है। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि आपको अपने परमधाम में स्थान प्रदान करें। ॐ शांति!’
वहीं वाराणसी शहर दक्षिणी से विधायक और राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी डोम राजा के घर पहुंचे। परिवार वालों से मुलाकात कर सांत्वना दिया।

ज्ञात हो कि पीएम मोदी का प्रस्तावक बनने के बाद जगदीश चौधरी ने कहा था कि अब हमारे समाज को अलग पहचान मिली है। पहली बार किसी राजनीतिक दल ने हमें यह पहचान दी है। हम बरसों से लानत झेलते आए हैं। हालात पहले से सुधरे जरूर हैं, लेकिन समाज में हमें पहचान नहीं मिली है और प्रधानमंत्री चाहेंगे तो हमारी दशा जरूर बेहतर होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि नेता वोट मांगने आते हैं लेकिन बाद में कोई सुध नहीं लेता। हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट में करीब 500 से 600 डोम रहते हैं। जबकि उनकी बिरादरी में पांच हजार से ज्यादा लोग हैं। दोनों घाटों पर सभी डोम की बारी लगती है और कभी दस दिन या बीस दिन में बारी आती है। बाकी दिन बेगारी। कोई स्थायी नौकरी नहीं है और कमाई भी इतनी नहीं कि बच्चों को अच्छी जिंदगी दे सकें।

जगदीश चौधरी ने पीएम मोदी का प्रस्तावक बनने पर गर्व जताते हुए कहा था कि यह पूरी बिरादरी के लिए गर्व की बात है कि मैं प्रधानमंत्री का प्रस्तावक बन सका। हम समाज में पहचान पाने को तरस गए हैं। उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी जीतने के बाद हमारी पीड़ा समझेंगे और हमें वह दर्जा समाज में दिलाएंगे जिसकी शुरुआत आज हुई है।

पौराणिक गाथाओं के अनुसार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने काशी में खुद को श्मशान में चिता जलाने वाले कालू डोम को बेच दिया था। उसके बाद से ही डोम बिरादरी का प्रमुख यहां डोम राजा कहलाता है। महाश्मशान पर चिता को जलाने के लिए आग उसी से ली जाती है।