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मदन द्वादशी आज: कामनाओं की पूर्ति करेंगे कामदेव! पुत्र शोक से मिलेगी मुक्ति

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मदन द्वादशी व्रत रखते हैं। इस दिन कामदेव की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि कामदेव का दूसरा नाम मदन है।​ उनकी पूजा करने और मदन द्वादशी व्रत रखने से योग्य पुत्र की प्राप्ति होती है और दुख दूर होते हैं। जिनको पुत्र शोक होता है, वे इस व्रत को करके इस शोक से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मदन द्वादशी व्रत करने से ही दैत्यों की माता दिति को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी।
मदन द्वादशी तिथि
पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का प्रारंभ १३ अप्रैल यानी आज प्रात: ०५ बजकर ०२ मिनट पर हो रहा है। इस तिथि का समापन १४ अप्रैल यानी कल प्रात: ०४ बजकर ४९ मिनट पर होगा। ऐसे में सूर्योदय को आधार मानकर देखें, तो मदन द्वादशी व्रत १३ अप्रैल को रखा जाएगा।
पूजा मुहूर्त
मदन द्वादशी के दिन वृद्धि योग सुबह ११ बजकर १५ मिनट से शुरू हो रहा है और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र सुबह ०९ बजकर ३७ मिनट से प्रारंभ हो रहा है। यह योग और नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए अच्छे होते हैं। इससे पूर्व मघा नक्षत्र और गंड योग रहेगा। इस योग और नक्षत्र में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। ऐसे में मदन द्वादशी की पूजा सुबह ११ बजकर १५ मिनट के बाद से करें तो ज्यादा फलदायी रहेगा। हालांकि अमृत काल सुबह ०७ बजकर ०७ मिनट से लेकर सुबह ०८ बजकर ४७ मिनट तक है। इस अवधि में पूजा या मांगलिक कार्य किया जा सकता है। इस दिन का कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है।
मदन द्वादशी का महत्व
योग्य पुत्र की प्राप्ति के लिए मदन द्वादशी का व्रत रखते हैं। यह व्रत कम से कम लगातार १३ द्वादशी तक रखा जाता है। पौराणिक क​थाओं के अनुसार जब देवताओं के हाथों राक्षस वंश का सर्वनाश हो गया तो उनकी माता दिति बहुत ही दुखी थीं, तब उन्होंने ऋषि-मुनियों के सुझाव पर मदन द्वादशी व्रत रखा था। इस व्रत के प्रभाव से पुत्रों की मृत्यु का दुख उनके मन से खत्म हो गया और उनको पुत्र की भी प्राप्ति हुई।

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