मुख्यपृष्ठधर्म विशेषशुक्र प्रदोष व्रत आज : मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण!

शुक्र प्रदोष व्रत आज : मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण!

हिंदुस्थान तीथियों और त्योहारों का देश है। यहां सनातन काल से व्रतों और उपवासों की परंपरा चली आ रही है। उन्हीं व्रतों में एक है प्रदोष व्रत। प्रदोष व्रत हर मास में त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो कि भगवान शिव जी को समर्पित होता है। इस व्रत में भक्त उपवास रखता है और भगवान शिव जी के साथ माता पार्वती जी का विधि-विधान से पूजन और वंदन करता है। प्रदोष व्रत जिस भी दिन को पड़ता है। उस प्रदोष व्रत का नाम उसी दिन के नाम से जाना जाता है। इस समय ज्येष्ठ मास चल रहा है। इस मास का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन अर्थात २७ मई, २०२२ को (आज) पड़ रहा है इसलिए यह प्रदोष व्रत, शुक्र प्रदोष व्रत होगा। इस शुक्र प्रदोष व्रत के दिन शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है। इस कारण इस बार शिव भक्तों के लिए इसका महत्व और बढ़ गया है। इस प्रदोष व्रत का पूरा पुण्य लाभ लेने के लिए भगवान शिव का पूजन शुभ मुहूर्त में पूरे विधि-विधान से करें। मान्यता है कि प्रदोष व्रत पर विधि-विधान से भगवान शिवजी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारंभ- शुक्रवार २७ मई को ११.४७ बजे
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी समाप्त- शनिवार मई २८ को ०१.०९ बजे
प्रदोष काल- २७ मई, २०२२ को शाम ०७.१२ बजे से ०९:१४ बजे तक
पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रात:काल स्नान करें। उसके बाद साफ कपड़ा पहनकर घर के मंदिर में दीप प्रज्जवलित करें। इसके बाद भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक कर उन्हें उनका प्रिय पुष्प अर्पित करें। पूजा करें। भोग लगाएं और उसके बाद आरती करें। अंत में प्रसाद वितरण करें।
कथा
कहा जाता है कि एक नगर में तीन मित्र रहते थे। राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था लेकिन गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है। धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता-पिता को कन्या की विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा, जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहुंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया, जहां उसकी हालत ठीक होती गई। यानी शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।

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