मुख्यपृष्ठधर्म विशेषशीतला अष्टमी आज: बासी खाने का लगेगा भोग, रोगों से मिलेगी मुक्ति!

शीतला अष्टमी आज: बासी खाने का लगेगा भोग, रोगों से मिलेगी मुक्ति!

माता शीतला पूरा करेंगी मनोकामनाएं
हिंदू धर्म में हर महीने कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं। साथ ही देवी-देवताओं के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इसी क्रम में आज शीतला अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। ये पर्व प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। शीतला अष्टमी को बसौड़ा अष्टमी भी कहा जाता है। बसौड़ा शीतला माता को समर्पित लोकप्रिय त्योहार है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसके साथ ही रोगों से भी मुक्ति मिलती है क्योंकि माता शीतला को शीतलता प्रदान करनेवाला कहा गया है।
मान्यताओं के अनुसार शीतला अष्टमी व्रत के दौरान घर में ताजा भोजन नहीं पकाया जाता, बल्कि एक दिन पहले बनाए गए भोजन को ही प्रसाद के रूप में खाया जाता है। इस परंपरा के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। कहा जाता है कि शीतला माता को बासी भोजन काफी प्रिय है। शीतला अष्टमी के दिन लोग बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कहा जाता है कि अष्टमी के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और रात में बने भोजन को ही उस दिन ग्रहण करने का रिवाज है। वैज्ञानिक कारण की बात करें तो चैत्र माह की सप्तमी और अष्टमी तिथि ऋतुओं के संधिकाल पर आती हैं, यानी शीत ऋतु के जाने का और ग्रीष्म ऋतु के आने का समय है। इन दो ऋतुओं के संधिकाल में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सर्दी और गर्मी की वजह से कई तरह की मौसमी बीमारियों के होने का खतरा रहता है, इसलिए ठंडा खाना खाने की परंपरा बनाई गई है। साथ ही साल में एक दिन सर्दी और गर्मी के संधिकाल में ठंडा भोजन करने से पेट और पाचन तंत्र को भी लाभ मिलता है।
पौराणिक कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा। मान्यता के मुताबिक अष्टमी के दिन बासी चावल माता शीतला को चढ़ाए व खाए जाते हैं लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह ताजा खाना बना लिया। दरअसल, हाल ही में दोनों की संतानें हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना पहुंचाए। सास को ताजे खाने के बारे में पता चला तो उसने नाराजगी जाहिर की। कुछ समय बाद पता चला कि दोनों बहुओं की संतानों की अचानक मृत्यु हो गई है। इस बात को जान सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया। शवों को लेकर दोनों बहुएं घर से निकल गर्इं। बीच रास्ते में वो विश्राम के लिए रूकीं। वहां उन दोनों को दो बहनें ओरी और शीतला मिली। दोनों ही अपने सिर के जुओं से परेशान थीं। उन बहुओं को दोनों बहनों को ऐसे देख दया आई और वे दोनों के सिर को साफ करने लगीं। कुछ देर बाद दोनों बहनों को आराम मिला। शीतला और ओरी ने बहुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि तुम्हारी गोद हरी हो जाए। ये बात सुन दोनों बुरी तरह रोने लगीं और उन्होंने महिला को अपने बच्चों के शव दिखाए। ये सब देख शीतला ने दोनों से कहा कि उन्हें उनके कर्मों का फल मिला है। ये बात सुन वो समझ गर्इं कि शीतला अष्टमी के दिन ताजा खाना बनाने के कारण ऐसा हुआ है। ये सब जान दोनों ने माता शीतला से माफी मांगी और आगे से ऐसा न करने को कहा। इसके बाद माता ने दोनों बच्चों को फिर से जीवित कर दिया। इस दिन के बाद से पूरे गांव में शीतला माता का व्रत धूमधाम से मनाया जाने लगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ- मार्च २५, २०२२ को मध्यरात्रि १२.०९ बजे
अष्टमी तिथि समाप्त- मार्च २५, २०२२ को सायं १०.०४ बजे
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त- सुबह ०६.२० बजे से शाम ०६.३५ बजे तक

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