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मैं आ गई बाकी को भी लाओ!… जगह-जगह पड़ी हुई थीं लाशें

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
यूक्रेन में फंसे हिंदुस्थानी छात्रों को ऑपरेशन गंगा के तहत वहां से निकाला जा रहा है। अब भी कई छात्र वहां फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रिया अदिति यूक्रेन से वापस लौटी हैं। वापस आने के बाद उन्होंने बताया कि खारकीव में वैंâपस में ही पढ़ाई चल रही थी, तब हमें यह नहीं पता था वॉर होने वाला है। फिर ऑनलाइन क्लासेस शुरू हुर्इं। इस बीच सुबह अचानक बम के धमाके शुरू हुए और सायरन बजने लगा। हमें बताया गया कि यूक्रेनी सेना युद्धाभ्यास कर रही है। इसके बाद में फिर लगातार बमबारी होने लगी। अफरा-तफरी और दहशत के माहौल में हम फ्लैट छोड़कर मेट्रो स्टेशन चले गए।
मेट्रो के बाद बंकर में जाना पड़ा
अदिति ने बताया कि सभी छात्र रूम के पास बने बंकर में चले गए और वहीं दिन-रात बिताते रहे। इसके बाद पूरे समय कर्फ्यू लगा दिया गया और बमबारी और गोली की आवाजें सुनाई देने लगी। ब्लास्टिंग होती तो बंकर के हिलने का अहसास होता था। माइनस ५ डिग्री तापमान में जमीन और धूल मिट्‌टी के बीच जमीन में ही सोना पड़ता था।
मैगी खाकर भरते रहे पेट
कई हिंदुस्थानी छात्रों की बंकर में ही सुबह होती थी। सभी छात्रों को मैगी खाकर पूरे दिन रहना पड़ता था। फोन करना होता तो बंकर के बाहर निकल कर एक-मिनट के लिए बात करके आ जाते थे। कर्फ्यू के चलते दुकानें भी बंद थीं। इसके चलते फ्लैट में रखा सामान भी खत्म होने लगा था।
घूंट-घूंट करके पीते थे पानी
रिया ने बताया कि इन सब के अलावा पीने के पानी तक की समस्या थी। बंकर में बोतल लेकर जाते थे और घूंट-घूंट पानी पीकर काम चलाते थे। एटीएम भी बंद हो गया था और रुपए भी खत्म होने लगे थे। ऐसे में किसी तरह बाहर निकलना जरूरी था।
फायरिंग में हिलता है बंकर
बंकर में रहते हुए वहां हर पांच मिनट में ब्लास्टिंग होती थी। बाहर गोलीबारी और टैंकर की आवाजें सुनाई देतीं। कभी-कभी ऐसा लगता था कि पास ही ब्लास्टिंग हो रही है और बंकर हिल जाता। इस दौरान सभी लोग डरे-सहमे रहते थे।
लाशें देखकर कांप गई रूह
हिंदुस्थानी छात्रों को जब खारकीव स्टेशन पहुंचने की सूचना आई, तब सभी छात्र स्टेशन के लिए रवाना हुए। इस दौरान जगह-जगह यूक्रेनियन सैनिक हथियारों से लैस नजर आ रहे थे। ब्लास्टिंग से तबाही का मंजर भी दिख रहा था। टैंक के पास और जगह-जगह लाशें पड़ी थीं, जिसे देखकर हमारी रूह कांप गई। किसी तरह हम रेलवे स्टेशन पहुंचे।
ट्रेन में चढ़ने से रोकते रहे यूक्रेनी सैनिक
खारकीवव छोड़ने के लिए जब छात्र रेलवे स्टेशन पहुंचे, तब वहां यूक्रेनियन सैनिक थे। यूक्रेनियन भी खारकीव छोड़कर जा रहे थे। लिहाजा ट्रेन में भारी भीड़ थी। इसके चलते यूक्रेनियन सैनिक उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोकते रहे और धमका कर छात्रों के साथ मारपीट भी करते रहे। ऐसा करते-करते हमारी तीन ट्रेन मिस हो गर्इं। तब किसी तरह हमें लवीव स्टेशन के लिए ट्रेन पकड़नी पड़ी।

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