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महिलाओं का दुश्मन सर्वाइकल कैंसर

  • एचपीवी वैक्सीन भी रोकने में नहीं है सक्षम
  • हर पांच साल में जांच करना जरूरी

सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं का दुश्मन बनता जा रहा है। ३० साल का पड़ाव पार करनेवाली महिलाओं को इसका खतरा अधिक है। इसे कंट्रोल करने के लिए तैयार की गई ह्यूमन पैपिलोमा वायरस वैक्सीन (एचपीवी) भी पूरी तरह से सक्षम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार एचपीवी वैक्सिनेशन के बाद भी सर्वाइकल कैंसर नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसे रोकने के लिए हर पांच साल में महिलाओं द्वारा परीक्षण कराते रहना ही एकमात्र कारगर उपाय है। उल्लेखनीय है कि १८-२५ वर्ष की आयु की महिलाओं में एचपीवी संक्रमण चरम पर होता है। हिंदुस्थान में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे आम कैंसर है। हर साल इस कैंसर के सवा लाख से अधिक मामले सामने आते हैं। इतना ही नहीं, देरी से निदान होने की वजह से इस अवधि में ६० हजार से ज्यादा मौतें होती हैं।
केंद्र के टीकाकरण कार्यक्रम में नहीं शामिल है यह वैक्सीन
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह वैक्सीन केंद्र सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं है। टीके की लागत तीन हजार रुपए है, वहीं टीकाकरण पूरा करने के लिए दो से तीन खुराक देने की आवश्यकता होती है। हालांकि इस वैक्सिनेशन से भी सर्वाइकल कैंसर नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यह किए गए अध्ययन में भी स्पष्ट हो चुका है।
क्या है सर्वाइकल कैंसर ?
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होता है, जो गर्भाशय का निचला हिस्सा होता है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के विभिन्न प्रकार उनमें से एक यौन संचारित संक्रमण सबसे अधिक सर्वाइकल कैंसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

रियायत दर पर वैक्सीन देने की हो रही मांग
राज्य में सर्वाइकल कैंसर को मात देने के लिए बनाए गए एचपीवी वैक्सीन को रियायती दरों पर मुहैया कराए जाने की मांग हो रही है। किशोरवयीन लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर पाया जाता है। हालांकि महिलाओं में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है इसलिए किशोरवयीन लड़कियों के लिए एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध है।

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